एक युवा की वह यात्रा, जिसके कदमों ने हजारों युवाओं में सांस्कृतिक चेतना की अग्नि जला दी !

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एक साल… सिर्फ बारह महीने।
कैलेंडर के पन्नों पर तो यह एक साधारण समय होता है,
लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं —
जो समय को सिर्फ जीते नहीं… समय को गढ़ते हैं।

ऐसे ही एक युवा हैं —
अविराज भूपेन्द्र सिंह।

जिस दिन 22 वर्ष के इस युवा ने अपने जन्मदिन पर भजन संध्या के मंच से राजनीति में अपनी यात्रा शुरू की, उस दिन किसी ने कल्पना नहीं की थी कि एक दिन यही युवा प्रखर वक्ता, सांस्कृतिक चेतना के वाहक और हजारों युवाओं के प्रेरणास्रोत बनेंगे।

🔥 शुरुआत — राजनीति नहीं, संस्कृति से

29 नवम्बर 2024।
जन्मदिन का अवसर।
जहाँ अधिकांश युवा केक और पार्टियों के बीच जश्न मनाते हैं,
वहीं अविराज ने भजन संध्या, धार्मिक अनुष्ठान और गुरुजनो के आशीर्वाद से अपनी यात्रा शुरू की।

यह संयोग नहीं… संकल्प था।

क्योंकि अविराज राजनीति को सत्ता प्राप्ति नहीं,
संस्कृति और राष्ट्रसेवा का माध्यम मानते हैं।

उनकी आँखों में स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत था —
सूना नहीं… शक्तिशाली भारत, जागृत भारत।


📌 युवा संवाद — विचारों की क्रांति

11 सितंबर — शिकागो भाषण की वर्षगांठ।
महाकवि पद्माकर सभागार में भव्य युवा संवाद।
1000 से अधिक युवाओं की उपस्थिति, विद्वान, चिंतक, गुरुजन और एक 22 वर्षीय युवा मंच पर—
अविराज सिंह।

उस दिन मंच पर खड़े अविराज में सिर्फ वक्ता नहीं —
आग थी… चेतना थी… चेतावनी थी… और समाधान था।

उन्होंने कहा —

“ड्रग्स और नशीले पदार्थों का व्यवसाय कोई व्यापार नहीं…
यह भारत को मानसिक रूप से कमजोर करने की विदेशी साजिश है।
लव जिहाद जैसी समस्याएं उसी षडयंत्र की शाखाएँ हैं।
जागो, उठो… भारत को तोड़ने वालों के खिलाफ खड़े होने का समय आ गया है!”

हॉल तालियों से गूंज उठा।
युवा जाग चुके थे।


🌼 आध्यात्मिकता — ज्ञान नहीं, चरित्र

मंच पर जब अविराज धार्मिक आयोजनों में बोलते हैं,
तो सिर्फ भाषण नहीं —
जैसे श्रोताओं के भीतर संस्कारों की नदी बहने लगती है।

कंठस्थ स्तोत्र, मंत्र, श्लोक और प्रवाहमान उच्चारण —
लोग कहते हैं, “हमने किसी संत का उद्बोधन सुना है।”

इसीलिए मंत्री, विधायक, संत और विद्वान एक स्वर में कह उठते —

“यह बालक विलक्षण है।
संस्कार और प्रतिभा ईश्वर का वरदान हैं।”


🔊 जनप्रतिनिधियों की स्वीकृति

मध्यप्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री पं. गोपाल भार्गव ने कहा —

“अविराज के संस्कार और प्रतिभा अद्वितीय हैं।”

विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा —

“अविराज का भाषण सुनकर विश्वास हो गया है कि
युवाओं को अब सही दिशा मिल गई है।”

कृष्ण जन्माष्टमी पर प्रहलाद पटैल बोले —

“मुझे नहीं लगता कि इतने कठिन स्तोत्र को इस तरह कंठस्थ करना संभव है।
अविराज अद्भुत प्रतिभा हैं।”


🌐 सोशल मीडिया पर सांस्कृतिक तूफान

जब धर्म और संस्कृति में आस्था और ज्ञान दोनों हों —
तो प्रभाव रुकता नहीं।

शिव तांडव स्तोत्र का वीडियो — 38 लाख 50 हजार व्यूज।
श्री वेंकटेश स्तोत्र — 16 लाख 89 हजार व्यूज।

सोशल मीडिया कह रहा था —

“धर्म सिर्फ किताबों में नहीं… युवाओं की नसों में भी दौड़ रहा है।”


❤️ सेवा — सिर्फ शब्द नहीं, कर्म

जन्मदिन पर अविराज ने केक नहीं…
रक्तदान शिविर आयोजित किया।

युवाओं की सहभागिता से 570 यूनिट रक्तदान।
एक संदेश —

“मनुष्यता से बड़ा कोई धर्म नहीं।”

घायल गौ-रक्षक आशीष दुबे के अस्पताल बिस्तर पर
अविराज ने उसका हाथ पकड़ा और कहा —

“तुम्हारा दर्द… हमारा दर्द है।”

यही नेतृत्व है।
यही मानवता है।
और यही राजनीति है —
जो लोगों के आंसू पोछे, न कि सेल्फी ले।


🔱 सनातन और राष्ट्र का ध्वज

रामकथा से सहस्त्रबाहु प्रकटोत्सव तक,
गोवर्धन पूजा से दीपोत्सव तक —
अविराज सिंह हमेशा उपस्थित रहे।

मंगलगिरी जैन तीर्थ में विश्वशांति यज्ञ में आहुति —
और संदेश —

“हर संप्रदाय अपना है… हर धर्म हमारा परिवार है।”

RSS शताब्दी पथ संचलन में सबसे आगे भगवा ध्वज लेकर चलना—
विजयादशमी पर मंच से एक हुंकार —

“हिंदू एकता भारत की शक्ति है।”


🌱 पर्यावरण — राष्ट्रधर्म

“एक पेड़ माँ के नाम” अभियान—
पहला पौधा अविराज ने अपनी माँ के नाम लगाया,
और फिर बच्चों के साथ हजारों पौधे रोपे।

संदेश —

“धरती हमारी माँ है। इसे हरा-भरा रखना हमारा धर्म।”


🪔 स्वदेशी — सम्मान नहीं, आत्मनिर्भरता

दीपावली मिलन पर
अविराज गाँव-गाँव गए, कारीगरों के घरों से दिये खरीदे,
और हर घर में संदेश पहुंचाया —

“स्वदेशी अपनाओ, राष्ट्र को मजबूत बनाओ।”


🔥 युवा — नया भारत

खुरई, सागर, बीना और दर्जनों कॉलेजों में युवा संवाद कार्यक्रम —
हजारों विद्यार्थियों में चेतना और साहस का संचार।

वक्ता नहीं…
युवा जागरण का नेतृत्वकर्ता।

ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता – अर्पित सेन
7806077338, 9109619237

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