आगामी आम बजट को लेकर मध्यम वर्ग और टैक्स पेयर्स की उम्मीदें बढ़ गई हैं। इस बार सरकार इनकम टैक्स सिस्टम में ऐसे बदलाव कर सकती है, जिससे शादीशुदा जोड़ों, नौकरीपेशा वर्ग और छोटे कारोबारियों को सीधी राहत मिल सके। बजट से पहले इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने वित्त मंत्रालय को कई अहम सुझाव दिए हैं, जिनमें पति-पत्नी को संयुक्त रूप से इनकम टैक्स रिटर्न (Joint ITR) फाइल करने का विकल्प देना भी शामिल है।
पति-पत्नी के लिए जॉइंट ITR की सुविधा
ICAI ने सुझाव दिया है कि शादीशुदा जोड़ों को अलग-अलग टैक्स रिटर्न भरने के बजाय संयुक्त रिटर्न फाइल करने का विकल्प मिलना चाहिए। इस व्यवस्था के तहत पति-पत्नी की आय को जोड़कर टैक्स की गणना की जाएगी और टैक्स स्लैब व छूट भी संयुक्त रूप से लागू होंगी।

हालांकि, यदि पति-पत्नी दोनों कामकाजी (वर्किंग) हैं, तो उनके पास अलग-अलग रिटर्न फाइल करने का विकल्प भी बना रहेगा। टैक्स पेयर्स अपनी सुविधा और लाभ के आधार पर जॉइंट या अलग रिटर्न चुन सकेंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह व्यवस्था खासतौर पर उन परिवारों को फायदा पहुंचाएगी, जहां आय का मुख्य स्रोत केवल एक सदस्य होता है और मौजूदा टैक्स स्लैब के चलते उन्हें सीमित टैक्स छूट ही मिल पाती है।
अमेरिका जैसे देशों में पहले से लागू है व्यवस्था
संयुक्त टैक्स सिस्टम अमेरिका सहित कई विकसित देशों में पहले से लागू है। वहां पति-पत्नी की संयुक्त आय पर टैक्स कैलकुलेशन से टैक्स बोझ कम होता है और परिवारों को अधिक छूट मिलती है। भारत में इस मॉडल को अपनाने से टैक्स सिस्टम ज्यादा परिवार-अनुकूल बन सकता है।
इनकम टैक्स कानून में अपराधीकरण कम करने के संकेत
बजट में इनकम टैक्स कानून के तहत कुछ मामलों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का प्रस्ताव भी आ सकता है। सुझाव है कि टैक्स पेयर्स चार्टर की भावना के अनुरूप टैक्स दाताओं को ईमानदार माना जाए और आपराधिक कार्रवाई केवल उन्हीं मामलों में हो, जहां जानबूझकर आय छिपाने, गलत रिपोर्टिंग या नाजायज लाभ लेने के पुख्ता सबूत हों।
जन विश्वास एक्ट के तहत पहले ही कई आर्थिक कानूनों में आपराधिक धाराएं हटाई जा चुकी हैं। अब इसी दिशा में इनकम टैक्स कानून को और सरल बनाने की उम्मीद है।

ओल्ड टैक्स रिजीम को लेकर आ सकता है फेज-आउट का संकेत
ओल्ड टैक्स रिजीम को तुरंत खत्म किए जाने की संभावना भले ही कम हो, लेकिन सरकार इसके लॉन्ग-टर्म फेज-आउट को लेकर संकेत दे सकती है। बजट में सनसेट क्लॉज जैसी व्यवस्था का इशारा किया जा सकता है, ताकि धीरे-धीरे न्यू टैक्स रिजीम को ही मुख्य विकल्प बनाया जा सके।
इसके साथ ही न्यू टैक्स रिजीम को और आकर्षक बनाने के लिए अतिरिक्त बदलाव या राहत की भी संभावना है।
एक गलती पर दोहरी पेनल्टी से मिल सकती है राहत
मौजूदा सिस्टम में गलत रिपोर्टिंग या गलत एंट्री पर अलग-अलग धाराओं के तहत 200 प्रतिशत तक पेनल्टी लग जाती है। ICAI ने सुझाव दिया है कि इस व्यवस्था को खत्म किया जाए और गलती की गंभीरता के अनुसार ही जुर्माना लगाया जाए।
भविष्य में ऐसे मामलों में राहत मिल सकती है, जहां टैक्स तो कटा हो लेकिन समय पर जमा नहीं हो पाया हो या दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराए जा सके हों।
जीएसटी की तर्ज पर इनकम टैक्स में ई-लेजर सिस्टम संभव
इनकम टैक्स सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए ई-लेजर सिस्टम शुरू करने का प्रस्ताव भी बजट में आ सकता है। इस ई-लेजर में टैक्स पेयर्स के एडवांस टैक्स, टीडीएस और टीसीएस का पूरा रिकॉर्ड रहेगा, जिसे मौजूदा या अगले साल के टैक्स में समायोजित किया जा सकेगा।
इससे टैक्स रिफंड की प्रक्रिया आसान होगी और इनकम टैक्स विभाग तथा टैक्स पेयर्स के बीच सीधे संपर्क (इंटरफेस) में भी कमी आने की उम्मीद है।

LLP के मर्जर-डिमर्जर पर टैक्स राहत की तैयारी
कारोबार को आसान बनाने के लिए सरकार लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP) के मर्जर और डिमर्जर को टैक्स-न्यूट्रल बनाने पर भी विचार कर सकती है। कंपनियों की तरह यदि LLP के पुनर्गठन पर टैक्स नहीं लगाया जाता, तो इससे स्टार्टअप्स और छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत मिल सकती है।
शिक्षा क्षेत्र पर भी फोकस: छात्रा हॉस्टल और पीएम पोषण में नाश्ता
बजट में शिक्षा क्षेत्र को लेकर भी अहम घोषणाएं संभव हैं। हर जिले में छात्राओं के लिए हॉस्टल बनाने का प्रस्ताव केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में आ सकता है। शिक्षा मंत्रालय ने इस संबंध में वित्त मंत्रालय को सुझाव भेजा है।
इसके अलावा पीएम पोषण योजना में दोपहर के भोजन के साथ नाश्ता (ब्रेकफास्ट) जोड़ने पर भी विचार हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुबह खाली पेट स्कूल आने वाले बच्चों की सीखने की क्षमता प्रभावित होती है और नाश्ता जोड़ने से पोषण व शिक्षा दोनों में सुधार होगा।
कुल मिलाकर, यह बजट मध्यम वर्ग, टैक्स पेयर्स, छोटे कारोबारियों और छात्रों के लिए राहत भरा साबित हो सकता है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इन सुझावों को बजट में किस हद तक शामिल करती है।