कलेक्टर संदीप जी.आर. के निर्देशन में किसानों के फसल गिरदावरी सत्यापन और उपार्जन प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई !

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कृषि क्षेत्र में सुधार और किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य दिलाने के लिए कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. ने जिले के सभी राजस्व अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य किसानों के हित में फसल गिरदावरी प्रक्रिया को सटीक और पारदर्शी तरीके से लागू करना है, ताकि उपार्जन के समय कोई भी समस्या उत्पन्न न हो और किसानों को उचित मूल्य मिल सके।

कलेक्टर द्वारा दिए गए निर्देश

कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. ने जिले के सभी राजस्व अधिकारियों को आदेशित किया है कि वे जिले के विभिन्न गांवों में जाकर किसानों की फसलों की गिरदावरी का निरीक्षण करें। गिरदावरी सत्यापन में किसानों से मिलकर उनकी फसल की स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। इसके अलावा, प्रशासनिक अधिकारियों को किसानों से संवाद स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े और उनकी समस्याओं का समाधान तत्परता से किया जा सके।

कलेक्टर के आदेश के बाद जिले के विभिन्न क्षेत्रों में गिरदावरी निरीक्षण का कार्य शुरू किया गया है। सिटी मजिस्ट्रेट श्रीमती जूही गर्ग ने जैसीनगर और राहतगढ़ क्षेत्रों का निरीक्षण किया, वहीं संयुक्त कलेक्टर श्रीमती आरती यादव ने केसली और देवरी क्षेत्रों में गिरदावरी की जांच की। इसी प्रकार, डिप्टी कलेक्टर श्री विजय डेहरिया ने माल्थोन और बांदरी क्षेत्रों का दौरा किया, और डिप्टी कलेक्टर श्री नवीन ठाकुर सिंह ठाकुर ने बंडा और शाहगढ़ में गिरदावरी का निरीक्षण किया। सभी एसडीएम अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों से मिलकर गिरदावरी का कार्य कर रहे हैं।

गिरदावरी प्रक्रिया का महत्व और लाभ

कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. ने बताया कि गिरदावरी सत्यापन से किसानों को उपार्जन के दौरान किसी भी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा और उनका फसल शीघ्र उपार्जित किया जा सकेगा। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य किसानों की फसलों का सही तरीके से रिकॉर्ड बनाना है ताकि बाद में उन्हें फसल का उचित मूल्य मिल सके और सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश भू अभिलेख नियमावली के तहत फसल गिरदावरी का कार्य साल में तीन बार—खरीफ, रबी और जायद—किया जाता है। यह प्रक्रिया सभी सरकारी योजनाओं, जैसे कि उपार्जन और फसल बीमा योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण होती है।

डिजिटल क्रॉफ्ट सर्वे और पारदर्शिता

कलेक्टर ने यह भी बताया कि गिरदावरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए भारत सरकार द्वारा डिजिटल क्रॉफ्ट सर्वे की शुरुआत की गई है। इसके तहत प्रत्येक मौसम के लिए फसल सर्वेक्षण का कार्य 45 दिनों की कार्य अवधि में किया जाता है। इस तकनीक में जियो फैंस पार्सल लेवल तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिसके माध्यम से खेतों में बोई गई फसलों का फोटो लिया जाता है और सर्वेक्षण कार्य नियमित अंतराल पर अपडेट किया जाता है।

इस प्रणाली से गिरदावरी प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना को कम किया जाता है और किसान को सही जानकारी मिलती है।

एमपी किसान एप का महत्व

कलेक्टर ने यह भी बताया कि एमपी किसान एप के माध्यम से किसान अपने फसलों की गिरदावरी की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। किसान इस एप को प्ले स्टोर से डाउनलोड कर अपने मोबाइल पर लॉगिन कर सकते हैं। ओटीपी के माध्यम से वे अपनी फसलों की स्व-घोषणा दर्ज कर सकते हैं और साथ ही जियो फैंस तकनीक के माध्यम से फसल का फोटो अपलोड कर सकते हैं।

इस एप के माध्यम से किसान यदि अपनी फसल के संबंध में कोई दावा या आपत्ति दर्ज करना चाहते हैं, तो वह भी आसानी से कर सकते हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल होने के कारण पारदर्शिता और तेज़ी से काम करने में मदद करती है।

कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. द्वारा की गई इस पहल से किसानों को कई फायदे होंगे। न केवल उपार्जन प्रक्रिया सुचारू होगी, बल्कि डिजिटल तकनीक की मदद से फसल गिरदावरी में पारदर्शिता भी आएगी। किसानों को उनके फसल के वास्तविक मूल्य का मिलना सुनिश्चित होगा और उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

यह कदम किसानों के लिए एक सकारात्मक बदलाव साबित हो सकता है, और उम्मीद की जाती है कि इससे मध्यप्रदेश के कृषि क्षेत्र में और सुधार होगा।

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