इंदौर में नगर निगम चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से शहर कांग्रेस एक नई रणनीति पर काम कर रही है। इसी क्रम में प्रस्तावित शहर कांग्रेस कार्यकारिणी को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन नेताओं को आगामी नगर निगम चुनाव में पार्षद का टिकट दिया जाएगा या जो टिकट के प्रमुख दावेदार हैं, उन्हें नई कार्यकारिणी में शामिल नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं, वर्तमान पार्षदों को भी संगठन में कोई पद नहीं मिलेगा।
संगठन और चुनावी तैयारी अलग-अलग
पार्टी सूत्रों के अनुसार यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि चुनाव लड़ने वाले नेता अपने-अपने वार्ड में संगठन को मजबूत करने और जनसंपर्क पर पूरा ध्यान दे सकें। कांग्रेस का मानना है कि यदि ऐसे नेताओं को संगठनात्मक पद दे दिए गए तो वे प्रशासनिक बैठकों और पद की जिम्मेदारियों में उलझ जाएंगे, जिससे जमीनी तैयारी प्रभावित होगी।

इस रणनीति के तहत चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाले नेताओं को उनके वार्डों में बूथ प्रबंधन, मतदाता संपर्क, कार्यकर्ता समन्वय और स्थानीय मुद्दों पर काम करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
50 सदस्यीय कार्यकारिणी बनाना बना चुनौती
संगठन सृजन अभियान के तहत शहर कांग्रेस को 50 सदस्यीय कार्यकारिणी बनानी है, लेकिन नामों पर सहमति बनाना आसान नहीं हो रहा। शहर के अधिकांश बड़े नेता अपने-अपने समर्थकों को शामिल कराने के प्रयास में जुटे हैं। सीमित संख्या के कारण कई नामों पर फैसला करना मुश्किल हो गया है और अंदरूनी खींचतान भी सामने आ रही है।
फिलहाल सूची रोकी गई
शनिवार को कार्यकारिणी की सूची को प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मंजूरी के लिए भेजा जाना था, लेकिन अंतिम मंथन जारी रहने के कारण सूची फिलहाल रोक दी गई है। माना जा रहा है कि सूची जारी होने के बाद असंतोष और विरोध की स्थिति भी बन सकती है, इसलिए नेतृत्व बेहद सावधानी से नाम तय कर रहा है।
सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता
पार्टी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि केवल सक्रिय और संगठनात्मक रूप से मजबूत कार्यकर्ताओं को ही स्थान दिया जाएगा। उद्देश्य आगामी नगर निगम चुनाव से पहले जमीनी स्तर पर मजबूत नेटवर्क तैयार करना है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे इसी फार्मूले के आधार पर टीम तैयार कर रहे हैं।
वार्ड और बूथ अध्यक्षों के नाम भी लंबित
जिला कांग्रेस कमेटी ने ग्रामीण स्तर पर अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी है, लेकिन शहर में अभी तक वार्ड अध्यक्ष, बूथ अध्यक्ष और प्रभारियों के नाम घोषित नहीं हो पाए हैं। पर्याप्त नाम नहीं मिलने के कारण प्रक्रिया अटकी हुई है। अब शहर कांग्रेस ने इन पदों के लिए नाम 28 फरवरी तक पुनः मांगे हैं।
चुनाव से पहले संगठन कसने की कोशिश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रयोग चुनावी रणनीति का हिस्सा है। संगठन और चुनावी जिम्मेदारियों को अलग-अलग बांटकर कांग्रेस बूथ स्तर पर मजबूती लाना चाहती है। हालांकि कार्यकारिणी घोषित होने के बाद असंतोष की संभावना भी जताई जा रही है, क्योंकि कई वरिष्ठ नेता अपने समर्थकों को जगह दिलाने की कोशिश में लगे हुए हैं।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नई कार्यकारिणी में किन चेहरों को मौका मिलता है और क्या यह फार्मूला चुनाव में पार्टी को संगठनात्मक बढ़त दिला पाएगा।