एमपीसीए में सिंधिया परिवार की तीसरी पीढ़ी का जलवा

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29 वर्षीय महानआर्यमन निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए, बोले- ‘पिता के साथ मां भी खुश, एमपीसीए को नंबर वन बनाएंगे’

इंदौर। मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एमपीसीए) के चुनाव इस बार बेहद खास रहे। वजह थी – सिंधिया परिवार की तीसरी पीढ़ी का मैदान में उतरना। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे महानआर्यमन सिंधिया मंगलवार को एमपीसीए के निर्विरोध अध्यक्ष चुन लिए गए। महज 29 साल की उम्र में यह जिम्मेदारी मिलने से वे अब तक के सबसे युवा अध्यक्ष बन गए हैं।

इंदौर के होलकर स्टेडियम में हुई वार्षिक साधारण सभा (एजीएम) में पूरी कार्यकारिणी निर्विरोध चुनी गई। बैठक में स्वयं ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मौजूद रहे। इससे पहले पिता-पुत्र ने खजराना गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना की।


सिंधिया परिवार की परंपरा

महानआर्यमन के अध्यक्ष बनने के साथ ही सिंधिया परिवार की तीसरी पीढ़ी ने एमपीसीए की कमान संभाली है।

  • पहले उनके दादाजी माधवराव सिंधिया अध्यक्ष रह चुके हैं।
  • इसके बाद पिता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस पद की जिम्मेदारी निभाई।
  • अब तीसरी पीढ़ी के रूप में महानआर्यमन को यह जिम्मेदारी मिली है।

राजनीतिक गलियारों में इसे उनकी भविष्य की सियासी पारी की तैयारी भी माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि दादा और पिता दोनों ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत इसी तरह क्रिकेट एसोसिएशन से की थी।


अध्यक्ष बनने पर भावुक हुए महानआर्यमन

अध्यक्ष चुने जाने के बाद महानआर्यमन ने कहा –
“यह मेरे लिए बेहद भावुक क्षण है। जिस पद पर मेरे दादाजी और पिता रह चुके हैं, आज वहां मुझे सेवा का अवसर मिला है। मेरे पिता ही नहीं, मेरी मां भी बेहद खुश हैं। माता-पिता ने मुझे तीन मूल्य सिखाए हैं –

  1. साथ मिलकर काम करना,
  2. जमीन पर रहकर काम करना,
  3. और अकेले कभी निर्णय न लेना।”

एमपीसीए को नंबर वन बनाने का संकल्प

महानआर्यमन ने कहा कि उनकी प्राथमिकता मध्यप्रदेश क्रिकेट को राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊँचाई देना है।

  • ग्रामीण स्तर पर क्रिकेट को बढ़ावा देना।
  • बेटियों और बहनों को अधिक मौके देना।
  • टेक्नोलॉजी का उपयोग कर खिलाड़ियों की स्किल डेवलपमेंट करना।
  • जिला और संभाग स्तर पर क्रिकेट गतिविधियों की समीक्षा करना।

उन्होंने कहा – “इंदौर में होने जा रहे विमेंस वर्ल्ड कप के पांच मैच इस बात का प्रमाण हैं कि आईसीसी और बीसीसीआई को एमपीसीए पर विश्वास है। हम इस भरोसे को और मजबूत करेंगे।”


क्रिकेट से जुड़ा अनुभव

भले ही महानआर्यमन अभी युवा हैं, लेकिन क्रिकेट से उनका जुड़ाव पिछले कुछ वर्षों में लगातार गहराया है।

  • 2022 में उन्हें ग्वालियर डिविजनल क्रिकेट एसोसिएशन का उपाध्यक्ष बनाया गया।
  • इसी वर्ष वे एमपीसीए के आजीवन सदस्य बने।
  • उन्होंने मध्यप्रदेश क्रिकेट लीग (एमपीएल) की शुरुआत की और ग्वालियर में इसके सफल आयोजन में अहम भूमिका निभाई।

पिछले चुनाव की तस्वीर

एमपीसीए की पिछली कार्यकारिणी में सचिव और कोषाध्यक्ष पद पर कड़ा मुकाबला हुआ था।

  • सचिव पद पर संजीव राव ने अमिताभ विजयवर्गीय को हराया था।
  • कोषाध्यक्ष पद पर पवन जैन ने प्रेम पटेल को 78 वोटों से मात दी थी।
  • वहीं, अध्यक्ष अभिलाष खांडेकर निर्विरोध चुने गए थे।

इस बार पूरी कार्यकारिणी निर्विरोध चुनी गई, जो अपने आप में एक अद्भुत सहमति का उदाहरण है।


सियासी नजरिया

विशेषज्ञों का मानना है कि सिंधिया परिवार का खेल जगत में यह कदम सिर्फ खेल तक सीमित नहीं है।

  • महानआर्यमन को क्रिकेट संगठन से जोड़ना उनकी सियासी जमीन तैयार करने की रणनीति भी हो सकती है।
  • दादा माधवराव और पिता ज्योतिरादित्य दोनों ने राजनीति में आने से पहले क्रिकेट एसोसिएशन के जरिए ही अपनी पकड़ मजबूत की थी।

निष्कर्ष

महानआर्यमन सिंधिया का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना मध्यप्रदेश क्रिकेट के लिए नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है। अब देखना होगा कि युवा नेतृत्व के मार्गदर्शन में एमपीसीए किस तरह देश के शीर्ष क्रिकेट संघों की सूची में शामिल होता है।

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