इंदौर ,किसानों का महासम्मेलन 16 जनवरी को शिप्रा में, भूमि अधिग्रहण और प्रोजेक्ट रद्द करने की मांगें उठेंगी !

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इंदौर: मध्य प्रदेश में किसानों की नाराजगी को ध्यान में रखते हुए किसानों का महासम्मेलन 16 जनवरी को दोपहर 2 बजे शिप्रा में आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी भी शामिल होंगे। किसानों के प्रतिनिधि हंसराज मंडलोई ने बताया कि महासम्मेलन में केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों से प्रभावित किसानों की समस्याओं को उठाया जाएगा और कई प्रस्ताव पास किए जाएंगे।


महासम्मेलन में उठाई जाने वाली प्रमुख मांगें

  1. भूमि अधिग्रहण 2014 लागू करवाना:
    किसान सम्मेलन में भूमि अधिग्रहण कानून 2014 की पूरी तरह से लागू करने की मांग की जाएगी, ताकि किसानों को उचित मुआवजा और सुरक्षा मिल सके।
  2. आउटर रिंग रोड प्रोजेक्ट रद्द करने का प्रस्ताव:
    • इंदौर की आउटर रिंग रोड परियोजना तीन जिलों की सीमा से होकर गुजर रही है।
    • इस योजना में किसानों की बहुमूल्य जमीन जा रही है और वर्तमान में उन्हें नाममात्र का मुआवजा दिया जा रहा है।
    • किसान महासम्मेलन में यह प्रस्ताव पास किया जाएगा कि अगर सड़क बनानी है, तो मुआवजा बाजार मूल्य का छह गुना दिया जाए।
  3. ग्रीन फील्ड कॉरिडोर रद्द करने का प्रस्ताव:
    • इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर, जो 48 किलोमीटर लंबा एक्सेस कंट्रोल फोर लेन हाईवे है और सिंहस्थ 2028 के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
    • प्रोजेक्ट में 60 मीटर चौड़ी सड़क के लिए भूमि अधिग्रहण की जा रही है।
    • किसानों का विरोध है, और महासम्मेलन में इस परियोजना को रद्द करने का प्रस्ताव पास किया जाएगा।
  4. कृषि समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग:
    • सोयाबीन का समर्थन मूल्य: 6,000 रुपये प्रति क्विंटल।
    • गेहूं का समर्थन मूल्य: 4,000 रुपये प्रति क्विंटल।
  5. रेलवे लाइन परियोजनाओं में मुआवजा बढ़ाने की मांग:
    • इंदौर-बुधनी और इंदौर-मनमाड़ रेलवे लाइन परियोजनाओं में किसानों को बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा देने का प्रस्ताव पास किया जाएगा।

ग्रीन फील्ड कॉरिडोर: परियोजना का विवरण

  • इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर 48 किलोमीटर लंबा होगा।
  • परियोजना चार लेन फोर लेन हाईवे और दोनों ओर सर्विस रोड के साथ बनाई जाएगी।
  • यात्रा समय घटकर लगभग 30 मिनट होगा और कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
  • निर्माण का ठेका लुधियाना की कंपनी को मिला है और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया जारी है।

किसानों का महासम्मेलन सरकारी नीतियों और भूमि अधिग्रहण के विरोध में एक महत्वपूर्ण मंच होगा, जिसमें किसानों की मांगों और अधिकारों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

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