इंदौर, 2 सितम्बर 2025।
सोशल मीडिया पर सक्रिय ठगों के गिरोह ने इंस्टाग्राम को ठगी का अड्डा बना डाला है। ताजा मामला इंदौर से सामने आया है, जहां एक युवती के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर युवक को जाल में फंसाया गया। इंस्टाग्राम चैटिंग के बाद आरोपी युवक को मिलने बुलाकर उससे 50 हजार रुपए जबरन ट्रांसफर करवा लिए। तेजाजी नगर पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

कैसे बुना गया जाल?
शिकायतकर्ता राहुल (निवासी लवकुश कॉलोनी) ने बताया कि 25 अगस्त को उसके इंस्टाग्राम पर “प्रिया ठाकुर” नाम से आईडी से फ्रेंड रिक्वेस्ट आई। बातचीत शुरू हुई और अगले ही दिन मिलने का प्रस्ताव रखा गया।
- प्रिया ने राहुल को तेजाजी नगर बायपास स्थित एक ब्रिज के पास बुलाया।
- जब राहुल वहां पहुंचा तो तीन युवक काली बाइक पर आए।
- उन्होंने खुद को युवती का भाई बताते हुए राहुल पर गुस्सा दिखाना शुरू कर दिया।
- राहुल की बाइक की चाबी निकालकर आरोपियों ने मारपीट की और उसे धमकाकर चमेली देवी कॉलेज के पास जंगल की ओर ले गए।
यहां आरोपियों ने राहुल को डरा-धमकाकर अलग-अलग खातों में 50 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए।
पुलिस की कार्रवाई
राहुल ने हिम्मत दिखाते हुए 29 अगस्त को थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद मोबाइल नंबर और साइबर तकनीकी की मदद से पुलिस ने सोमवार रात तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपी—
- पंकज खातकर, निवासी लसूडिया (बैतूल मूल निवासी)
- यश सोलंकी, निवासी निरंजनपुर
- विजेंद्र गुप्ता, मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला
पुलिस ने उनके पास से एक बाइक, मोबाइल फोन और कुछ नकदी बरामद की है।
पूछताछ में खुलासे
टीआई देवेंद्र मरकाम के अनुसार, आरोपियों ने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उन्होंने बताया कि वह लंबे समय से सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर युवकों को फंसा रहे थे।
- आरोपी पहले इंस्टाग्राम या फेसबुक पर आकर्षक नाम और फोटो से प्रोफाइल बनाते।
- फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर चैटिंग शुरू करते।
- जैसे ही भरोसा बनता, सुनसान जगह पर मिलने बुलाते।
- वहां धमकाकर कैश या ऑनलाइन ट्रांसफर से रुपए ऐंठ लेते।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने कितने और लोगों से इसी तरह की ठगी की है।
पुराने मामले भी दर्ज
तीनों आरोपी पहले भी अपराध में लिप्त पाए गए हैं। जुलाई 2025 में ये शिप्रा इलाके में आबकारी और आर्म्स एक्ट के मामले में पकड़े जा चुके थे। उस समय भी ये पुलिस की पकड़ में आए थे, लेकिन जमानत पर छूटकर फिर से अपराध करने लगे।
पुलिस की अपील
एडिशनल डीसीपी, क्राइम ब्रांच राजेश दंडोतिया ने कहा—
“सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती करना खतरनाक हो सकता है। युवक-युवतियां बिना जांचे-परखे किसी फर्जी आईडी पर भरोसा न करें। ऐसे मामलों में तुरंत पुलिस को सूचना दें।”
बड़ा सबक
यह मामला न सिर्फ साइबर ठगी का उदाहरण है, बल्कि यह भी बताता है कि सोशल मीडिया पर आकर्षक नाम और तस्वीरों के पीछे कौन छिपा है, यह जांचना बेहद जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी बरतकर ऐसे गिरोहों से बचा जा सकता है।