आदित्य पंचोली की रेप FIR रद्द करने की याचिका पर 24 फरवरी को सुनवाई !

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मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता आदित्य पंचोली की ओर से वर्ष 2019 में दर्ज रेप FIR को रद्द करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। यह FIR मुंबई के वर्सोवा पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 समेत अन्य गंभीर धाराओं के तहत दर्ज की गई थी।

FIR खारिज करने की मांग दोहराई

ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, पंचोली की ओर से पेश हुए अधिवक्ता प्रशांत पाटिल ने कोर्ट में FIR रद्द करने की मांग दोहराई। मामले में एक महिला बॉलीवुड अभिनेत्री ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आदित्य पंचोली को आरोपी बनाया गया है।

सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि पुलिस द्वारा 11 नोटिस भेजे जाने के बावजूद शिकायतकर्ता जांच में उपस्थित नहीं हुईं। इस पर हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता को नया नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई यानी 24 फरवरी 2026 को कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया।


15 साल बाद दर्ज हुई शिकायत: पंचोली

27 जून 2019 को दर्ज FIR को लेकर शुरुआत से विवाद बना हुआ है। पंचोली की ओर से दलील दी गई है कि कथित घटना के लगभग 15 वर्ष बाद शिकायत दर्ज कराई गई, जो दुर्भावनापूर्ण और तथ्यों से परे है।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के ‘भजनलाल केस’ के फैसले का हवाला देते हुए FIR निरस्त करने की मांग की गई है। इस फैसले में उन परिस्थितियों का उल्लेख है, जिनमें अदालतें FIR रद्द कर सकती हैं।

वकील प्रशांत पाटिल ने अदालत को यह भी बताया कि कथित घटना से पहले एक व्यक्ति ने पंचोली से मुलाकात की थी, जिसकी रिकॉर्डिंग उनके पास मौजूद है। यह रिकॉर्डिंग कोर्ट में पेश की गई है। बचाव पक्ष का दावा है कि इसमें शिकायत दर्ज कराने के पीछे गलत मंशा का संकेत मिलता है।


इन धाराओं में दर्ज है मामला

2019 में दर्ज FIR में आदित्य पंचोली के खिलाफ IPC की निम्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था:

  • धारा 376 – दुष्कर्म
  • धारा 328 – जहर देकर नुकसान पहुंचाना
  • धारा 384 – जबरन वसूली
  • धारा 341 – गलत तरीके से रोकना
  • धारा 342 – गैरकानूनी बंधक बनाना
  • धारा 323 – मारपीट
  • धारा 506 – आपराधिक धमकी

FIR दर्ज होने के बाद पंचोली ने खुद को झूठा फंसाया गया बताया था। फिलहाल मामला बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित है और अगली सुनवाई 24 फरवरी 2026 को होगी।

अदालत के अगले आदेश पर ही यह तय होगा कि FIR को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ेगी।

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