देश की सबसे बड़ी सीमेंट निर्माता कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर–दिसंबर) के नतीजे शनिवार, 24 जनवरी को जारी कर दिए। बेहतर बिक्री, मजबूत मांग और ऑपरेशनल एफिशिएंसी के दम पर कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 26.8 प्रतिशत बढ़कर 1,729.44 करोड़ रुपए पहुंच गया।
पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को 1,363.44 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा हुआ था। रिकॉर्ड सीमेंट बिक्री और लागत में नियंत्रण के चलते इस तिमाही में कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन मजबूत रहा।
रेवेन्यू में 23% की बढ़ोतरी, बिक्री 38.87 मिलियन टन तक पहुंची
आदित्य बिड़ला ग्रुप की इस फ्लैगशिप कंपनी का ऑपरेशंस से होने वाला रेवेन्यू भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। तिमाही के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 22.8 प्रतिशत बढ़कर 21,829.68 करोड़ रुपए हो गया, जबकि पिछले साल दिसंबर तिमाही में यह 17,778.83 करोड़ रुपए था।
वॉल्यूम के लिहाज से भी अल्ट्राटेक ने नया रिकॉर्ड बनाया। इस तिमाही में कंपनी ने 38.87 मिलियन टन (MT) सीमेंट की बिक्री की, जो सालाना आधार पर 15 प्रतिशत अधिक है। घरेलू बाजार में ग्रे सीमेंट की मांग में 15.4 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जो इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट सेक्टर में बढ़ती गतिविधियों का संकेत है।

कैपेसिटी के मामले में दुनिया में दूसरे नंबर पर पहुंची अल्ट्राटेक
तिमाही के दौरान कंपनी ने महाराष्ट्र के धुले और राजस्थान के नाथद्वारा में नए सीमेंट प्लांट शुरू किए। इसके साथ ही अल्ट्राटेक की कुल घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़कर 188.66 मिलियन टन प्रति वर्ष (mtpa) हो गई है।
अगर यूएई (UAE) में मौजूद ऑपरेशंस को भी शामिल किया जाए, तो कंपनी की ग्लोबल प्रोडक्शन कैपेसिटी 194.06 mtpa तक पहुंच चुकी है। इसके साथ ही अल्ट्राटेक अब प्रोडक्शन कैपेसिटी के लिहाज से दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी बन गई है, जबकि बिक्री के मामले में (चीन को छोड़कर) यह दुनिया में नंबर-1 स्थान पर है।
नए लेबर कोड से 88 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ
कंपनी ने बताया कि 21 नवंबर 2025 से लागू हुए नए लेबर कोड के चलते उस पर 88.48 करोड़ रुपए का एकमुश्त अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा है। यह खर्च ग्रेच्युटी और छुट्टियों के बदले भुगतान (Leave Encashment) के नियमों में बदलाव के कारण आया है।
कंपनी के मुताबिक, यदि इस असाधारण खर्च को अलग कर दिया जाए, तो तिमाही मुनाफा और भी बेहतर रह सकता था।
ईंधन और बिजली सस्ती होने से लागत में राहत
तिमाही नतीजों के अनुसार, अल्ट्राटेक को लागत के मोर्चे पर भी अच्छी खबर मिली। कोयला और बिजली की कीमतों में नरमी के चलते फ्यूल और पावर खर्च में करीब 15 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं लॉजिस्टिक्स लागत में भी 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

हालांकि, रॉ मटेरियल की कीमतों में 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। इसके बावजूद कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन सुधरकर 18 प्रतिशत हो गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में 16 प्रतिशत था।
भविष्य की रणनीति: 240 mtpa क्षमता का लक्ष्य
अल्ट्राटेक ने भविष्य को लेकर आक्रामक विस्तार योजना बनाई है। कंपनी का लक्ष्य अपनी कुल उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 240.76 मिलियन टन प्रति वर्ष तक पहुंचाना है। इसके लिए इंडिया सीमेंट्स के साथ मिलकर ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हो चुका है।
तिमाही के दौरान कंपनी ने 2,357 करोड़ रुपए का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) किया है। इसके अलावा अल्ट्राटेक अपने केबल्स और वायर्स बिजनेस का भी तेजी से विस्तार कर रही है, जिसका निर्माण कार्य प्रोजेक्ट साइट्स पर शुरू हो चुका है।

नॉन-सीमेंट बिजनेस में भी मजबूत ग्रोथ
अल्ट्राटेक का नॉन-सीमेंट सेगमेंट भी बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। कंपनी के रेडी मिक्स कंक्रीट (RMC) बिजनेस से होने वाली कमाई सालाना आधार पर 26 प्रतिशत बढ़कर 1,848 करोड़ रुपए हो गई।
वहीं व्हाइट सीमेंट के रेवेन्यू में भी 5.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। कंपनी की ओवरसीज यानी विदेशी बाजारों से होने वाली आय 35 प्रतिशत बढ़कर 1,194 करोड़ रुपए तक पहुंच गई, जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत मांग को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, अल्ट्राटेक सीमेंट ने तीसरी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के साथ अपनी बाजार में बादशाहत और वैश्विक स्थिति को और मजबूत किया है। बढ़ती क्षमता, नियंत्रित लागत और विविध बिजनेस पोर्टफोलियो के दम पर कंपनी आने वाले वर्षों में भी तेज ग्रोथ के रास्ते पर बनी रहने की उम्मीद जता रही है।