खुरई में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 11 आंगनबाड़ी केंद्रों में नियुक्ति पत्र वितरण — विधायक भूपेन्द्र सिंह बोले, “संवेदनशीलता और सेवा भावना से करें कार्य” !
खुरई में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 11 आंगनबाड़ी केंद्रों में नियुक्ति पत्र वितरण — विधायक भूपेन्द्र सिंह बोले, “संवेदनशीलता और सेवा भावना से करें कार्य” !
खुरई (जिला सागर)। महिला एवं बाल विकास विभाग की खुरई विकासखंड परियोजना अंतर्गत विभिन्न सेक्टरों के आंगनबाड़ी केंद्रों में सहायिकाओं और कार्यकर्ताओं के रिक्त पदों को भरा गया है। शनिवार को आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम में पूर्व गृहमंत्री एवं खुरई विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह ने 11 नव-नियुक्त सहायिकाओं और एक कार्यकर्ता को नियुक्ति पत्र वितरित किए।
कार्यक्रम के दौरान विधायक भूपेन्द्र सिंह ने सभी नवनियुक्त आंगनबाड़ी सहायिकाओं और कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि —
“आंगनबाड़ी केंद्र ग्रामीण और शहरी समाज की आधारशिला हैं। यहां से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा की मजबूत नींव रखी जाती है। प्रत्येक कार्यकर्ता का यह दायित्व है कि वे पूरी निष्ठा, सेवा भावना और संवेदनशीलता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाएं। केंद्र समय पर खुलें, दवाइयां व पौष्टिक आहार समय पर वितरित हों और हर लाभार्थी तक शासन की योजना पहुंचे — यही सच्ची सेवा है।”
✅ नियुक्ति प्रक्रिया और चयन विवरण
महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी श्रीमती वर्षा रघुवंशी ने जानकारी दी कि विभाग द्वारा पोर्टल पर जारी अनंतिम सूची में जिन केंद्रों पर कोई आपत्ति प्राप्त नहीं हुई थी, वहां की 11 नियुक्तियों की अंतिम सूची जारी कर दी गई है। इसी क्रम में शनिवार को नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
👩💼 नियुक्ति पाने वाली सहायिकाएं व कार्यकर्ता
अंजू गोंड – सहायिका, आंगनबाड़ी केंद्र जमुनिया धीरज
अंगूरी गोंड – सहायिका, केंद्र कनेरा गोंड
पार्वती कुशवाह – सहायिका, केंद्र पड़रई
दीक्षा कुर्मी – सहायिका, केंद्र रूसल्ला
शिवानी अहिरवार – सहायिका, केंद्र बारधा 23
अंजलि अहिरवार – सहायिका, केंद्र मढ़ना सुल्तान
चांदनी चढ़ार – सहायिका, केंद्र भुगावली
वंदना दांगी – सहायिका, केंद्र जामुनखेड़ी (अन्य तीन नियुक्तियां प्रशासनिक कारणों से अगले चरण में दी जाएंगी।)
🌸 विधायक का मार्गदर्शन
श्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समाज की पहली स्वास्थ्य सेविका होती हैं। उनका समर्पण ही मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी और पोषण स्तर में सुधार लाने में मदद करता है। उन्होंने सभी नियुक्त कर्मचारियों से कहा कि वे अपने कार्यक्षेत्र के प्रत्येक घर से संपर्क बनाए रखें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी बच्चा कुपोषित न रहे।