इंदौर के बाद भोपाल पर भी मंडराया दूषित पानी का खतरा, कई इलाकों में बदबूदार और सीवेज मिला पानी सप्लाई होने का आरोप !

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भोपाल।
इंदौर में दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मौत के बाद अब भोपाल में भी इसी तरह के खतरे के संकेत मिलने लगे हैं। राजधानी के कई इलाकों से लगातार गंदे, बदबूदार और सीवेज मिले पानी की शिकायतें सामने आ रही हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने निगम आयुक्त को पत्र लिखकर श्यामला हिल्स, गंगानगर सहित कई क्षेत्रों में दूषित पानी की आपूर्ति को लेकर गहरी चिंता जताई है।

नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने पत्र में उल्लेख किया कि वह स्वयं श्यामला हिल्स की निवासी हैं और पिछले कई दिनों से गंगानगर और श्यामला हिल्स क्षेत्र में नलों के माध्यम से जो पानी सप्लाई किया जा रहा है, वह बेहद गंदा, बदबूदार और सीवेज के पानी से मिला हुआ प्रतीत हो रहा है। यह पानी किसी भी स्थिति में मानव उपभोग योग्य नहीं है और इससे क्षेत्रवासियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

गंभीर बीमारियों का खतरा

जकी ने चेतावनी दी है कि दूषित पानी के कारण उल्टी-दस्त, पेट संबंधी रोग, त्वचा रोग और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने की प्रबल आशंका बनी हुई है। उन्होंने बताया कि इस समस्या को लेकर पहले भी कई बार मौखिक शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है। इसी लापरवाही के कारण लोगों की जान पर खतरा बना हुआ है।

तुरंत जांच और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने नगर निगम से मांग की है कि गंगानगर और श्यामला हिल्स क्षेत्रों में तत्काल स्थल निरीक्षण कराया जाए और सप्लाई हो रहे पानी के सैंपल लेकर प्रयोगशाला में जांच कराई जाए। साथ ही जब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो जाता, तब तक प्रभावित क्षेत्रों में पीने के पानी की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

पानी के सैंपल लेने की प्रक्रिया पर सवाल

दूषित पानी के मुद्दे के बीच नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हाल ही में सामने आया कि शहर में पानी के सैंपल लेने का काम निगम के ड्राइवरों द्वारा किया जा रहा है। बुधवार को टीटी नगर और रोशनपुरा क्षेत्रों से ड्राइवर जांगड़े द्वारा सैंपल लिए गए और कई जगह खुद ही टेस्ट ट्यूब में क्लोरीन की जांच की गई। इस मामले पर महापौर मालती राय ने कहा है कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी।

सीवेज में दबी पानी की लाइनें

इधर, जेपी नगर क्षेत्र में पानी की पाइपलाइनें सीवेज लाइन में होने का मामला सामने आया है। इसे लेकर गैस पीड़ित संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है और नगर निगम से तत्काल जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पानी और सीवेज लाइनें एक ही जगह पर होंगी, तो दूषित पानी की सप्लाई का खतरा लगातार बना रहेगा।

महापौर ने दिए निरीक्षण के आदेश

इंदौर की घटना के बाद भोपाल नगर निगम भी सतर्क नजर आ रहा है। महापौर मालती राय ने सब इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और सुपरवाइजरों को शहर के विभिन्न इलाकों में निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अधीक्षण यंत्री और कार्यपालन यंत्री को पूरे मामले पर नजर रखने और निरीक्षण के बाद रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। निगम के अनुसार अब तक 500 से अधिक पानी के सैंपल लिए जा चुके हैं।

कई इलाकों से मटमैले पानी की शिकायत

नगर निगम को मिली जानकारी के अनुसार, एचएफए योजनाओं, जेएनएनयूआरएम क्षेत्रों, अवैध कॉलोनियों, झुग्गियों, हाउसिंग बोर्ड और बीडीए कॉलोनियों में कई जगह पानी और सीवेज लाइनें पास-पास हैं। करोंद, ईदगाह हिल्स और 12 नंबर क्षेत्र की मल्टियों में कई वाल्व सीवेज में डूबे रहते हैं। इसके चलते नगर निगम कॉल सेंटर और सीएम हेल्पलाइन पर हर महीने गंदे पानी की औसतन 10 शिकायतें दर्ज हो रही हैं।

ईदगाह हिल्स के वाजपेयी नगर, करोंद की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, रोशनपुरा और नीलबड़ की स्वास्तिक नगर कॉलोनी के रहवासियों ने भी बदबूदार और मटमैले पानी की सप्लाई की शिकायत की है। लोगों का कहना है कि ऐसा पानी इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है।

कांग्रेस का आरोप: एक ही चैंबर से पानी और सीवेज

इंदौर मामले के बाद भोपाल में कांग्रेस नेता भी सक्रिय हो गए हैं। कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला स्थानीय पार्षदों और नागरिकों के साथ गली-मोहल्लों में जाकर जल स्रोतों का निरीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगह पानी और सीवेज की सप्लाई एक ही चैंबर से हो रही है। शुक्ला ने कहा कि इस समस्या की शिकायत लंबे समय से नगर निगम से की जा रही है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

स्थानीय नागरिकों ने बताया कि नरेला और करोंद क्षेत्रों में पहले सीवेज के लिए चैंबर बनाए गए थे और बाद में उन्हीं चैंबरों से पानी की सप्लाई लाइन भी निकाल दी गई। उस समय भी लोगों ने विरोध किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो नगर निगम आयुक्त कार्यालय का घेराव किया जाएगा।

फिलहाल, इंदौर की घटना के बाद भोपाल में दूषित पानी का खतरा प्रशासन और आम नागरिकों दोनों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। अब देखना होगा कि नगर निगम समय रहते ठोस कदम उठाता है या नहीं।

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