शिवपुरी जिले का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक किसान ने अपनी कर्ज की समस्या से निपटने के लिए खुद का अपहरण करवा लिया और अपने बेटे से 6 लाख की फिरौती मांगने की साजिश रच डाली। यह मामला तब उजागर हुआ जब पुलिस ने 24 घंटे के भीतर अपहरण की झूठी कहानी को न केवल सुलझाया, बल्कि अपहरण की साजिश रचने वाले किसान को गिरफ्तार भी कर लिया।

घटना की शुरुआत
खोरयार गांव के रहने वाले होतम यादव (50) का परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। होतम यादव के बेटे साहब सिंह ने पुलिस को सूचित किया कि उनके पिता का अपहरण कर लिया गया है और अपहर्ताओं ने 6 लाख रुपये की फिरौती मांगी है। साहब सिंह ने यह भी बताया कि उनके पिता ने स्वयं फोन कर कहा कि उन्हें सतनवाड़ा के जंगलों में बंधक बना लिया गया है और उनकी मारपीट की जा रही है। यह जानकारी सुनकर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई शुरू की और मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच टीम गठित की।
पुलिस की जांच और संदिग्ध व्यवहार
पुलिस ने सबसे पहले अपहरण की रिपोर्ट की जांच शुरू की। इस दौरान पुलिस को होतम यादव के छोटे बेटे राजेंद्र यादव पर शक हुआ। राजेंद्र के आचरण को लेकर ग्रामीणों से पूछताछ की गई और उसके व्यवहार में कुछ संदिग्धता पाई गई। जब पुलिस ने राजेंद्र की मोबाइल लोकेशन ट्रेस की, तो वह भुसावल (महाराष्ट्र) के बजाय शिवपुरी में पाई गई। इससे पुलिस का शक और गहरा गया।
पुलिस ने जब राजेंद्र को गिरफ्तार किया, तो सच्चाई सामने आ गई। राजेंद्र ने अपने पिता से रेलवे में नौकरी के नाम पर 14 लाख रुपये उधार लिए थे, और वह पिछले छह महीने से शिवपुरी में किराए के कमरे में छिपकर रह रहा था।

कर्ज से परेशान किसान ने रची साजिश
होतम यादव ने पुलिस को बताया कि राजेंद्र ने उसे रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर 14 लाख रुपये लिए थे, जो वह रिश्तेदारों से कर्ज लेकर देने को मजबूर हुआ था। लेकिन राजेंद्र ने जब पैसे देना बंद कर दिया और यह भी सामने आया कि उसकी नौकरी नहीं लगी, तो होतम यादव पर कर्ज चुकाने का दबाव बढ़ने लगा। कर्जदार उससे पैसे की मांग कर रहे थे, जिससे बचने के लिए होतम यादव ने खुद का अपहरण करवाने की योजना बनाई।
झूठी साजिश का खुलासा
होतम यादव ने खुद के अपहरण की झूठी कहानी गढ़ी थी ताकि वह अपने बेटे राजेंद्र पर दबाव बना सके और कर्ज वसूलने के लिए उसे पैसे वापस दिलवा सके। होतम यादव ने अपने बेटे से 6 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। लेकिन पुलिस की मुस्तैदी और छानबीन के बाद यह साजिश बेनकाब हो गई। पुलिस ने होतम यादव को झिरना सरकार मंदिर के पास सोते हुए गिरफ्तार किया, जहां वह पुजारी के पास छिपा हुआ था।
बेटे की शादी और नौकरी का झूठ
जांच में यह भी सामने आया कि राजेंद्र ने फर्जी नौकरी का बहाना बनाकर पैसे ऐंठे थे। वह सरकारी नौकरी चाहता था ताकि उसकी शादी एक अच्छी लड़की से हो सके, लेकिन नौकरी नहीं मिलने पर उसने यह झूठ बोला कि उसे रेलवे में नौकरी मिल गई है और इसी बहाने अपने पिता से 14 लाख रुपये ले लिए।

यह मामला दर्शाता है कि आर्थिक संकट और व्यक्तिगत समस्याओं के चलते कुछ लोग गलत रास्ते अपनाने को मजबूर हो जाते हैं। होतम यादव ने कर्ज से छुटकारा पाने के लिए जो तरीका अपनाया, वह न केवल कानून के खिलाफ था, बल्कि परिवार के रिश्तों पर भी नकारात्मक असर डालने वाला था। पुलिस ने समय रहते मामले का खुलासा कर दिया और आरोपी किसान को गिरफ्तार कर लिया।
यह घटनाक्रम हमें यह सिखाता है कि किसी भी समस्या से जूझते समय सच्चाई और सही रास्ते को अपनाना सबसे अच्छा विकल्प होता है।