जम्मू-कश्मीर, 8 सितंबर 2025: जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में सोमवार सुबह सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादी मारे गए। इस ऑपरेशन को ‘ऑपरेशन गुड्डर’ नाम दिया गया है। मुठभेड़ के दौरान एक जूनियर कमीशंड ऑफिसर (JCO) सहित दो जवान घायल हुए हैं। मारे गए आतंकियों में से एक की पहचान शोपियां निवासी आमिर अहमद डार के रूप में हुई है, जो 2025 के पहलगाम हमले से जुड़ी 14 आतंकवादियों की सूची में शामिल था। उधर, जम्मू के आरएस पुरा सेक्टर में रविवार रात सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने एक पाकिस्तानी घुसपैठिए, सिराज खान, को गिरफ्तार किया। कुलगाम में मुठभेड़ अभी जारी है, और जंगल में तीन से अधिक आतंकियों के छिपे होने की आशंका है।

ऑपरेशन गुड्डर: कुलगाम में मुठभेड़ का विवरण
सोमवार सुबह कुलगाम जिले के गुड्डर क्षेत्र के घने जंगलों में जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना की 9 राष्ट्रीय राइफल्स (9RR), और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की संयुक्त टीम ने आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी के आधार पर तलाशी अभियान शुरू किया। जैसे ही सुरक्षा बल संदिग्ध स्थान पर पहुंचे, जंगल में छिपे आतंकवादियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी। जवानों ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की, जिसके परिणामस्वरूप दो आतंकवादी मारे गए।
मारे गए आतंकियों में से एक की पहचान आमिर अहमद डार के रूप में हुई, जो शोपियां का रहने वाला था और सितंबर 2023 से लश्कर-ए-तैयबा के लिए सक्रिय था। वह 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम हमले से जुड़ा था, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे। पुलिस के अनुसार, आमिर उन 14 आतंकवादियों की सूची में शामिल था, जिन्हें पहलगाम हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने चिह्नित किया था। दूसरे आतंकी की पहचान अभी नहीं हो सकी है।
मुठभेड़ में एक JCO और एक अन्य जवान घायल हो गए, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस और सेना के अनुसार, जंगल में अभी भी तीन से अधिक आतंकवादी छिपे हो सकते हैं, और गोलीबारी जारी है। अतिरिक्त सुरक्षा बलों को इलाके में भेजा गया है, और तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है।
आरएस पुरा में घुसपैठिया गिरफ्तार
इसी बीच, जम्मू के आरएस पुरा सेक्टर में रविवार रात 9:20 बजे BSF ने एक पाकिस्तानी घुसपैठिए को गिरफ्तार किया। उसकी पहचान सिराज खान के रूप में हुई, जो पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा का निवासी है। BSF जवानों ने उसे ऑक्ट्रोई चौकी के पास अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बॉर्डर फेंसिंग के निकट देखा। कुछ राउंड चेतावनी फायरिंग के बाद उसे हिरासत में ले लिया गया। उसके पास से पाकिस्तानी मुद्रा और कुछ अन्य सामान बरामद हुआ है।
BSF और अन्य सुरक्षा एजेंसियां सिराज खान से पूछताछ कर रही हैं ताकि उसकी घुसपैठ के मकसद और संभावित आतंकी कनेक्शन का पता लगाया जा सके। यह घटना जम्मू-कश्मीर में बढ़ती घुसपैठ की कोशिशों को दर्शाती है, जिसके खिलाफ सुरक्षा बल लगातार सतर्क हैं।
हाल के ऑपरेशन: गुरेज और कुलगाम में कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ बड़े ऑपरेशन चलाए गए हैं। हाल ही में हुए दो अन्य ऑपरेशनों ने भी सुरक्षा बलों की सक्रियता को दर्शाया है:
- गुरेज सेक्टर में मुठभेड़ (26 अगस्त 2025): गुरेज सेक्टर में हुई मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए थे, जिनमें से एक की पहचान बागू खान के रूप में हुई। उसे ‘ह्यूमन GPS’ के नाम से जाना जाता था, क्योंकि वह 1995 से 100 से अधिक घुसपैठ की कोशिशों में शामिल था। बागू खान घुसपैठ के सभी रास्तों से वाकिफ था और बिना पकड़े कई ऑपरेशन अंजाम दे चुका था।
- ऑपरेशन अखल, कुलगाम (1-12 अगस्त 2025): कुलगाम के अखल क्षेत्र में 12 दिन तक चले ऑपरेशन अखल में लश्कर-ए-तैयबा के एक आतंकवादी हारिस डार को मार गिराया गया था। वह पुलवामा का निवासी था और कई आतंकी गतिविधियों में शामिल था। यह ऑपरेशन जम्मू-कश्मीर में हाल के सबसे लंबे ऑपरेशनों में से एक थ
पहलगाम हमले से बढ़ा दबाव
22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था, जिसमें 26 नागरिकों की मौत हुई थी। इस हमले की जिम्मेदारी द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी, जो लश्कर-ए-तैयबा का एक प्रॉक्सी संगठन माना जाता है। हमले के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए गए। कुलगाम में मौजूदा मुठभेड़ भी इसी तरह की कार्रवाइयों का हिस्सा है, जिसका मकसद आतंकी नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना है।

सुरक्षा बलों की चुनौतियां और रणनीति
कुलगाम के घने जंगलों में आतंकवादियों का छिपना और उनकी गोलीबारी की रणनीति सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती है। लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठन स्थानीय और विदेशी आतंकवादियों का उपयोग कर जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। सुरक्षा बलों ने ड्रोन और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग शुरू किया है ताकि जंगल जैसे दुर्गम इलाकों में आतंकियों का पता लगाया जा सके।
आरएस पुरा में घुसपैठ की घटना से यह भी साफ है कि सीमा पार से आतंकी गतिविधियों को समर्थन मिल रहा है। सिराज खान जैसे घुसपैठियों से पूछताछ से सुरक्षा बलों को और महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है, जो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद करेगी।
निष्कर्ष
कुलगाम में ऑपरेशन गुड्डर और आरएस पुरा में घुसपैठिया की गिरफ्तारी जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की लगातार सक्रियता को दर्शाती है। लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए BSF की सतर्कता से यह साफ है कि भारत आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, घायल जवानों और आतंकियों की मौजूदगी से यह भी स्पष्ट है कि चुनौतियां अभी बाकी हैं। कुलगाम में मुठभेड़ और आरएस पुरा में पूछताछ के नतीजे आने वाले दिनों में क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को और स्पष्ट करेंगे। प्रशासन और सुरक्षा बलों से उम्मीद है कि वे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और सख्त कदम उठाएंगे।