इंदौर शीतलामाता बाजार विवाद : लव जिहाद के आरोपों के बीच व्यापार से निकाले गए !

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इंदौर, 26 सितम्बर 2025।
मध्यप्रदेश का इंदौर इन दिनों धार्मिक और सामाजिक तनाव का केंद्र बन गया है। शहर के प्रसिद्ध शीतलामाता बाजार में भाजपा की पूर्व मेयर मालिनी गौड़ के बेटे और भाजपा नगर उपाध्यक्ष एकलव्य सिंह गौड़ द्वारा दिए गए अल्टीमेटम के बाद व्यापारी मुस्लिम कर्मचारियों को अपनी दुकानों से हटाने लगे हैं। यह विवाद धीरे-धीरे केवल रोजगार का नहीं, बल्कि सदियों पुराने हिंदू-मुस्लिम भाईचारे के टूटने का रूप ले रहा है।


एकलव्य गौड़ का अल्टीमेटम

एकलव्य सिंह गौड़, जो हिंद रक्षक संगठन के संयोजक भी हैं, ने दावा किया कि शीतलामाता बाजार से लगातार शिकायतें मिल रही थीं। उनका आरोप है कि बाजार में काम करने वाले कुछ मुस्लिम सेल्समैन महिलाओं से छेड़छाड़ करते हैं, रास्ता रोकते हैं और कथित तौर पर “लव जिहाद” जैसी गतिविधियों में शामिल हैं।

उन्होंने व्यापारियों से बैठक कर कहा था कि—

  • “जिहादी मानसिकता वाले लोगों को बाहर किया जाए।”
  • “हमने किसी धर्म का नाम नहीं लिया, पर जो बहन-बेटियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करेगा, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
  • “व्यापारियों ने हमें एक महीने का समय मांगा था। अब समय पूरा हो गया है, हम एक दिन और देखेंगे, उसके बाद अपनी रणनीति के अनुसार कार्रवाई करेंगे।”

व्यापारियों पर दबाव, रोजगार छिनने लगा

शीतलामाता बाजार में लगभग 400 दुकानों का संचालन होता है। इनमें से 65 से 70 मुस्लिम सेल्समैन काम कर रहे थे।

  • एसोसिएशन के महामंत्री अतुल नीमा ने माना कि अधिकांश मुस्लिम कर्मचारियों को निकाल दिया गया है।
  • कुछ दुकानों में अभी भी मुस्लिम कर्मचारी बचे हैं, पर उन्हें हटाने की प्रक्रिया जारी है।
  • दुकानदारों का कहना है कि वे यह कदम मजबूरी में उठा रहे हैं क्योंकि अल्टीमेटम का पालन करना उनके लिए दबाव की स्थिति बन गया है।

विरोध और आक्रोश

इस कदम का असर केवल बाजार तक सीमित नहीं रहा।

  • मुस्लिम समाज ने राजबाड़ा में प्रदर्शन किया।
  • कई मुस्लिम व्यापारी और कर्मचारी आक्रोशित होकर बोले कि “हमें केवल इसलिए हटाया जा रहा है क्योंकि हम मुसलमान हैं। हमारा कोई गलत रिकॉर्ड नहीं है। हम दशकों से यहां शांति से व्यापार कर रहे हैं।”
  • दुकानदार मोहम्मद गुलजार ने कहा—
    “हम यहां 30-35 साल से हैं। हमें केवल इसलिए बाहर किया जा रहा है क्योंकि हम मुस्लिम हैं। यह राजनीति है, व्यापार नहीं।”

हिंदू व्यापारी भी असहज

दिलचस्प बात यह है कि कई हिंदू व्यापारी भी इस माहौल से असहज हैं।

  • पप्पू महेश्वरी, बाजार के एक व्यापारी ने कहा—
    “हम सेल्समैन को निकालना नहीं चाहते थे, लेकिन एसोसिएशन के निर्देशों का पालन कर रहे हैं। इससे आर्थिक नुकसान हो रहा है और भाईचारा भी टूट रहा है।”
  • बलवंत सिंह राठौड़, जो मुस्लिम पार्टनर के साथ दुकान चलाते हैं, ने कहा—
    “हमारी दुकान खाली करवाई जा रही है। शासन-प्रशासन को मदद करनी चाहिए।”

बाजार की दशकों पुरानी पहचान दांव पर

शीतलामाता बाजार लंबे समय से हिंदू-मुस्लिम व्यापारिक साझेदारी का केंद्र रहा है।

  • यहां कई दुकानें साझेदारी में चलती थीं।
  • ग्राहक वर्ग भी मिश्रित है।
  • महिलाओं की खासी संख्या यहां खरीदारी के लिए आती है।

लेकिन मौजूदा विवाद ने इस साझा पहचान को झकझोर दिया है। कई व्यापारी मानते हैं कि यह विवाद आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तर पर नुकसानदेह है।


प्रशासन और राजनीति की चुप्पी

अब तक इस मामले में न तो प्रशासन ने सख्त हस्तक्षेप किया है और न ही विपक्षी दलों की ओर से कोई बड़ा बयान सामने आया है।

  • व्यापारी मदद के लिए शासन-प्रशासन की ओर देख रहे हैं।
  • जबकि गौड़ और हिंद रक्षक संगठन साफ कह रहे हैं कि यदि व्यापारी पूरी तरह मुस्लिम कर्मचारियों को नहीं हटाते, तो संगठन खुद “एक्शन” लेगा।

बड़ा सवाल

  • क्या यह कदम महिलाओं की सुरक्षा और लव जिहाद रोकने के नाम पर उठाया जा रहा है?
  • या फिर यह केवल धार्मिक आधार पर रोजगार और व्यापार से बाहर करने की रणनीति है?
  • क्या इंदौर का यह विवाद पूरे प्रदेश या देश में सांप्रदायिक दरार को और गहरा करेगा?

निष्कर्ष

इंदौर का शीतलामाता बाजार केवल एक व्यापारिक केंद्र नहीं, बल्कि साझी संस्कृति और भाईचारे की पहचान रहा है। आज वही पहचान राजनीतिक बयानबाज़ी और धार्मिक आरोपों की वजह से दरक रही है।
जहां एक ओर हिंदू व्यापारी दबाव में अपने वर्षों पुराने मुस्लिम कर्मचारियों को नौकरी से निकाल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मुस्लिम समुदाय खुद को असुरक्षित और अलग-थलग महसूस कर रहा है।

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