मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद् संभाग सागर के तत्वावधान में आज जिला पंचायत सभागार में महर्षि अरविन्द जी की 152वीं जयंती के उपलक्ष्य में भव्य व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाजसेवी, शिक्षा जगत, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन, महर्षि अरविन्द जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने और प्रेरणा गीत गाकर किया गया।

मुख्य अतिथि और वक्ता
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. शशिकांत त्रिपाठी तथा मुख्य वक्ता डॉ. अनिल तिवारी, दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष, डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जन अभियान परिषद भोपाल के टास्क मैनेजर एस.एस. जाफरी ने की।

महर्षि अरविन्द का राष्ट्रपुनर्निर्माण में योगदान
मुख्य वक्ता डॉ. अनिल तिवारी ने अपने उद्बोधन में महर्षि अरविन्द जी के जन्म से लेकर जीवन यात्रा तक के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महर्षि अरविन्द का जीवन एक अद्वितीय संगम है—क्रांतिकारी राष्ट्रवाद और गहन आध्यात्मिकता का।
उन्होंने दुनिया की 12 भाषाओं का ज्ञान अर्जित किया और भारतीय जनमानस में राष्ट्रवाद का बीज बोया। उनके लिए राष्ट्र सिर्फ राजनीतिक सत्ता का विषय नहीं था, बल्कि यह मानवता और संस्कृति के उत्थान का माध्यम था। डॉ. तिवारी ने कहा कि महर्षि अरविन्द का जीवन आज भी युवाओं के लिए प्रेरणादायक है क्योंकि उन्होंने अपनी हर सांस को राष्ट्र के लिए समर्पित किया।

डॉ. शशिकांत त्रिपाठी का वक्तव्य
मुख्य अतिथि डॉ. शशिकांत त्रिपाठी ने कहा कि महर्षि अरविन्द का जीवन हमें प्रेम, करुणा और निस्वार्थ भाव से समाज और राष्ट्र की सेवा करने की शिक्षा देता है। पाश्चात्य वातावरण में रहने के बावजूद उन्होंने भारतीय संस्कृति और राष्ट्रबोध की मशाल को सदैव प्रज्ज्वलित रखा। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि राष्ट्र के पुनरुत्थान के लिए अहंकार रहित कर्म और मानवता के प्रति समर्पण ही सबसे बड़ी शक्ति है।

परिषद के टास्क मैनेजर का विचार
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एस.एस. जाफरी ने कहा कि महर्षि अरविन्द ने अंग्रेजी शासनकाल में भी भारतीय संस्कृति के पुनरुद्धार और समाज के कल्याण के लिए निरंतर काम किया। उनका जीवन हमें सिखाता है कि संघर्ष की घड़ी में भी हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना चाहिए। जाफरी ने आह्वान किया कि आज हम सभी को महर्षि जी के पदचिह्नों पर चलते हुए समाजसेवा और राष्ट्रनिर्माण की दिशा में सामूहिक प्रयास करना चाहिए।
स्वागत और आभार
कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन संभाग समन्वयक दिनेश उमरैया ने दिया। उन्होंने परिषद की विभिन्न गतिविधियों और समाज में इसके सकारात्मक प्रभावों की जानकारी भी साझा की।
कार्यक्रम का संचालन विकासखंड समन्वयक जयसिंह ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन जिला समन्वयक के.के. मिश्रा द्वारा किया गया।
प्रतिभागियों की सहभागिता
इस अवसर पर विकासखंड समन्वयक नीरज शर्मा, जीवन तिवारी, धर्म नाडीवाल, हरिराम अहिरवार, सुमन सिंह, अंजली पाठक, ज्योति मिश्रा सहित बड़ी संख्या में परिषद के कार्यकर्ता और समाजसेवी उपस्थित रहे।
स्वयंसेवी संस्थाओं से डॉ. संदीप श्रीवास्तव, मनोज पटैल, चंद्रप्रकाश शुक्ला तथा नवांकुर संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी अपनी सहभागिता दर्ज की। इसके अलावा, बड़ी संख्या में सीएमसीएलडीपी छात्र, मेंटर्स और ग्राम प्रस्फुटन समिति के सदस्य कार्यक्रम में शामिल हुए।
कार्यक्रम का महत्व
महर्षि अरविन्द की जयंती पर आयोजित यह व्याख्यानमाला सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं के लिए चिंतन का अवसर थी। इसमें यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि यदि भारत को विश्वगुरु बनना है तो हमें महर्षि अरविन्द के आध्यात्मिक और राष्ट्रवादी विचारों को आत्मसात करना होगा।
उनका जीवन इस बात का द्योतक है कि भौतिक प्रगति तभी सार्थक होगी जब उसमें आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों का समावेश हो।