मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में पुलिस ने एक सराहनीय पहल करते हुए ‘ऑपरेशन विश्वास’ के तहत गुम हुए मोबाइल फोन को उनके असली मालिकों तक पहुंचाकर भरोसे और सेवा का शानदार उदाहरण पेश किया है। इस अभियान के तहत मार्च 2026 में 106 मोबाइल फोन बरामद कर उन्हें उनके मालिकों को सौंपा गया। इन मोबाइलों की कुल कीमत लगभग 16 लाख रुपए आंकी गई है।
यह पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक अगम जैन के निर्देशन में साइबर सेल और जिले के विभिन्न थानों की संयुक्त टीम द्वारा की गई। इस अभियान में तकनीकी विशेषज्ञता, सतर्कता और विभिन्न राज्यों के पुलिस तंत्र के साथ समन्वय का उत्कृष्ट प्रदर्शन देखने को मिला।
कैसे चला ‘ऑपरेशन विश्वास’
‘ऑपरेशन विश्वास’ एक ऐसा अभियान है, जिसका उद्देश्य लोगों के खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन को ट्रैक कर उन्हें वापस दिलाना है। मोबाइल फोन आज के समय में केवल एक संचार का साधन नहीं रह गया है, बल्कि इसमें लोगों की व्यक्तिगत जानकारी, बैंकिंग डिटेल्स, फोटो और जरूरी दस्तावेज भी सुरक्षित रहते हैं। ऐसे में मोबाइल का खो जाना किसी भी व्यक्ति के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनता है।

इस अभियान के तहत पुलिस ने उन्नत तकनीकी साधनों का उपयोग करते हुए मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रैक की। कई मामलों में मोबाइल फोन छतरपुर जिले से बाहर अन्य राज्यों और जिलों में पाए गए। इनमें दिल्ली, लखनऊ, महोबा, झांसी, बांदा, टीकमगढ़, सागर और पन्ना जैसे क्षेत्रों से मोबाइल बरामद किए गए।
इन मोबाइलों को ट्रैक करने के बाद पुलिस ने संबंधित क्षेत्रों की पुलिस से संपर्क स्थापित किया और समन्वय बनाकर मोबाइल को वापस हासिल किया। यह प्रक्रिया काफी जटिल होती है, लेकिन टीम की मेहनत और कुशलता से इसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
इस साल अब तक 406 मोबाइल बरामद
‘ऑपरेशन विश्वास’ की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2026 में अब तक 406 से अधिक मोबाइल फोन बरामद किए जा चुके हैं। इनकी कुल कीमत करीब 70 लाख रुपए बताई गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि पुलिस इस अभियान को कितनी गंभीरता और निरंतरता के साथ चला रही है।
समाज के हर वर्ग को मिला लाभ
बरामद किए गए मोबाइल केवल किसी एक वर्ग से संबंधित नहीं थे, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के थे। इनमें छात्र-छात्राएं, मजदूर, किसान, एनजीओ कर्मचारी और गृहणियां शामिल हैं। जब इन लोगों को उनके खोए हुए मोबाइल वापस मिले, तो उनके चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी।
कई लोगों ने बताया कि उन्होंने उम्मीद ही छोड़ दी थी कि उनका मोबाइल कभी वापस मिलेगा, लेकिन पुलिस की इस पहल ने उनकी सोच बदल दी। इससे लोगों के मन में पुलिस के प्रति विश्वास और सम्मान भी बढ़ा है।
टीमवर्क और नेतृत्व की सफलता
इस अभियान की सफलता में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आदित्य पटले का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहा। वहीं साइबर सेल प्रभारी नेहा सिंह गुर्जर और उनकी टीम की मेहनत और तकनीकी दक्षता ने इस ऑपरेशन को सफल बनाया।
टीम ने दिन-रात मेहनत कर मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रैक की, डेटा का विश्लेषण किया और संबंधित स्थानों से संपर्क कर मोबाइल वापस मंगवाए। यह कार्य न केवल तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण था, बल्कि इसमें धैर्य और समर्पण की भी आवश्यकता थी।
‘मित्र पुलिस’ की छवि मजबूत
इस पहल से पुलिस की ‘मित्र पुलिस’ की छवि और अधिक मजबूत हुई है। आमतौर पर पुलिस को केवल कानून लागू करने वाली संस्था के रूप में देखा जाता है, लेकिन इस तरह की पहल यह दर्शाती है कि पुलिस आम नागरिकों की समस्याओं को समझती है और उनके समाधान के लिए तत्पर रहती है।
निष्कर्ष
‘ऑपरेशन विश्वास’ केवल एक अभियान नहीं, बल्कि लोगों के खोए हुए भरोसे को वापस लाने का प्रयास है। छतरपुर पुलिस की यह पहल अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकती है।
आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन की अहमियत को देखते हुए, इस तरह की कार्रवाई लोगों के लिए बहुत राहत भरी है। यह पहल यह भी साबित करती है कि यदि तकनीक और समर्पण का सही उपयोग किया जाए, तो बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान संभव है।
इस प्रकार, छतरपुर पुलिस ने न केवल 106 मोबाइल लौटाए, बल्कि सैकड़ों लोगों के चेहरे पर मुस्कान भी वापस लाई—और यही इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता है।