नायब तहसीलदार पर छात्रा को थप्पड़ मारने का आरोप !

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छतरपुर/पारा गाँव। पारा गाँव में बुधवार को अधिनियमात्मक अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच विवाद तब भड़क उठा जब नायब तहसीलदार ऋतु सिंघई पर एक छात्रा को थप्पड़ मारने का आरोप लगा। घटना का कारण नक़्क़ली नहीं — खाद वितरण को लेकर लंबित शिकायत और टोकन वितरण को लेकर तीखी नोंक-झोंक रही।

घटना के क्रम की जानकारी इस प्रकार है — स्थानीय छात्रा गुड़िया पटेल (एमए, तीसरा सेमेस्टर) बताती हैं कि वह पिछले दो महीनों से खाद लेने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन बार-बार खाद नहीं मिल रही। बुधवार को वह पारा गाँव में खाद लेने पहुंची और टोकन माँगा। गुड़िया का आरोप है कि नायब तहसीलदार ने कहा कि महिलाओं को टोकन नहीं दिए जाएंगे, केवल पुरुषों को ही टोकन मिलेंगे। जब गुड़िया ने पुनः टोकन माँगा तो आरोप है कि नायब तहसीलदार ने उसे थप्पड़ मार दिया।

गुड़िया ने मीडिया को बताया कि उसकी परीक्षा 5 दिसंबर को है और पढ़ाई का समय निकालकर वह खाद लेने लाइन में लगी हुई थी। उसने आरोप लगाया कि वहाँ लगभग 15 ट्रक खाद स्टॉक में मौजूद होने के बावजूद खाद को ब्लैक में बेचा जा रहा है। गुड़िया ने नायब तहसीलदार पर मिलीभगत और कमीशन लेकर खाद की कालाबाज़ारी करवाने का भी आरोप लगाया। उनका दावा है कि लगभग 250 महिलाएँ रात के 2 बजे से लाइन में खड़ी रहती हैं, फिर भी उन्हें खाद नहीं दी जा रही।

गुड़िया का आरोप है कि टोकन चार-चार दिन तक बांटे जा रहे हैं, पर पैसे देने के बाद भी खाद नहीं मिलती — और यही गड़बड़ी स्थानीय लोगों में रोष का कारण बनी हुई है। गुड़िया ने कहा, “यह कैसा नियम है? तहसीलदार ने मुझे थप्पड़ मारा — इसका परिणाम उसे भुगतना पड़ेगा।”

दूसरी ओर, नायब तहसीलदार ऋतु सिंघई ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि स्थिति बहुत अव्यवस्थित थी और लोग लाइन का पालन नहीं कर रहे थे। उन्होंने कहा, “बहुत सेंसेटिव लोग… यहाँ पर जो अव्यवस्था है — चार अधिकारियों के साथ ये लोग जो कर रहे हैं, उसका आप समर्थन करते हैं क्या? वे लाइन नहीं बना रहे हैं, चढ़ रहे हैं, दुपट्टे खींच रहे, हमारी ही कॉलर को खींच रहे हैं। हर तरीके से इतना पास से वीडियो बनाते हैं।” नायब तहसीलदार का यह भी कहना था कि टोकन देने का समय सुबह 9 बजे था और उस दिन 11 बजे हो चुके थे, भीड़ बढ़ने के कारण टोकन बांटना रोक दिया गया था और 6 दिसंबर से टोकन दिए जाएंगे — इसी के बाद बहस और हाथापाई हुई।

स्थानीय ग्रामीणों और खाद लेने आई महिलाओं का कहना है कि नियम-कायदे के नाम पर खाद की कालाबाज़ारी और प्रभावितों के साथ भेदभाव की खबरें लगातार आ रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि खाद का एक हिस्सा एग्री-ब्लैक में बेचा जा रहा है और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलीभगत से यह सम्भव हो रहा है। नायब तहसीलदार के इस कथित व्यवहार और खाद वितरण के पैटर्न ने इलाके में भारी नाराजगी पैदा कर दी है।

क्या कहा प्रशासन ने?

इस लेखन तक तहसीलदार कार्यालय या कलेक्टरेट की ओर से आधिकारिक शिकायत/प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हुई है। (यदि आप चाहें तो मैं आधिकारिक बयान के लिए कॉल/ईमेल स्टेटमेंट का ड्राफ्ट भी तैयार कर दूँ।) घटना दर्ज कराने, सीसीटीवी फुटेज की जाँच, और तेज़ी से निष्पक्ष तहकीकात की स्थानीय लोगों द्वारा मांग की जा रही है।

प्रभावित पक्ष के मुख्य दावे (सारांश)

  • गुड़िया पटेल सहित कई महिलाएँ दो महीनों से खाद नहीं पा रही हैं।
  • स्थानीय स्टॉक (दावा: ~15 ट्रक) के बावजूद खाद ब्लैक में बेची जा रही है।
  • टोकन वितरण में अनियमितता — चार-चार दिन तक टोकन बांटे जाने का क्रम और भुगतान के बाद भी खाद न मिलना।
  • नायब तहसीलदार पर महिला हितग्राहियों के साथ दुर्व्यवहार (थप्पड़ मारने का आरोप)।
  • भीड़-व्यवस्थापन न होना और अधिकारियों की कथित मिलीभगत।

संभावित आगे की कार्रवाई (स्थानीय मांग)

  • प्रभावित छात्रा/पीड़िता की ओर से लिखित शिकायत एवं आवश्यक होने पर FIR दर्ज किया जाना।
  • घटना के समय मौजूद अधिकारियों व सभासदों के बयानों का रिकॉर्ड।
  • सीसीटीवी/मोबाइल वीडियो की जाँच और सत्यापन।
  • खाद के स्टॉक और वितरण के दस्तावेजों (गेट पास, ट्रक इन्वेंटरी, रजिस्टर) की ऑडिट जाँच।
  • निष्पक्ष तफ़्तीश हेतु जिलाधिकारी/कलेक्टर द्वारा जांच समिति का गठन।
  • वितरण पद्धति में पारदर्शिता लाने के लिए तत्काल सुधार — समयबद्ध टोकन-पद्धति, महिला-योजना का पालन, और भीड़ नियंत्रण व्यवस्थाएँ।

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