सागर, जिले में उर्वरक वितरण व्यवस्था को पारदर्शी, व्यवस्थित और किसानों के हित में बनाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। कलेक्टर श्री संदीप जी आर ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब जिले में शत-प्रतिशत उर्वरक का विक्रय केवल ई-विकास प्रणाली के माध्यम से ही किया जाएगा।
यह निर्देश किसान कल्याण तथा कृषि विकास संचालनालय द्वारा 1 अप्रैल से लागू किए गए आदेशों के तहत जारी किए गए हैं, जिनका उद्देश्य उर्वरक वितरण में पारदर्शिता लाना और कालाबाजारी जैसी अनियमितताओं पर रोक लगाना है।
💻 डिजिटल प्रणाली से होगा पूरा नियंत्रण
कलेक्टर ने जिले के सभी उर्वरक विक्रेताओं को निर्देशित किया है कि वे उर्वरक का वितरण अनिवार्य रूप से ई-विकास (e-Vikas) प्रणाली के माध्यम से ही करें। इस प्रणाली के जरिए उर्वरक की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से दर्ज होगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सही मात्रा में और सही किसानों तक उर्वरक पहुंच रहा है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग से वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और किसानों को भी किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

⚠️ नियमों का उल्लंघन करने पर होगी सख्त कार्रवाई
कलेक्टर श्री संदीप जी आर ने चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी उर्वरक विक्रेता ई-विकास प्रणाली का पालन नहीं करेंगे, उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे नियमित रूप से उर्वरक विक्रेताओं की निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी विक्रेता निर्धारित नियमों का पालन कर रहे हैं।
🌾 किसानों के हित में महत्वपूर्ण पहल
यह निर्णय किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अक्सर देखा जाता है कि पारंपरिक व्यवस्था में उर्वरक वितरण के दौरान गड़बड़ियां, कालाबाजारी और अनियमितताएं सामने आती हैं।
ई-विकास प्रणाली के माध्यम से इन समस्याओं पर नियंत्रण पाया जा सकेगा और किसानों को समय पर एवं उचित मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हो सकेगा।
📊 पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी
डिजिटल प्रणाली लागू होने से न केवल उर्वरक वितरण की निगरानी आसान होगी, बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। हर लेन-देन का रिकॉर्ड उपलब्ध होने से किसी भी शिकायत या विवाद का समाधान जल्दी किया जा सकेगा।
इसके अलावा, इस प्रणाली से यह भी पता लगाया जा सकेगा कि किस क्षेत्र में कितनी मात्रा में उर्वरक की आवश्यकता है, जिससे भविष्य की योजना बेहतर तरीके से बनाई जा सकेगी।
🤝 प्रशासन और विक्रेताओं के बीच समन्वय जरूरी
कलेक्टर ने यह भी कहा कि इस व्यवस्था को सफल बनाने के लिए प्रशासन और उर्वरक विक्रेताओं के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। विक्रेताओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जाए और उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाए, ताकि वे इस प्रणाली का प्रभावी उपयोग कर सकें।
सागर जिले में उर्वरक विक्रय को ई-विकास प्रणाली से जोड़ने का निर्णय पारदर्शिता, जवाबदेही और किसान हितों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल वितरण व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि किसानों को समय पर और सही तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराना भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।