मध्य प्रदेश के महाराजपुर नगर में एक स्थानीय कथित डॉक्टर द्वारा दी गई दवा से 7 वर्षीय बच्चे की हालत गंभीर हो गई। सर्दी-जुकाम और बुखार की शिकायत पर दवा लेने के बाद बच्चा अचानक अचेत हो गया। परिजन उसे तुरंत महाराजपुर के सरकारी अस्पताल ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल छतरपुर रेफर कर दिया गया। फिलहाल बच्चे का उपचार जारी है और डॉक्टर उसकी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
जानकारी के अनुसार, महाराजपुर निवासी दादी रामकुंवर और दादा हरदयाल अपने नाती हर्षित अहिरवार को सर्दी, जुकाम और बुखार की शिकायत होने पर नगर के एक कथित “मुन्ना डॉक्टर” के पास ले गए थे। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने कुछ दवाइयां दीं, जिन्हें खिलाने के तुरंत बाद बच्चा अचेत होकर जमीन पर गिर पड़ा।

दादा-दादी का कहना है कि दवा देने के बाद से बच्चा न तो ठीक से बोल पा रहा है और न ही किसी प्रकार की प्रतिक्रिया दे रहा है। घबराए परिजन जब दोबारा संबंधित डॉक्टर के पास पहुंचे, तो उसने बच्चे को तत्काल सरकारी अस्पताल ले जाने की सलाह दी। आरोप है कि इस दौरान डॉक्टर ने दी गई दवाइयों को छिपाने की कोशिश भी की। हालांकि, परिजनों के पास एक पर्ची मौजूद है, जिसमें लिखी दवाओं को लेकर संदेह जताया जा रहा है।
परिवार के अनुसार, बच्चे के माता-पिता दिल्ली में मजदूरी करते हैं और वह अपने दादा-दादी के साथ महाराजपुर में रहता है। इस घटना के बाद परिवार में दहशत का माहौल है। परिजन मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्र में कथित झोलाछाप डॉक्टरों की सक्रियता और उनके खिलाफ निगरानी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यदि जांच में लापरवाही या अवैध चिकित्सा प्रैक्टिस की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल जिला अस्पताल में चिकित्सकों की टीम बच्चे की हालत पर नजर बनाए हुए है। प्रशासनिक स्तर पर भी मामले की जांच की तैयारी की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।