इंदौर से उठी स्वदेशी वस्त्रों की नई मुहिम : 5 हजार संस्थानों पर लगेगा “हम स्वदेशी वस्त्र बेचते हैं!

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इंदौर, 26 सितंबर 2025।
त्योहारों के मौसम में इंदौर एक बार फिर स्वदेशी आंदोलन का केंद्र बनने जा रहा है। इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन ने घोषणा की है कि 28 सितंबर से पूरे शहर में एक विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत 5 हजार से अधिक संस्थानों पर “हम स्वदेशी वस्त्र बेचते हैं” लिखे बोर्ड लगाए जाएंगे। इसका उद्देश्य लोगों को स्वदेशी वस्त्रों के प्रति जागरूक करना और विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार को सशक्त बनाना है।


पृष्ठभूमि : विदेशी कपड़ों का बहिष्कार

कुछ महीने पहले इंदौर के गारमेंट व्यापारियों ने विदेशी, खासकर चीन और बांग्लादेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया था।

  • दुकानों पर तख्तियां लगाई गईं।
  • विदेशी कपड़ों की होली जलाकर विरोध किया गया।
  • व्यापारियों ने शपथ ली कि वे केवल स्वदेशी वस्त्रों को ही बढ़ावा देंगे।

इस अभियान का असर इतना हुआ कि कई रेडिमेड फैक्ट्रियां भी अब स्वदेशी कच्चे माल और कपड़ों का इस्तेमाल करने लगी हैं।


नया अभियान : 28 सितंबर से शुरुआत

एसोसिएशन अध्यक्ष अक्षय जैन ने बताया कि 28 सितंबर को इंदौर में एक विशेष कार्यक्रम होगा।

  • इस अवसर पर सांसद शंकर लालवानी, विधायक गोलू शुक्ला और बड़ी संख्या में व्यापारी शामिल होंगे।
  • कार्यक्रम के बाद औपचारिक रूप से बोर्ड लगाने की शुरुआत होगी।

कहां-कहां लगाए जाएंगे बोर्ड?

यह अभियान बेहद व्यापक है और शहर के लगभग हर प्रमुख व्यापारिक स्थान को कवर करेगा।

  • 700 ट्रेडिंग दुकानों पर बोर्ड लगाए जाएंगे।
  • लगभग 2 हजार फैक्ट्रियों में भी यह बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाए जाएंगे।
  • शहर की सभी रेडिमेड और रिटेल दुकानों पर बोर्ड लगाया जाएगा।
  • इतना ही नहीं, जो फैक्ट्रियां माल बाहर भेजती हैं, उनके साथ भी यह बोर्ड भेजे जाएंगे ताकि बाहर के शहरों और कस्बों में भी इन्हें अपनाया जा सके।

कुल मिलाकर, 5 हजार से अधिक संस्थान इस मुहिम का हिस्सा होंगे।


उद्देश्य : आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी की पहचान

एसोसिएशन अध्यक्ष अक्षय जैन ने कहा—

  • “हम चाहते हैं कि भारत अपनी बनी वस्तुओं से अपनी पहचान बनाए।”
  • “जब हम विदेशी कपड़े खरीदते हैं तो हमारा पैसा उन्हीं देशों के पास जाता है, और वही ताकतें उस पैसे का इस्तेमाल हमारे खिलाफ करती हैं।”
  • “इसलिए हमने 20 मई से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के साथ चीन-बांग्लादेशी वस्त्रों के बहिष्कार की शुरुआत की थी, अब इसे और आगे बढ़ा रहे हैं।”

उन्होंने बताया कि यह केवल व्यापारियों का अभियान नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रप्रेम और आत्मनिर्भरता का संदेश भी है।


इंदौर बनेगा मॉडल सिटी

इंदौर का यह प्रयास देश के अन्य शहरों के लिए मॉडल साबित हो सकता है।

  • यहां से भेजे गए बोर्ड जब बाहर की दुकानों पर लगेंगे तो यह संदेश राष्ट्रीय स्तर पर फैलेगा।
  • व्यापारी मानते हैं कि यदि ग्राहक को यह भरोसा दिलाया जाए कि दुकान पर केवल भारतीय कपड़े और वस्त्र मिलेंगे, तो ग्राहक भी संतोष और गर्व के साथ खरीदारी करेगा।

बड़ा सवाल

  • क्या यह पहल वास्तव में चीन और बांग्लादेशी वस्त्रों के बाजार पर असर डालेगी?
  • क्या ग्राहक केवल स्वदेशी वस्त्र खरीदने के लिए तैयार होगा, खासकर तब जब विदेशी कपड़े सस्ते मिलते हैं?
  • या फिर यह अभियान केवल एक प्रतीकात्मक राष्ट्रवादी कदम बनकर रह जाएगा?

निष्कर्ष

इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन की यह पहल निश्चित रूप से देश में स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई गति देने वाली है।
त्योहारों के मौके पर जब बाजार पूरी रौनक पर होगा, ऐसे समय में ग्राहकों को “हम स्वदेशी वस्त्र बेचते हैं” का बोर्ड न केवल एक संदेश देगा, बल्कि यह भी दिखाएगा कि व्यापारी अब केवल लाभ नहीं, बल्कि देशहित को प्राथमिकता दे रहे हैं।

यह देखना दिलचस्प होगा कि 28 सितंबर से शुरू होने वाला यह अभियान आने वाले दिनों में इंदौर और देश के अन्य हिस्सों में कितना असर डाल पाता है।

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