एलपीजी गैस किट से संचालित ईको वेनों पर कसी गई नकेल, 6 वाहन जप्त !

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स्कूली बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) श्री मनोज कुमार तेहनगुरिया के नेतृत्व में सागर जिले के रहली क्षेत्र में बुधवार को एक सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। यह कार्यवाही जिला कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. के स्पष्ट निर्देश पर की गई, जिसमें विशेष रूप से स्कूल बसों, यात्री वाहनों एवं अवैध रूप से संचालित वाहनों की जांच की गई।

चेकिंग के दौरान 18 स्कूली वाहनों की गहन जांच की गई। इनमें से 6 ईको वेन – क्रमांक MP15CC0372, MP15CC3050, MP15ZH3917, MP04YN5946, MP15CC1599 और MP20BA3181एलपीजी गैस किट से संचालित पाई गईं। नियमानुसार, स्कूली बच्चों को ले जाने वाले वाहनों में एलपीजी गैस का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है, क्योंकि यह अत्यंत ज्वलनशील और जानलेवा साबित हो सकता है।

परिवहन विभाग ने तत्परता दिखाते हुए इन 6 वाहनों को तत्काल जप्त कर लिया और उन्हें कार्यालय परिसर में सुरक्षार्थ रखा गया। साथ ही, सभी वाहनों की एलपीजी गैस किट भी तत्काल निकालकर कार्यालय में सुरक्षित जमा कर दी गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ऐसे वाहनों का संचालन न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह बच्चों की जान से खुला खिलवाड़ है।

अभिभावकों से की गई अपील

आरटीओ ने इस अवसर पर समस्त अभिभावकों से विशेष अपील की है कि वे अपने बच्चों को ऐसे स्कूली वाहनों में स्कूल न भेजें जो एलपीजी गैस किट से संचालित हैं या फिर तकनीकी रूप से अनफिट प्रतीत होते हैं। बच्चों की सुरक्षा के प्रति अभिभावकों की सतर्कता ही असामाजिक वाहन संचालकों पर लगाम कसने में मदद करेगी।

नियमों की अनदेखी करने वालों पर जुर्माना

चेकिंग के दौरान 5 अन्य वाहन, जो प्राइवेट श्रेणी में पंजीकृत थे, नियमों को दरकिनार करते हुए स्कूली वाहन के रूप में संचालन करते पाए गए। इनमें से कई में क्षमता से अधिक बच्चों को भरकर ले जाया जा रहा था। इन सभी वाहनों पर मोटरयान अधिनियम की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत चालानी कार्रवाई करते हुए कुल ₹25,000/- का जुर्माना वसूल किया गया।

स्कूल बस संचालकों को दी गई चेतावनी

परिवहन विभाग ने समस्त स्कूल बस संचालकों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे वाहन संचालन के दौरान माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा तय सभी नियमों का पूर्ण पालन करें, जिनमें निम्नलिखित आवश्यकताएँ शामिल हैं:

  • प्रत्येक वाहन में स्पीड गर्वनर होना अनिवार्य।
  • फिटनेस सर्टिफिकेट, प्रदूषण प्रमाण पत्र, बीमा तथा मोटरयान कर अद्यतन होना चाहिए।
  • वाहन में फर्स्ट एड बॉक्स और अग्निशमन यंत्र की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
  • चालक के पास हैवी व्हीकल ड्राइविंग लाइसेंस हो तथा वह निर्धारित गणवेश में वाहन संचालित करे।
  • बच्चों को बैठक क्षमता के अनुसार ही बैठाया जाए, ओवरलोडिंग पूर्णतः निषिद्ध है।

निरंतर कार्रवाई का संकेत

आरटीओ श्री तेहनगुरिया ने स्पष्ट किया कि यह अभियान एक बार की कार्रवाई नहीं है बल्कि निरंतर रूप से ऐसे वाहनों की जांच की जाती रहेगी। यदि भविष्य में किसी भी वाहन में उपरोक्त सुरक्षा मानकों की कमी पाई जाती है, तो कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

भविष्य के लिए सख्त संदेश

इस अभियान के माध्यम से जिला प्रशासन और परिवहन विभाग ने एक सख्त संदेश देने का प्रयास किया है कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। गैर-कानूनी, अनफिट और खतरनाक वाहनों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे, चाहे वे किसी भी संस्था या व्यक्ति के अधीन क्यों न हों।


रहली क्षेत्र में की गई इस सघन कार्रवाई ने जहां नियमों की अनदेखी कर रहे वाहन संचालकों की बेखौफ लापरवाही को उजागर किया, वहीं परिवहन विभाग के इस प्रयास ने सार्वजनिक चेतना और जवाबदेही को भी नई दिशा दी है। अभिभावकों, स्कूल प्रशासन और परिवहन अधिकारियों के संयुक्त प्रयास से ही स्कूली बच्चों की यात्रा को सुरक्षित बनाया जा सकता है

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