इंदौर। शहर की मेट्रो परियोजना का अब सबसे महत्वपूर्ण चरण शुरू होने जा रहा है। एलिवेटेड ट्रैक के बाद अब अंडरग्राउंड (भूमिगत) कॉरिडोर के निर्माण के लिए रफ्तार बढ़ाई जा रही है। एयरपोर्ट और नगर निगम के पास शाफ्ट तैयार कर टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) को जमीन के भीतर उतारने की तैयारी जोरों पर है। सम्भावना है कि अप्रैल–मई में सुरंग खुदाई का औपचारिक काम शुरू हो जाएगा।

टीबीएम और भूमिगत योजना
एमपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के अनुसार, दो टीबीएम मशीनें इंदौर मेट्रो के अंडरग्राउंड हिस्से में इस्तेमाल होंगी। एक मशीन एयरपोर्ट से बड़ा गणपति की ओर सुरंग गहरे स्तर पर खोदेगी, जबकि दूसरी नगर निगम क्षेत्र से बड़ा गणपति तक सुरंग बनाएगी। इन मशीनों से करीब 40 मीटर नीचे भूमिगत ट्रैक तैयार किया जाएगा।
10 किलोमीटर लंबा भूमिगत ट्रैक
परियोजना के तहत एयरपोर्ट से बंगाली चौराहे तक का हिस्सा एलिवेटेड है और इसके आगे का हिस्सा भूमिगत बनाया जाएगा। अधिकारी बताते हैं कि आने वाले समय में लगभग 10 किलोमीटर का अंडरग्राउंड ट्रैक पूरा होगा, जिससे शहर के यातायात और कनेक्टिविटी में सुधार आएगा।

बड़े कॉन्ट्रैक्ट और ठेका
इस भूमिगत भाग के निर्माण के लिए एमपीएमआरसीएल ने टाटा ग्रुप की सहायक कंपनी और हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (HCC) को ₹2,191 करोड़ से अधिक के ठेके दिए हैं, जिसमें भूमिगत सुरंग और स्टेशनों का निर्माण शामिल है। इसमें करीब 8.65 किलोमीटर का कॉरिडोर और कई भूमिगत स्टेशनों का निर्माण होगा।
आगे का मार्ग
भूमिगत मेट्रो ट्रैक बनने के बाद शहर में सार्वजनिक परिवहन की क्षमता बढ़ेगी और भीड़भाड़ तथा ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं को कम करने में मदद मिलेगी। सुरंग निर्माण शुरू होने से पहले भूमि सर्वे और शाफ्ट तैयारियों का कार्य पूरा किया जा रहा है।
भूमिगत मॉड्यूल शुरू होने से इंदौर की मेट्रो परियोजना को नई गति मिलने की उम्मीद है।