13 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, कई शहरों में सड़कों पर पानी भरने से जनजीवन प्रभावित
भोपाल/खंडवा। मध्यप्रदेश में मानसून इन दिनों अपने पूरे तेवर में है। गुरुवार को खंडवा जिले के खरखरी गांव में बारिश के बीच गणेश पांडाल पर अचानक बिजली गिरने से बड़ा हादसा हो गया। इसमें एक नाबालिग की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य बच्चे झुलस गए। हादसा उस वक्त हुआ जब चारों बच्चे बारिश से बचने के लिए पांडाल में रुके थे।
इधर, मौसम विभाग ने शुक्रवार को प्रदेश के 13 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें धार, अलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला और बालाघाट शामिल हैं। यहां ढाई से साढ़े चार इंच तक बारिश दर्ज हो सकती है।

भोपाल-इंदौर-रायसेन में जलभराव
गुरुवार को हुई भारी बारिश से राजधानी भोपाल की सड़कों पर जगह-जगह पानी भर गया। पीएचक्यू के पीछे छोटा तालाब किनारे की सड़क पर पानी जमा होने से लंबा जाम लग गया। पुराने शहर में भी कई इलाकों में जलभराव जैसे हालात बन गए।
इसी तरह इंदौर और रायसेन में भी पानी भरने से सड़कों पर तालाब जैसे दृश्य नजर आए। रायसेन में पौने 2 इंच और छिंदवाड़ा में सवा इंच पानी गिरा।

डैम के गेट खोले, नदी-नाले उफान पर
तेज बारिश के चलते धार जिले के मनावर में मान डैम के दो गेट खोलने पड़े। कई छोटे-बड़े नालों में पानी का बहाव तेज हो गया। मंडला, उमरिया, छतरपुर और टीकमगढ़ जैसे जिलों में पहले ही बाढ़ जैसे हालात बन चुके हैं।

गुना और मंडला सबसे आगे, इंदौर संभाग पिछड़ा
इस सीजन में अब तक सबसे ज्यादा बारिश गुना जिले में दर्ज हुई है, जहां 53.8 इंच पानी गिर चुका है। मंडला में भी 53.3 इंच, अशोकनगर में 50.9 इंच, शिवपुरी में 50.1 इंच और श्योपुर में 50.2 इंच बारिश हो चुकी है।
इसके उलट इंदौर संभाग के पांच जिले सबसे कम बारिश वाले जिलों की सूची में हैं। इंदौर में अब तक औसतन 17.8 इंच बारिश दर्ज हुई है, जबकि खरगोन में 19.5, बड़वानी में 20.5, बुरहानपुर में 20.1 और खंडवा में 20.9 इंच पानी गिरा है।
औसत से ज्यादा बरसा मानसून
16 जून को मानसून की दस्तक के बाद से अब तक प्रदेश में औसतन 36.2 इंच पानी गिर चुका है, जबकि सामान्य बारिश 29.6 इंच होनी चाहिए थी। यानी इस बार अब तक 6.6 इंच ज्यादा बारिश हो चुकी है।
प्रदेश की सामान्य बारिश का कोटा 37 इंच है, जिसमें से अब तक 90 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। सिर्फ 0.8 इंच और पानी गिरने के बाद कोटा पूरा हो जाएगा।

ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग बेहतर
प्रदेश के पूर्वी हिस्से – जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग – में मानसून जमकर बरसा है। यहां कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने।
ग्वालियर-चंबल संभाग में भी इस बार मानसून सक्रिय रहा। यहां के 8 जिलों में से 7 में औसत से ज्यादा पानी गिर चुका है। ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना और श्योपुर में बारिश ने रिकॉर्ड तोड़े, जबकि दतिया में भी 96 प्रतिशत से ज्यादा बारिश दर्ज हो चुकी है।

पुराने रिकॉर्ड पर नजर
- इंदौर : अगस्त 1944 में 28 इंच बारिश का रिकॉर्ड। 2020 में 24 घंटे में 10.5 इंच पानी गिरा था।
- ग्वालियर : अगस्त 1927 में 24 घंटे में 8.5 इंच बारिश। अगस्त 1916 में 28 इंच मासिक बारिश।
- जबलपुर : 1923 में अगस्त में 44 इंच पानी गिरा। उसी साल 20 अगस्त को 24 घंटे में 13 इंच बारिश दर्ज।
- उज्जैन : 2006 में अगस्त महीने में 35 इंच बारिश हुई थी। इसी साल 10 अगस्त को एक दिन में 12 इंच पानी गिरा था।