मध्य प्रदेश के खंडवा शहर में गुरुवार रात को आयोजित एक मशाल जुलूस के दौरान भीषण आग लग गई, जिससे 50 से ज्यादा लोग झुलस गए। यह घटना रात 11 बजे के आसपास शहर के घंटाघर पर हुई, जब जुलूस का समापन हो रहा था। आग लगने से भगदड़ मच गई और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। कई लोग आग की चपेट में आ गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

घटना का विवरण
खंडवा में राष्ट्र भक्त वीर युवा मंच द्वारा आतंकवाद के खिलाफ एक मशाल जुलूस का आयोजन किया गया था। इस जुलूस का नेतृत्व हिंदूवादी नेता अशोक पालीवाल कर रहे थे, जबकि भा.ज.पा के विधायक टी राजा और नाजिया खान, जो पश्चिम बंगाल भाजपा की प्रवक्ता हैं, ने इस कार्यक्रम को संबोधित किया था। कार्यक्रम के अंतर्गत 26/11 के आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी गई।
मशाल जुलूस बड़ाबम चौक से शुरू होकर घंटाघर चौक की ओर बढ़ रहा था। जुलूस में हजारों लोग शामिल थे, और लगभग 200 मशाल जलाए गए थे। कार्यक्रम के समापन के दौरान कुछ मशालें अचानक उलटी हो गईं। इन मशालों में जो बुरादा, कपूर और तेल का मिश्रण था, उससे आग भड़क उठी और आसपास खड़े लोग आग की चपेट में आ गए।

आग का कारण और प्रभाव
आग भड़कने की मुख्य वजह मशालों में इस्तेमाल किए गए तेल और बुरादे का मिश्रण था। एक युवक, जो मशाल के लिए सामग्री तैयार कर रहा था, ने बताया कि मशाल को लंबे समय तक जलाए रखने के लिए उसमें डिजल भी मिलाया गया था। इसकी वजह से आग काफी तेज भड़की। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के बीच इस मिश्रण को तैयार किया जा रहा था, लेकिन कोई भी व्यक्ति इसे रोकने का प्रयास नहीं कर रहा था।
खंडवा एसपी मनोज राय ने घटना का विवरण देते हुए कहा कि मशालों के गिरने और उनके मिश्रण से आग भड़क गई। इसके कारण लोगों के चेहरे और हाथ झुलस गए। एसपी के अनुसार, घटना में कुल 30 लोग घायल हुए, जिनमें से 12 को अस्पताल में भर्ती किया गया।
घायलों की स्थिति और अस्पताल में इलाज
घायल लोगों को तुरंत जिला अस्पताल लाया गया। अस्पताल पहुंचने के बाद अधिकारियों ने घायलों से बातचीत की और घटना की जानकारी ली। एक घायल महिला ने बताया कि वह अपने बच्चों के साथ मशाल जुलूस में शामिल होने आई थी। अचानक किसी के हाथ से मशाल गिर गई और आग भड़कने लगी। लोग भागते हुए गिर गए और एक दूसरे पर चढ़ते गए, जिससे घायलों की संख्या और बढ़ गई।
एक अन्य घायल ने बताया, “हम मशाल ले कर खड़े थे, तभी अचानक आग भड़क गई। हाथ में मशाल थी, जिसे फेंककर हम भागे, लेकिन चेहरे और हाथ झुलस गए। जलन हो रही है।”

मशाल जुलूस और पुलिस की भूमिका
इस घटना में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने मशाल जुलूस के दौरान ज्वलनशील सामग्री के इस्तेमाल को लेकर कोई रोक क्यों नहीं लगाई। मशाल के लिए लकड़ी का बुरादा, कपूर और डीजल मिलाया गया था, जिससे आग का फैलाव बढ़ने की पूरी संभावना थी। घटना के दौरान पुलिसकर्मी भी मौके पर मौजूद थे, लेकिन उन्होंने यह सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया को रोकने का प्रयास नहीं किया।
मशाल जुलूस में एक हजार मशालें थीं, लेकिन केवल 200 ही जल पाईं। इसके बाद आग के फैलने से भगदड़ मच गई, जिससे घायलों की संख्या बढ़ गई।
घटना की जांच और प्रशासनिक कदम
घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए घायलों का इलाज शुरू करवा दिया और घटना की जांच प्रारंभ कर दी। पुलिस ने जुलूस के आयोजकों और उपस्थित पुलिस अधिकारियों से बयान लिए और घटना की गहराई से जांच शुरू की।
खंडवा प्रशासन ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं और भविष्य में इस तरह की घटना से बचने के लिए मशाल जुलूसों में सुरक्षा उपायों को सख्त करने की योजना बनाई है।

घायलों के बयान और राहत कार्य
अस्पताल में भर्ती घायलों ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि अचानक से आग भड़कने से अफरा-तफरी मच गई। लोग एक-दूसरे पर गिरते गए और उन्हें बचाने के लिए कुछ भी नहीं किया जा सका। राहत कार्य के दौरान प्रशासन ने घायल व्यक्तियों को प्राथमिक चिकित्सा दी और जिनकी हालत गंभीर थी, उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया।
निष्कर्ष
खंडवा में हुए इस घटना ने सुरक्षा के गंभीर सवाल उठाए हैं। जिस प्रकार से मशाल जुलूस में ज्वलनशील सामग्री का इस्तेमाल किया गया और पुलिस की मौजूदगी में कोई सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए गए, यह चिंताजनक है। प्रशासन को इस घटना से सीख लेते हुए भविष्य में इस प्रकार के आयोजनों की सुरक्षा कड़ी करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
इसके अलावा, यह घटना यह भी दर्शाती है कि बड़ी संख्या में लोगों को एकत्रित करते समय सुरक्षा और खतरे की संभावना को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। प्रशासन और पुलिस को इन कार्यक्रमों की उचित निगरानी करनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रत्याशित स्थिति से निपटा जा सके।