पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, 2.89 लाख रुपये और मोबाइल जब्त
उज्जैन, मध्य प्रदेश: उज्जैन के बसंत विहार में रहने वाली 50 वर्षीय महिला सरोज माली साइबर ठगों के जाल में इस कदर फंसी कि उन्हें 40 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट में रहना पड़ा। ठगों ने कछुआ और मछली पालने को गैरकानूनी बताकर FIR दर्ज करने की धमकी दी और डराकर उनके गहने गिरवी रखवाकर 5 लाख 9 हजार रुपये ठग लिए। उज्जैन पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों, जिसमें एक युवती शामिल है, को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपियों से 2.89 लाख रुपये नकद और तीन मोबाइल फोन जब्त किए हैं।

घटना का विवरण: डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर ठगी
पुलिस अधीक्षक (SP) प्रदीप शर्मा और सब-इंस्पेक्टर (SI) जितेंद्र पाटीदार के अनुसार, सरोज माली उज्जैन के बसंत विहार में अकेली रहती हैं। उनके पति, जो रिटायर्ड फौजी थे, की मृत्यु हो चुकी है, और उनके बच्चे बाहर काम करते हैं। 12 अगस्त 2025 को सरोज तबीयत खराब होने के कारण अपनी बहन के घर नागदा गई थीं। उसी दिन शाम को उनके पास एक अनजान महिला का कॉल आया, जिसने खुद को बिरला ग्राम थाने की पुलिसकर्मी बताया। कॉलर ने सरोज को घर में कछुआ और मछली पालने के लिए FIR दर्ज होने की बात कही और किसी से भी संपर्क करने से मना किया।
इसके बाद एक अन्य युवक ने कॉल कर दावा किया कि उसे भी कछुआ और मछली पालने के कारण गिरफ्तार किया गया था। डर के मारे सरोज ने ठगों की बात मान ली। 12 से 14 अगस्त तक, करीब 40 घंटे तक, वह डिजिटल अरेस्ट में रहीं, यानी ठगों ने उन्हें लगातार फोन पर डराए रखा और किसी से बात करने से रोका। इस दौरान एक अन्य आरोपी ने खुद को क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर बताकर भी धमकाया। डर के कारण सरोज ने अपने गहने गिरवी रखकर 5 लाख 9 हजार रुपये ठगों को दे दिए। 14 अगस्त को ठग उनके घर पहुंचे और रुपये लेकर फरार हो गए।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई: तीन आरोपी गिरफ्तार
ठगी का अहसास होने पर सरोज ने 15 अगस्त को बिरला ग्राम थाने में शिकायत दर्ज की। पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और सीसीटीवी फुटेज तथा मोबाइल कॉल डिटेल के आधार पर आरोपियों की पहचान की। थाना बिरला ग्राम पुलिस ने तीन आरोपियों—राजेश उर्फ राज (25, ग्राम गुणावद, रतलाम), बलराम जाट (32, ग्राम गुणावद, रतलाम), और युक्ति बैरागी (25, नेहरू नगर, रतलाम)—को गिरफ्तार किया। आरोपियों से 2.89 लाख रुपये नकद और तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए। पुलिस के अनुसार, युक्ति बैरागी और राजेश उर्फ राज प्रेमी-प्रेमिका हैं।
आरोपियों का बैकग्राउंड और ठगी का तरीका
पुलिस पूछताछ में पता चला कि युक्ति बैरागी पहले इंदौर की एक फाइनेंस कंपनी में काम करती थी। नौकरी छूटने के बाद उसने आसान कमाई के लिए ठगी का रास्ता चुना। उसने सरोज के बेटे द्वारा घर में मछली और कछुआ पालने की जानकारी का इस्तेमाल कर उन्हें डराया। तीनों आरोपी एक ही गांव के हैं और संगठित तरीके से ठगी को अंजाम दे रहे थे। ठगों ने फर्जी पुलिसकर्मी बनकर सरोज को डराया और रुपये लेने के लिए उनके घर तक पहुंच गए, लेकिन सीसीटीवी फुटेज में कैद होने की गलती ने उन्हें पकड़वा दिया।
डिजिटल अरेस्ट: साइबर ठगी का नया हथकंडा
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगों का एक नया तरीका है, जिसमें पीड़ित को फोन या वीडियो कॉल के जरिए डराकर मानसिक रूप से बंधक बनाया जाता है। ठग फर्जी पुलिस या सरकारी अधिकारी बनकर पीड़ित को गिरफ्तारी, कानूनी कार्रवाई, या सामाजिक बदनामी का डर दिखाते हैं। इस मामले में ठगों ने सरोज को 40 घंटे तक फोन पर बंधक रखा और किसी से संपर्क करने से मना किया। उज्जैन में हाल के महीनों में डिजिटल अरेस्ट के कई मामले सामने आए हैं, जिसमें ठगों ने बुजुर्गों और अकेले रहने वालों को निशाना बनाया।
पुलिस की सलाह: सतर्कता ही बचाव
एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि साइबर ठगी से बचने के लिए लोगों को अनजान कॉल्स और मैसेज से सावधान रहना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि:
- अनजान नंबरों से आने वाले कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी न साझा करें।
- किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी प्रामाणिकता जांच लें।
- साइबर ठगी की शिकायत तुरंत नजदीकी थाने या साइबर सेल के हेल्पलाइन नंबर 7049124444 पर करें।
- संदिग्ध कॉल्स की जानकारी राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर दर्ज करें।