आस्था, भक्ति और विश्वास का केंद्र माने जाने वाला काशीबुग्गा वेंकटेश्वर मंदिर, शनिवार को एक भयावह त्रासदी का साक्षी बन गया। एकादशी के शुभ अवसर पर जब हजारों श्रद्धालु भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन के लिए उमड़े, तो वहां अचानक मची भगदड़ ने सबकुछ बदल दिया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 8 महिलाएं और एक मासूम बच्चा शामिल हैं। वहीं, 25 से ज्यादा लोग घायल हैं और कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
🔔 एकादशी पर उमड़ी भीड़ बनी मौत का सबब
शनिवार की सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगा हुआ था। हर ओर “गोविंदा गोविंदा” के जयकारे गूंज रहे थे। भीड़ इतनी अधिक थी कि मंदिर के बाहर और भीतर दोनों ओर लोगों का सैलाब उमड़ आया।
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार,
“करीब दोपहर के समय रेलिंग के पास धक्का-मुक्की हुई। रेलिंग का एक हिस्सा टूट गया और लोग गिर पड़े। भीड़ में पीछे से धक्का लगने पर भगदड़ मच गई।”
देखते ही देखते श्रद्धा का माहौल चीख-पुकार में बदल गया।
😭 महिलाएं और बच्चे बेकाबू भीड़ में दबे — वीडियो में दर्दनाक दृश्य
हादसे के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। इनमें साफ देखा जा सकता है कि मंदिर की सीढ़ियों पर महिलाओं और बच्चों की भारी भीड़ थी। अचानक रेलिंग टूटने से दर्जनों लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े।
वीडियो में कई महिलाएं चीखते हुए मदद की गुहार लगाती नजर आती हैं, जबकि बच्चे भीड़ में दबते दिखाई देते हैं। कुछ लोग अपनी जान बचाने के लिए दूसरों के ऊपर से चढ़कर निकलने की कोशिश करते हुए नजर आए।
हादसे के बाद के दृश्यों में लोग जमीन पर बेसुध पड़े दिखे। कुछ श्रद्धालु घायल महिलाओं को हाथ-पैर पकड़कर खींचते हुए बाहर निकालने की कोशिश करते दिखे। मंदिर परिसर में जूते-चप्पल, पूजा सामग्री और कपड़े बिखरे पड़े थे — जो इस त्रासदी की भयावहता बयां करते हैं।
🏥 घायलों का इलाज जारी, मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका
स्थानीय प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को काशीबुग्गा सरकारी अस्पताल और श्रीकाकुलम जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि
“कई लोगों को गंभीर चोटें आई हैं। मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।”
सरकार ने घायलों के इलाज के लिए आपात चिकित्सा टीम भेज दी है और अस्पतालों में रक्तदान शिविर भी आयोजित किया गया है।
🏛️ सरकार ने दिए जांच के आदेश, गृह मंत्री बोलीं — ‘लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी’
आंध्र प्रदेश की गृह मंत्री अनीता ने इस हादसे को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा —
“यह अत्यंत दुखद घटना है। एकादशी के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या अधिक थी। रेलिंग टूटने से भगदड़ मची। हम जांच कर रहे हैं, जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।”
उन्होंने यह भी बताया कि
“मंदिर पहली मंजिल पर स्थित है, जहां तक पहुंचने के लिए लगभग 20 सीढ़ियां हैं। भीड़ और धक्का-मुक्की के कारण रेलिंग का संतुलन बिगड़ गया और यह हादसा हो गया।”
सरकार ने हादसे की मैजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं।
🕉️ ‘उत्तरा तिरुपति’ कहलाने वाला वेंकटेश्वर मंदिर — भक्ति का प्रतीक
काशीबुग्गा वेंकटेश्वर मंदिर, आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले का ऐतिहासिक और प्रसिद्ध मंदिर है। इसे लोग “उत्तरा तिरुपति” (उत्तर का तिरुपति) भी कहते हैं, क्योंकि इसका स्वरूप और पूजा-पद्धति प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर जैसी है।
यह मंदिर 11वीं–12वीं सदी में निर्मित माना जाता है, जब चोल और चालुक्य शासकों का प्रभाव इस क्षेत्र पर था। यहां भगवान वेंकटेश्वर (श्री विष्णु) की पूजा की जाती है, जिन्हें स्थानीय लोग श्रीनिवास, बालाजी या गोविंदा नामों से पूजते हैं।
🌸 आस्था का पर्व बना मातम का कारण
हर साल एकादशी, कार्तिक मास, और वार्षिक ब्रह्मोत्सव जैसे अवसरों पर यहां हजारों श्रद्धालु आते हैं। इस बार एकादशी के दिन भक्ति और आस्था की भावना इतनी प्रबल थी कि सुरक्षा इंतजाम नाकाफी पड़ गए।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि
“हर एकादशी को यहां भारी भीड़ होती है। प्रशासन को पहले से व्यवस्था करनी चाहिए थी। मंदिर की सीढ़ियां संकरी हैं, रेलिंग पुरानी है — फिर भी कोई ध्यान नहीं दिया गया।”
🚧 सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
स्थानीय सामाजिक संगठनों ने प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि
“अगर भीड़ नियंत्रण और एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स की व्यवस्था ठीक होती, तो यह हादसा टल सकता था।”
मंदिर परिसर में सिर्फ दो ही निकास मार्ग हैं, जिनमें से एक पर उस समय भारी भीड़ थी। रेलिंग का कमजोर होना और सीढ़ियों की चौड़ाई कम होना भी हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है।
⚖️ अब कार्रवाई और सुधार की जरूरत
राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही घायल श्रद्धालुओं के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी।
मुख्यमंत्री ने भी शोक जताते हुए कहा है —
“यह घटना अत्यंत दुखद है। मैं पीड़ित परिवारों के साथ हूं। आस्था के स्थानों पर सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।”