कोरोना में छूटी नौकरी, हौसले ने बदली तक़दीर: सागर के दिव्यांश खत्री बने रोजगार देने वाले युवा उद्यमी !

Spread the love

सागर।
कहते हैं कि हालात चाहे कितने ही मुश्किल क्यों न हों, अगर इंसान हिम्मत और सही सोच के साथ आगे बढ़े तो रास्ते खुद-ब-खुद निकल आते हैं। सागर के 28 वर्षीय दिव्यांश खत्री की कहानी इसी कहावत को सच साबित करती है। कोरोना महामारी के दौरान फाइव स्टार होटल की नौकरी छूटने के बाद जहां कई युवा टूट गए, वहीं दिव्यांश ने इस संकट को अवसर में बदलते हुए न केवल खुद का सफल व्यवसाय खड़ा किया, बल्कि आज 10 से अधिक लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।

फाइव स्टार होटल का सपना और अचानक टूटा सहारा

दिव्यांश खत्री का सपना बचपन से ही बड़े फाइव स्टार होटलों में काम करने का था। इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने 12वीं के बाद जयपुर से होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया। पढ़ाई पूरी होते ही उन्हें गोवा के एक फाइव स्टार होटल में नौकरी मिल गई। करीब 5 लाख रुपये सालाना पैकेज के साथ उनका करियर शानदार शुरुआत करता नजर आ रहा था।
लेकिन महज दो महीने बाद ही देश में कोरोना महामारी फैल गई। लॉकडाउन के चलते होटल इंडस्ट्री पूरी तरह ठप हो गई और कर्मचारियों की छंटनी शुरू हो गई। इसी दौरान दिव्यांश को भी नौकरी से हाथ धोना पड़ा और वे मजबूरी में सागर लौट आए।

बेरोजगारी से जूझते हुए सूझा नया विचार

सागर लौटने के बाद अगले दो साल दिव्यांश के लिए बेहद कठिन रहे। बेरोजगारी, भविष्य की चिंता और रोजमर्रा के खर्चों ने उन्हें मानसिक रूप से काफी परेशान किया। लेकिन इसी दौर में उन्होंने बाजार की जरूरतों को गहराई से समझना शुरू किया।
उन्होंने देखा कि ब्रेड, बिस्कुट और पाव जैसे खाद्य पदार्थों की मांग हर समय बनी रहती है, वहीं बाजार में उपलब्ध अधिकांश उत्पाद मैदे से बने होते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हैं। यहीं से उनके मन में गेहूं से बने हेल्दी ब्रेड और बिस्कुट तैयार करने का विचार आया।

यूट्यूब बना गुरु, सरकार बनी सहारा

दिव्यांश ने यूट्यूब के जरिए गेहूं से ब्रेड, बिस्कुट और पाव बनाने की तकनीक सीखी। हालांकि सबसे बड़ी चुनौती थी पूंजी, क्योंकि मशीनें और सेटअप महंगे थे।
इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि केंद्र सरकार पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं के लिए स्वरोजगार योजनाएं चला रही है। उन्होंने सागर के उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया, जहां उन्हें प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के बारे में बताया गया।

योजना के तहत दिव्यांश ने आवेदन किया और उन्हें 10 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इसी राशि से उन्होंने अपना फूड प्रोसेसिंग प्लांट शुरू किया।

आज बने मिसाल, 10 से ज्यादा लोगों को रोजगार

आज दिव्यांश खत्री का फूड प्रोसेसिंग प्लांट सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। यहां 10 से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार मिला हुआ है। गेहूं से बने ब्रेड, बिस्कुट और पाव की स्थानीय बाजार में अच्छी मांग है।
उनकी सालाना कमाई अब 10 लाख रुपये से अधिक हो चुकी है और वे अपने व्यवसाय को और विस्तार देने की योजना बना रहे हैं।

युवाओं के लिए प्रेरणा

दिव्यांश कहते हैं, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन खुद का उद्योग शुरू करूंगा और दूसरों को रोजगार दूंगा। अगर समय रहते सही फैसला लिया जाए और सरकारी योजनाओं की जानकारी हो, तो बेरोजगारी को भी सफलता में बदला जा सकता है।”

दिव्यांश खत्री की यह कहानी आज के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो यह सिखाती है कि कठिन हालात भी अगर सही सोच और मेहनत से सामना किए जाएं, तो वही हालात कामयाबी की नींव बन सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *