आम बजट पर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने !

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए आम बजट को लेकर दमोह जिले में भाजपा और कांग्रेस की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जहां भाजपा नेताओं ने इस बजट को 21वीं सदी का बजट बताते हुए विकसित भारत की दिशा में बड़ा कदम बताया है, वहीं कांग्रेस ने महंगाई और रोजगार जैसे अहम मुद्दों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए इसे आम आदमी के लिए निराशाजनक करार दिया है।

भाजपा ने बताया 2047 तक के भारत का रोडमैप

दमोह के तहसील ग्राउंड में बजट पेश होने के दौरान मध्य प्रदेश शासन के पूर्व वित्त मंत्री एवं दमोह विधायक जयंत मलैया, भाजपा जिला अध्यक्ष श्याम शिवहरे सहित अन्य भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बड़ी स्क्रीन पर आम बजट को देखा और सुना।

बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए दमोह विधायक जयंत मलैया ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत यह बजट 21वीं सदी के भारत की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जिसमें 2047 तक विकसित भारत का स्पष्ट विजन दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि इस बजट में कनेक्टिविटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, एमएसएमई, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

मलैया ने आयुर्वेद को बढ़ावा देने की योजनाओं और निजी भागीदारी के तहत पांच मेडिकल हब स्थापित करने के प्रस्ताव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन मेडिकल हब्स में उत्पादन, शिक्षा और उपचार की सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी, जिससे स्वास्थ्य क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी।

भाजपा विधायक ने दावा किया कि यह बजट आम आदमी के हित में है और इसमें मध्यम वर्ग, किसानों, युवाओं और उद्यमियों को कई प्रकार की राहत दी गई है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह बजट भारत को 2047 तक विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

कांग्रेस ने उठाए महंगाई और रोजगार के सवाल

वहीं कांग्रेस की ओर से पूर्व जिला अध्यक्ष मनु मिश्रा ने बजट को लेकर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि यह बजट आम आदमी का नहीं है। बजट में महंगाई से राहत देने के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शासकीय नौकरियों और बेरोजगार युवाओं के लिए बजट में कोई ठोस योजना नहीं है।

मनु मिश्रा ने कहा कि शासकीय कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित आठवें वेतनमान को लेकर भी बजट में कोई स्पष्टता नहीं दी गई है। इसके अलावा सोने और चांदी की लगातार बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण को लेकर भी बजट पूरी तरह मौन है।

उन्होंने कहा कि जब आम आदमी महंगाई और रोजगार की मार झेल रहा है, तब ऐसे बजट को आम आदमी के हितों का बजट नहीं कहा जा सकता।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

आम बजट को लेकर दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाओं से साफ है कि बजट पर सियासी घमासान तेज हो गया है। जहां भाजपा इसे भविष्य की नींव रखने वाला बजट बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे जनसमस्याओं से कटे होने का आरोप लगा रही है

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