कृषि विज्ञान केंद्र, सागर (देवरी) द्वारा दिनांक 12 फरवरी 2025 को रहली, देवरी, केसली, जैसीनगर एवं राहतगढ़ विकासखंडों के कृषि विस्तार अधिकारियों के लिए रवि फसलों में पौध संरक्षण विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि अधिकारियों को कीट-व्याधि प्रबंधन, प्राकृतिक एवं जैविक कृषि पद्धतियों की नवीन जानकारियों से अवगत कराना रहा।
प्रशिक्षण में डॉ. आशीष त्रिपाठी ने रवि फसलों में लगने वाले प्रमुख कीटों एवं रोगों की पहचान तथा उनके प्रभावी नियंत्रण के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने रासायनिक नियंत्रण से पूर्व जैविक एवं भौतिक नियंत्रण विधियों को अपनाने पर जोर दिया। साथ ही एक समय में एक ही रसायन के छिड़काव, पूर्व-मिश्रित फफूंदनाशी एवं कीटनाशकों के सुरक्षित एवं सही उपयोग की जानकारी दी।
डॉ. त्रिपाठी ने प्राकृतिक कृषि पद्धति के अंतर्गत प्रति हेक्टेयर 8 से 10 क्विंटल घनजीवामृत के उपयोग, तीन से चार बार जीवामृत का छिड़काव, मल्चिंग तथा फसल संरक्षण के उपायों पर भी प्रकाश डाला।


कार्यक्रम में उपसंचालक कृषि श्री राजेश त्रिपाठी ने जिले में प्रारंभ किए जा रहे जैविक हाट बाजार की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की और इसे सफल बनाने की रणनीति पर चर्चा की। वहीं परियोजना संचालक आत्मा श्री एम.के. प्रजापति ने प्राकृतिक कृषि क्लस्टरों में की जाने वाली गतिविधियों एवं उनके व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर विचार रखे।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में अनुविभागीय अधिकारी कृषि श्री अनिल राय, श्री अंकित रावत, श्री ए.आर. मेणा एवं श्री जयदत्त शर्मा ने भी विभिन्न समसामयिक कृषि विषयों पर उपयोगी जानकारी साझा की।
कार्यक्रम में एस.के. जैन, श्री जे. विश्वकर्मा, श्री कमल करते, श्री शैलेश पांडे, श्री लोकेंद्र जाटव, श्री दिनेश अहिरवार सहित जिले के कुल 42 कृषि विस्तार अधिकारियों ने सहभागिता की।