मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन सागर द्वारा सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत स्थानीय पद्माकर ग्राउंड मकरोनिया में आयोजित तीन दिवसीय आजीविका फ्रेश मेला सोमवार को शुरू हुआ। यह मेला न केवल ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को सशक्त बनाने का मंच है, बल्कि शहरवासियों के लिए शुद्ध, परंपरागत और पोषक आहार का अद्भुत संगम भी प्रस्तुत कर रहा है।

सहजन से बने पापड़ और टैबलेट बने आकर्षण
मेले में सहजन (मंगा) से बने पापड़ और टैबलेट ने लोगों का खासा ध्यान खींचा। आयोजकों ने बताया कि ये उत्पाद बाजार में आमतौर पर उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन गर्भवती और धात्री माताओं, छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह एक पोषण से भरपूर विकल्प है, जो शरीर की कमी को पूरा करने में सहायक है।
कलात्मक झाड़ू ने बदली सोच
खुरई विकासखंड की महिलाओं द्वारा लाई गई कलात्मक झाड़ू भी मेले की शान बनी। आम धारणा है कि झाड़ू केवल सफाई के लिए होती है, लेकिन इस मेले ने यह साबित कर दिया कि एक झाड़ू आपके ड्राइंग रूम की शोभा भी बढ़ा सकती है। ग्रामीण महिलाओं की रचनात्मकता ने सभी को प्रभावित किया।
देसी सब्जियां और पारंपरिक स्वाद
मेले में गांव की ताज़ा देसी सब्जियां – खीरा, कद्दू, लौकी (तूमा) – बड़ी मात्रा में उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा गांव में बने राजगीर के लड्डू, हाथ से पीसे गए धनिया, मिर्च और हल्दी के मसाले, घर की चक्की में पिसे मल्टीग्रेन आटे और बेसन के पैकेट भी खरीदारों के आकर्षण का केंद्र बने।

मिट्टी के बर्तन और रेडीमेड ड्रेस भी उपलब्ध
ग्रामीण अंचल की महिलाओं ने अपने हुनर का प्रदर्शन करते हुए मिट्टी के बर्तनों और रेडीमेड ड्रेस की स्टॉल भी लगाई। घर का बना अचार, बरी, पापड़ और बिजोरा – जो अब शहरों से लगभग गायब हो चुका है – भी इस मेले में लोगों को लंबे समय बाद देखने और चखने को मिला।
‘लोकल फॉर वोकल’ का जीवंत उदाहरण
जिला परियोजना प्रबंधक श्री प्रभास मुडोतिया ने बताया कि “सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत लोकल और स्वर के कांसेप्ट को मजबूत करने के उद्देश्य से इस मेले का आयोजन किया गया है। भविष्य में भी इस तरह के मेले लगातार आयोजित किए जाएंगे, ताकि ग्रामीण उत्पादकों को स्थायी मंच मिल सके।”
शहरवासियों के लिए मां के हाथ का स्वाद
मेले के आयोजकों का मानना है कि आज शहरी ग्राहक बाजार से शुद्ध देसी और घर की बनी खाद्य सामग्री नहीं पा पाता, लेकिन इस मेले में उसे वह सब उपलब्ध है जो मातृत्व और ग्रामीण स्वाद की याद दिला देता है।
मेले का पहला दिन ही लोगों की भीड़ से सराबोर रहा और यह उम्मीद जताई जा रही है कि अगले दो दिन और भी बड़ी संख्या में ग्राहक यहां आकर न केवल खरीदारी करेंगे बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आत्मनिर्भरता प्रयासों को सराहेंगे भी।