खुरई शहर में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते 14 दिनों में कुत्तों के काटने की 102 से अधिक घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे आमजन में भय और आक्रोश का माहौल है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि लोग सुबह-शाम घर से निकलने में भी डर महसूस कर रहे हैं।
बुधवार को एक और चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब नगर पालिका के सफाईकर्मी पर आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया। यह घटना ऑडिटोरियम क्षेत्र के पास हुई, जहां भूपेंद्र पिता प्रकाश वाल्मीक (30) अपने प्लॉट पर गए थे। इसी दौरान एक कुत्ते ने अचानक उन पर हमला कर दिया और उनके पैर में गंभीर घाव कर दिया। मौके पर मौजूद लोगों ने पत्थर मारकर कुत्ते को भगाया, तब जाकर उनकी जान बच सकी। घायल सफाईकर्मी को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।

दस माह में 1900 से अधिक लोग बने शिकार
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह कोई एक-दो दिन की समस्या नहीं है। बीते दस महीनों में 1900 से अधिक लोग आवारा कुत्तों के हमलों का शिकार हो चुके हैं। इसके बावजूद नगर प्रशासन और संबंधित विभाग समस्या के स्थायी समाधान में अब तक नाकाम नजर आ रहे हैं।
प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन
लगातार हो रही घटनाओं से नाराज नागरिकों और समाजसेवियों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। स्थानीय लोगों ने मनोज चौरसिया, एसडीएम खुरई को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की।

समाजसेवी मनोज चौबे ने बताया कि ज्ञापन में प्रमुख रूप से निम्न मांगें रखी गई हैं—
- आवारा कुत्तों को चिन्हित कर शहर की सीमा से बाहर शिफ्ट किया जाए
- पालतू कुत्तों के मालिकों को नोटिस जारी कर उन्हें 24 घंटे नियंत्रण में रखने के निर्देश दिए जाएं
- बिना रजिस्ट्रेशन और टीकाकरण वाले पालतू कुत्तों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए
- शहर में व्यापक रेबीज टीकाकरण अभियान चलाया जाए
- आम नागरिकों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया जाए

नगर पालिका का पक्ष
इस पूरे मामले पर खुरई नगर पालिका के सीएमओ राजेश मेहतेले ने बताया कि आवारा कुत्तों को पकड़ने का टेंडर फिलहाल समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि नगर में श्वानों के लिए नए स्लॉट तैयार किए जा रहे हैं, ताकि लोगों को जल्द राहत मिल सके। साथ ही समय-समय पर कुत्तों को पकड़ने की मुहिम भी चलाई जाती रही है।

जनता को राहत का इंतजार
हालांकि प्रशासन के आश्वासन के बावजूद शहरवासियों का कहना है कि जब तक जमीनी स्तर पर ठोस और नियमित कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आवारा कुत्तों का खतरा बना रहेगा। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इस गंभीर समस्या पर प्रभावी कदम उठाता है और खुरई की जनता को इस आतंक से निजात दिलाता है।