आधी रात की दहला देने वाली घटना: कचरे में मिली मासूम, मानवता बनी उसकी ढाल

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इंदौर, 14 सितंबर 2025।
इंदौर के शिवकंठ नगर से आई खबर ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। आधी रात को ठंडी हवाओं और अंधेरे में लिपटी खामोशी के बीच जब एक मासूम नवजात की किलकारी गूंजी, तो यह केवल रोने की आवाज नहीं थी, बल्कि इंसानियत को पुकारने वाली एक सिसकी थी। गाजर घास और कचरे के बीच कांपती नन्हीं जान को किसी ने निर्दयता से छोड़ दिया था। लेकिन किस्मत ने उसे बचाने के लिए घनश्याम-रुकमा परमार जैसे संवेदनशील दंपती भेज दिए।


खटर-पटर से खुली नींद, फिर सुनाई दी मासूम की सिसकी

रविवार और सोमवार की दरमियानी रात करीब 2 बजे, घनश्याम परमार की पत्नी रुकमा अचानक नींद से जाग उठीं। बाहर खटर-पटर की आवाज सुनकर उन्हें लगा कि शायद कोई सामान चोरी कर रहा है। वह टॉर्च लेकर बाहर आईं, लेकिन कुछ नजर नहीं आया। तभी लौटते वक्त अचानक बच्चे की सिसकियों ने उनके कदम रोक दिए।


गाजर घास में मिला नवजीवन

रुकमा ने जब मोबाइल की टॉर्च जलाई तो दृश्य ने उन्हें हिला दिया। कचरे और गाजर घास में एक नवजात बच्ची ठंड और डर से कांप रही थी। उन्हें भय सताया कि कहीं कोई आवारा कुत्ता या जानवर उस पर हमला न कर दे। बिना देर किए रुकमा ने मासूम को गोद में उठाया और अपने घर ले आईं।


गंदगी साफ की, दूध पिलाया और काला टीका लगाया

घर पहुंचकर रुकमा ने बच्ची को गंदगी से साफ किया, उसे गर्म कपड़े में लपेटा और दूध पिलाकर जीवनदान दिया। इतना ही नहीं, नजर न लगे इसलिए उन्होंने बच्ची के माथे पर काजल का काला टीका भी लगाया। वह दृश्य किसी मां की ममता का सजीव उदाहरण था—एक अनजान बच्ची, लेकिन रुकमा के लिए जैसे वह उनकी ही संतान हो।


बेटियों ने रोते हुए कहा—“यह हमारी छोटी बहन है”

सुबह जब घनश्याम-रुकमा बच्ची को थाने सौंपने के लिए निकले, तो उनके घर का माहौल भावुक हो उठा। उनकी दोनों बेटियां बच्ची को छोड़ने को तैयार नहीं थीं। उन्होंने रोते हुए माता-पिता से कहा—“यह हमारी छोटी बहन है, इसे पुलिस को मत दीजिए।” यह मासूमियत इंसानियत को फिर से याद दिला गई कि खून के रिश्तों से बड़ा रिश्ता अपनापन भी होता है।


पुलिस ने अस्पताल में कराया भर्ती

दंपती ने बच्ची को थाने सौंपा। पुलिस ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची की हालत सामान्य है, लेकिन फिलहाल एहतियातन उसे पीआईसीयू में रखा गया है। अस्पताल स्टाफ भी दंपती की इस मानवता की मिसाल से प्रभावित हुआ और उनकी जमकर सराहना की।


जांच में जुटी पुलिस: अवैध संतान की ओर इशारा

पुलिस ने बताया कि जिस जगह बच्ची मिली, वहां कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं है। जांच के लिए आसपास के मैटरनिटी अस्पतालों से हाल ही में हुई डिलीवरी की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का मानना है कि मामला अवैध संतान से जुड़ा हो सकता है, जिसके चलते बच्ची को फेंक दिया गया। रहवासियों में भी चर्चा है कि आखिर कौन सी निर्दयी मां ने मासूम को यूं मौत के मुंह में छोड़ दिया।


दंपती की संवेदनशीलता पर लोग हुए नतमस्तक

घनश्याम परमार, जो कंपनी में चौकीदारी करते हैं, और उनकी पत्नी रुकमा, जो घर के बाहर छोटी सी चाय-बिस्किट की दुकान चलाती हैं—दोनों ने यह साबित कर दिया कि बड़ा दिल दौलत से नहीं, इंसानियत से होता है। उनका कहना है—
“बस बच्ची सलामत रहे और उसे एक अच्छा परिवार मिले, यही हमारी दुआ है।”


समाज के लिए संदेश

यह घटना केवल एक बचाव की कहानी नहीं है, बल्कि समाज के लिए आईना भी है। एक तरफ वह निर्दयी इंसान है, जिसने नन्हीं जान को फेंक दिया, और दूसरी तरफ रुकमा-घनश्याम जैसे लोग हैं, जिन्होंने अपने सीमित साधनों के बावजूद ममता और मानवता की मिसाल पेश की।

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