सागर। गुरुवार दोपहर 1:30 बजे सागर शहर के व्यस्त एलिवेटेड कॉरिडोर पर एक दिल दहला देने वाली घटना घटी। अचानक एक ऑटो चालक की तबीयत बिगड़ी और वह सीने में तेज दर्द की वजह से सड़क पर ही बेहोश होकर गिर पड़ा। चारों तरफ ट्रैफिक और भीड़भाड़ होने के बावजूद वहां से गुजर रहे लोगों का रवैया चौंकाने वाला था। किसी ने भी उस तड़पते इंसान को उठाने या मदद करने की कोशिश नहीं की।

यह दृश्य इंसानियत की गिरती संवेदनाओं पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। लोग घटनास्थल पर खड़े होकर मूकदर्शक बने रहे। कई राहगीरों ने नजरें फेर लीं, तो कुछ ने दूर से ही तमाशा देखना बेहतर समझा।
लेकिन तभी हालात बदलते हैं। मौके से गुजर रहे स्थानीय सिटी हलचल न्यूज चैनल के पत्रकार शिवम साहू ने जब बेहोश पड़े ऑटो चालक को देखा तो बिना देर किए तुरंत लोगों से मदद की गुहार लगाई। अफसोस की बात रही कि आसपास मौजूद भीड़ ने उनके आह्वान को अनसुना कर दिया।

ऐसे समय में एक अन्य साहसी ऑटो चालक आगे आया। उसने पत्रकार के साथ मिलकर उस बीमार व्यक्ति को उठाया और दोनों ने मिलकर तत्काल अस्पताल पहुंचाया। वहां समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बचाई जा सकी।
यह घटना दो पहलुओं को उजागर करती है—एक तरफ जहां समाज का बड़ा हिस्सा संवेदनहीन होकर मानवता के मूल कर्तव्य से मुंह मोड़ लेता है, वहीं दूसरी ओर कुछ जागरूक और साहसी लोग आज भी उम्मीद की किरण बने हुए हैं। पत्रकार शिवम साहू और उस ऑटो चालक की तत्परता ने साबित कर दिया कि अगर निस्वार्थ भाव से मदद की जाए तो किसी की जिंदगी बचाई जा सकती है।

पर सवाल अभी भी जस का तस खड़ा है—क्या हमारी इंसानियत इतनी कमजोर हो गई है कि सड़क पर तड़पते इंसान को भी हम नजरअंदाज कर दें? यह घटना समाज के हर व्यक्ति के लिए एक आईना है, जो हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि कल अगर हम या हमारा अपना कोई इस स्थिति में हो तो क्या हम भी यही तमाशा बनेंगे या मदद को आगे आएंगे।
ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता – अर्पित सेन
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