भोपाल, 07 सितंबर 2025: आयकर विभाग की चार दिन की गहन जांच में भोपाल और इंदौर में साइंस हाउस मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड, डिसेंट मेडिकल्स, और अन्य सहयोगी समूहों के बीच हवाला कनेक्शन का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। मंगलवार सुबह शुरू हुई यह कार्रवाई शनिवार सुबह तक चली, जिसमें 250 करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी और बोगस बिलिंग के दस्तावेज जब्त किए गए। इसके साथ ही 4 करोड़ रुपये की नकदी और ज्वैलरी भी बरामद की गई, जिसमें साइंस हाउस के डायरेक्टर शैलेंद्र तिवारी के ठिकाने से 1 करोड़ रुपये की नकदी और 900 ग्राम सोना शामिल है।

हवाला कनेक्शन और बोगस बिलिंग का खेल
आयकर विभाग की जांच में सामने आया कि साइंस हाउस और इसके सहयोगी समूहों ने बोगस बिलिंग के जरिए बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की। जांच में बोगस बिलिंग का एक बड़ा जखीरा मिला, जिसमें सस्ते दामों पर सामान मंगाकर उसे महंगे दामों पर बेचने का रैकेट सामने आया। यह सामान एक देश या राज्य से दूसरे स्थान पर रूट सिस्टम के जरिए भेजा जाता था, और फिर मध्य प्रदेश में सप्लाई किया जाता था। इस प्रक्रिया में हवाला के माध्यम से अवैध रूप से कमाए गए पैसे का निवेश किया गया। आयकर विभाग अब हवाला कनेक्शन की अलग से जांच करने की तैयारी में है ताकि इस नेटवर्क का पूरी तरह पर्दाफाश हो सके।
जब्त सामग्री और विदेशी कनेक्शन
जांच के दौरान आयकर विभाग ने साइंस हाउस के डायरेक्टर शैलेंद्र तिवारी के ठिकाने से 1 करोड़ रुपये की नकदी और 900 ग्राम सोना जब्त किया। इसके अलावा, कुल 4 करोड़ रुपये की नकदी और ज्वैलरी बरामद की गई। जांच में यह भी पता चला कि मेडिकल सर्जिकल उपकरणों के कारोबारी राजेश गुप्ता ने युगांडा में एक संस्था खोली है और वहां कारोबार कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, साइंस हाउस के संचालक जितेंद्र तिवारी का चाइना और अन्य देशों से भी कनेक्शन सामने आया है। जितेंद्र तिवारी हेल्थ इक्विपमेंट को सस्ते दामों पर मंगवाकर रूट सिस्टम के जरिए महंगे दामों पर बेचने का कारोबार करता था।

जांच का दायरा और अगले कदम
आयकर विभाग की कार्रवाई भोपाल के एमपी नगर स्थित साइंस हाउस मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड, इंदौर की डिसेंट मेडिकल्स (एमआर-5 कॉलोनी), और राजेश गुप्ता (लालघाटी) सहित 30 से अधिक ठिकानों पर की गई। जांच में शामिल प्रमुख व्यक्तियों में जितेंद्र तिवारी, शैलेंद्र तिवारी, और राजेश गुप्ता हैं। विभाग ने बोगस बिलिंग और टैक्स चोरी से संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच शुरू कर दी है। जल्द ही संबंधित व्यक्तियों को नोटिस जारी कर उनके बयान दर्ज किए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के टेंडरों से भी कनेक्शन की आशंका है, और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता की जांच की जा रही है।
चाइना और युगांडा कनेक्शन
जांच में यह भी सामने आया कि जितेंद्र तिवारी ने चाइना और अन्य देशों से सस्ते मेडिकल उपकरण मंगवाकर उन्हें रूट सिस्टम के जरिए भारत में महंगे दामों पर बेचा। यह प्रक्रिया न केवल टैक्स चोरी का हिस्सा थी, बल्कि हवाला नेटवर्क के माध्यम से अवैध धन के लेन-देन को भी बढ़ावा देती थी। राजेश गुप्ता के युगांडा में कारोबार और रियल एस्टेट में निवेश की जानकारी भी जांच में सामने आई है। आयकर विभाग अब इन विदेशी कनेक्शनों की गहराई से जांच कर रहा है, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की भी भूमिका संभावित है।
कार्रवाई का प्रभाव
चार दिन तक चली इस कार्रवाई में आयकर विभाग की टीमें सुबह सात बजे तक दस्तावेजों की जांच में जुटी रहीं। जब्त किए गए दस्तावेजों और सामग्री के आधार पर विभाग एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसे केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को सौंपा जाएगा। इस मामले में बड़े खुलासे होने की संभावना है, और हवाला नेटवर्क के पर्दाफाश से मध्य प्रदेश में मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति से जुड़े रैकेट पर भी असर पड़ सकता है।
निष्कर्ष
आयकर विभाग की इस कार्रवाई ने साइंस हाउस और डिसेंट मेडिकल्स जैसे समूहों के काले कारोबार को उजागर किया है। बोगस बिलिंग, हवाला कनेक्शन, और विदेशी लिंक के जरिए टैक्स चोरी का यह मामला न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। विभाग की आगे की जांच से इस रैकेट के और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।