दमोह जिले के ग्राम भदोली में रविवार को एक ऐतिहासिक पहल देखने को मिली, जब लगभग 400 वर्ष पुरानी बावड़ी की सूरत बदलने के लिए व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया गया। वर्षों से उपेक्षित पड़ी इस ऐतिहासिक जल धरोहर को संवारने के लिए न सिर्फ युवाओं की टीम आगे आई, बल्कि स्वयं कलेक्टर सुधीर कोचर भी अभियान में शामिल हुए और युवाओं के साथ श्रमदान कर समाज को सकारात्मक संदेश दिया।
इस अभियान की अगुवाई ‘टीम उम्मीद’ ने की, जिसने बावड़ी की सफाई और संरक्षण की जिम्मेदारी उठाई। नगर पालिका के ब्रांड एंबेसडर हरीश पटेल के नेतृत्व में युवाओं की टीम रविवार सुबह ही सफाई उपकरणों के साथ बावड़ी परिसर में पहुंच गई। युवाओं के जोश और समर्पण को देखकर ग्राम भदोली के सरपंच सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण भी अभियान से जुड़ गए।
दो घंटे की मेहनत से बदली बावड़ी की तस्वीर
करीब दो घंटे से अधिक समय तक चले इस स्वच्छता अभियान में बावड़ी के भीतर जमी गंदगी, झाड़ियां और वर्षों से जमा कचरे को हटाया गया। सफाई कार्य में स्थानीय ग्रामीण भी कंधे से कंधा मिलाकर जुटे रहे। सामूहिक प्रयास से बावड़ी का काफी हिस्सा साफ किया गया, जिससे इसकी ऐतिहासिक संरचना एक बार फिर दिखाई देने लगी।
ग्रामीणों का भरोसा हुआ मजबूत

ग्रामीणों ने ‘टीम उम्मीद’ की इस पहल की जमकर सराहना की। उनका कहना था कि इससे पहले भी कई लोग बावड़ी की सफाई के वादे कर चुके थे, लेकिन काम अधूरा छोड़कर चले गए। शुरू में ग्रामीणों को इस अभियान पर भरोसा नहीं था, लेकिन जब उन्होंने हरीश पटेल की टीम के साथ स्वयं कलेक्टर को श्रमदान करते देखा, तो उनका भरोसा पक्का हो गया और वे पूरे उत्साह के साथ अभियान में शामिल हो गए।
ऐतिहासिक धरोहर को मिलेगा नया जीवन
कलेक्टर सुधीर कोचर ने बताया कि जिले में 1 फरवरी से ‘गंगा जल संवर्धन अभियान’ की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य जल स्रोतों का संरक्षण और पुनर्जीवन करना है। उन्होंने कहा कि भदोली की इस ऐतिहासिक बावड़ी को बांदकपुर की बावड़ी की तर्ज पर पूरी तरह सुरक्षित और संरक्षित किया जाएगा। आने वाले दो से तीन महीनों में यह बावड़ी अपने मूल स्वरूप और ऐतिहासिक वैभव में लौटेगी।
शहर से गांव तक पहुंची टीम उम्मीद

यह ‘टीम उम्मीद’ का लगातार 13वां साप्ताहिक स्वच्छता अभियान था। अब तक शहरी क्षेत्रों में सक्रिय रहने वाली यह टीम अब ग्रामीण इलाकों की ऐतिहासिक और जल धरोहरों को बचाने के लिए गांवों तक पहुंच चुकी है। टीम का उद्देश्य केवल सफाई तक सीमित नहीं, बल्कि समाज में स्वच्छता, जल संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता फैलाना भी है।
इस अभियान ने यह साबित कर दिया कि जब प्रशासन, युवा और ग्रामीण मिलकर काम करते हैं, तो वर्षों से उपेक्षित पड़ी ऐतिहासिक धरोहरों को भी नया जीवन मिल सकता है।