खजुराहो में युवती की अनोखी साधना: सिर पर जबारे बोकर 16 दिनों से तप में लीन, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ !

Spread the love

मध्यप्रदेश के खजुराहो क्षेत्र में चैत्र नवरात्रि के दौरान एक युवती की अनोखी साधना इन दिनों आस्था और आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। 19 वर्षीय नैनसी देवी पटेल द्वारा की जा रही यह कठोर तपस्या बागेश्वर धाम से करीब 13 किलोमीटर दूर रामघाट धाम के पास स्थित श्री सिद्धेश्वर आश्रम में चल रही है। इस साधना को देखने और इसके दर्शन करने के लिए दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन यहां पहुंच रहे हैं।

नैनसी देवी ने नवरात्रि प्रारंभ होने से छह दिन पहले ही अन्न और जल का त्याग कर दिया था और कठिन तपस्या में लीन हो गईं। वर्तमान में उन्हें इस साधना करते हुए 16 दिन हो चुके हैं। वे एक ही आसन पर बैठकर अपने सिर पर जबारे (जौ के अंकुर) बोए हुए हैं, जो धार्मिक आस्था और शक्ति का प्रतीक माने जाते हैं। परिजनों के अनुसार, यह साधना अत्यंत कठिन होती है और इसे पूर्ण श्रद्धा, अनुशासन और मानसिक दृढ़ता के साथ ही किया जा सकता है।

नैनसी के परिजन रुपकिशोर पटेल ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से भी कड़े नियमों का पालन कर रही हैं। इस दौरान उन्होंने अपने जीवन में सादगी और संयम अपनाया है। वे सामान्य दिनों में भी दिन में केवल एक बार अपने हाथों से बना भोजन ग्रहण करती हैं। इस बार नवरात्रि में उन्होंने और अधिक कठिन तपस्या का संकल्प लिया और सिर पर जबारे बोकर साधना शुरू की, जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है।

आश्रम परिसर में इस साधना के दौरान भक्तों की भारी भीड़ देखी जा रही है। लोग इसे देवी की विशेष कृपा और चमत्कार के रूप में देख रहे हैं। श्रद्धालु माता के जयकारों के साथ नैनसी देवी के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य मान रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का मानना है कि ऐसी साधना बहुत कम देखने को मिलती है और यह क्षेत्र के लिए गौरव की बात है।

इस साधना के साथ ही आश्रम से जुड़ी एक और खास बात भी लोगों के बीच चर्चा में है। स्थानीय श्रद्धालुओं का दावा है कि यहां उपलब्ध जड़ी-बूटियों से कई गंभीर बीमारियों में लाभ मिल रहा है। बताया जा रहा है कि पिछले दो वर्षों से आश्रम में कुछ दुर्लभ औषधियां उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिनसे लकवा, लीवर संबंधी रोग, कैंसर और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं में राहत मिली है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बड़ी संख्या में लोग इन औषधियों को लेने के लिए यहां पहुंच रहे हैं।

विशेष रूप से रविवार और बुधवार को आश्रम में भीड़ और अधिक बढ़ जाती है, जब श्रद्धालु जड़ी-बूटियां प्राप्त करने के लिए कतार में खड़े नजर आते हैं। कई लोग इसे आस्था और आयुर्वेदिक परंपरा का संगम मानते हैं, जबकि कुछ लोग इसे श्रद्धा का विषय बताते हैं।

नवरात्रि पर्व के अवसर पर आश्रम में धार्मिक आयोजनों की भी धूम है। यहां कन्याभोज, भंडारे और भजन-कीर्तन जैसे कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जा रहे हैं। श्रद्धालु पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ इन आयोजनों में भाग ले रहे हैं। वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना हुआ है, जहां हर ओर माता के जयकारे गूंज रहे हैं।

नैनसी देवी की यह साधना अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुकी है। लोग इसे आस्था, तप और समर्पण का अद्भुत उदाहरण मान रहे हैं। कई श्रद्धालु इसे देवी की प्रत्यक्ष कृपा का प्रमाण मानते हैं, वहीं कुछ लोग इसे कठिन साधना और आत्मसंयम की मिसाल बता रहे हैं।

प्रशासनिक स्तर पर भले ही इस आयोजन को लेकर कोई विशेष हस्तक्षेप नहीं किया गया है, लेकिन श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्थानीय स्तर पर व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। आश्रम प्रबंधन भी आने वाले लोगों के लिए सुविधाएं सुनिश्चित करने में जुटा है।

कुल मिलाकर, खजुराहो के पास स्थित यह साधना स्थल इन दिनों आस्था, विश्वास और जिज्ञासा का प्रमुख केंद्र बन गया है, जहां एक युवती की कठिन तपस्या ने हजारों लोगों को आकर्षित कर लिया है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *