इंदौर/उज्जैन।
मध्यप्रदेश सरकार ने इंदौर और उज्जैन को मेट्रो से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। दोनों शहरों के बीच 45 किलोमीटर लंबे मेट्रो कॉरिडोर की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार हो चुकी है। जल्द ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इसकी समीक्षा करेंगे और उसके बाद इसे कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। हालांकि, प्रोजेक्ट में फंडिंग और उज्जैन में डिपो के लिए सरकारी जमीन की उपलब्धता जैसी अड़चनें बनी हुई हैं, जिसके कारण अभी तक काम ने गति नहीं पकड़ी है।
दिल्ली मेट्रो की फिजिबिलिटी रिपोर्ट के आधार पर डीपीआर
साल 2022-23 में दिल्ली मेट्रो ने इंदौर और उज्जैन के बीच फिजिबिलिटी स्टडी की थी। इस रिपोर्ट में मेट्रो संचालन को व्यवहारिक और लाभदायक बताया गया। इसके बाद डीपीआर तैयार हुई, जिसमें परियोजना की लागत, ट्रैक की लंबाई और स्टेशनों की संख्या तय की गई। अनुमान है कि इस प्रोजेक्ट पर करीब 10 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे।

45 किमी ट्रैक, 11 स्टेशन और अंडरग्राउंड हिस्सा
मेट्रो का संचालन इंदौर के लवकुश नगर से उज्जैन रेलवे स्टेशन तक होगा। कुल 45 किमी लंबे इस मार्ग पर 11 स्टेशन प्रस्तावित हैं – भौंरासला, बारोली, धरमपुरी, तराना, सांवेर, पंथ पिपलई, निनोरा, त्रिवेणी घाट, नानाखेड़ा, उज्जैन आईएसबीटी और उज्जैन रेलवे स्टेशन। इनमें से उज्जैन शहर का 4.5 किमी हिस्सा अंडरग्राउंड रहेगा, जबकि बाकी ट्रैक एलिवेटेड होगा।
आधे समय में सफर
फिलहाल इंदौर से उज्जैन पहुंचने में बस से लगभग दो घंटे, कार से डेढ़ घंटा और टू-व्हीलर से करीब दो घंटे लगते हैं। मेट्रो शुरू होने के बाद यह दूरी यात्री मात्र 45 से 50 मिनट में तय कर सकेंगे। इससे खासकर महाकाल मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं और दोनों शहरों में रोज अप-डाउन करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
ट्रैफिक दबाव घटेगा
वर्तमान में इंदौर और उज्जैन के बीच लगभग 75% लोग सड़क मार्ग से यात्रा करते हैं। रोज हजारों वाहन हाईवे पर चलते हैं, जिससे ट्रैफिक दबाव और दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। मेट्रो शुरू होने के बाद सड़क मार्ग का ट्रैफिक घटकर एक-तिहाई रह जाने का अनुमान है।

डिपो और जमीन की चुनौती
प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी चुनौती उज्जैन में डिपो के लिए 49.7 एकड़ सरकारी जमीन न मिल पाना है। इसके चलते प्रशासन ने सांवेर के पास रेवती क्षेत्र में जमीन मांगी है। चूंकि इंदौर में पहले से मेट्रो चल रही है, इसलिए वहां दूसरे डिपो की जरूरत नहीं होगी।
एलिवेटेड और अंडरग्राउंड कॉरिडोर
डीपीआर के मुताबिक इंदौर–उज्जैन रोड पर मेट्रो को मुख्य रूप से एलिवेटेड रखा जाएगा, जिसके लिए सड़क के बीच बने डिवाइडर पर पिलर खड़े होंगे। वहीं, उज्जैन शहर का हिस्सा – नानाखेड़ा से रेलवे स्टेशन तक – अंडरग्राउंड होगा।

हाइब्रिड मोड और अधिकतम रफ्तार
मेट्रो को हाइब्रिड मोड में चलाने का प्रस्ताव है, जिसकी अधिकतम रफ्तार 135 किमी प्रति घंटा होगी। यह मॉडल दिल्ली एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन जैसा होगा। लंबी दूरी की यात्रा को देखते हुए कोचों में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी।
लागत कम करने की रणनीति
परियोजना में स्टेशनों की संख्या कम रखी गई है, जिससे लागत भी घटेगी। उदाहरण के लिए भोपाल मेट्रो के प्रायोरिटी कॉरिडोर में 8 स्टेशनों की लागत 50 करोड़ प्रति स्टेशन से अधिक आ रही है। इंदौर-उज्जैन मेट्रो में कम स्टेशन होने से लागत नियंत्रण में रहेगी।
सिंहस्थ से पहले संभव नहीं
मेट्रो परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इसे पूरा होने में कम से कम तीन साल का समय लगेगा। इस कारण, सिंहस्थ से पहले इसका संचालन शुरू होना संभव नहीं होगा