बाल शिक्षा को मजबूत आधार देने और आंगनवाड़ी केंद्रों को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से गढ़ाकोटा परियोजना अंतर्गत एक दिवसीय ‘शाला पूर्व शिक्षा सेमिनार’ का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम महिला एवं बाल विकास विभाग, रहली तथा Azim Premji Foundation के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसमें क्षेत्र की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
सेमिनार का मुख्य उद्देश्य 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आंगनवाड़ी स्तर पर किए जा रहे नवाचारों को साझा करना और कार्यकर्ताओं को नई शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराना था। कार्यक्रम के दौरान सात आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपने अनुभव-पत्र प्रस्तुत किए और विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों का डेमो भी दिया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से यह बताया गया कि किस प्रकार बच्चों को नियमित रूप से आंगनवाड़ी केंद्रों में लाकर उन्हें खेल-खेल में सीखने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।

कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि छोटे बच्चों के लिए शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे आनंदमय, रोचक और व्यवहारिक बनाया जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से प्रतिभागियों को खेल, कला, शारीरिक, संज्ञानात्मक तथा सामाजिक विकास से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यकर्ताओं को यह भी समझाया गया कि स्थानीय एवं परिवेशीय संसाधनों का उपयोग कर किस प्रकार कम लागत में प्रभावी शिक्षण सामग्री (टीएलएम) तैयार की जा सकती है।
सेमिनार में कार्यकर्ताओं ने अपने द्वारा तैयार की गई टीएलएम सामग्री का प्रदर्शन किया और यह साझा किया कि इन सामग्रियों का उपयोग बच्चों के साथ किस प्रकार किया जाता है। इस दौरान एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और बेहतर कार्यप्रणाली अपनाने का अवसर भी मिला। यह आपसी संवाद कार्यकर्ताओं के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हुआ, जिससे उन्हें अपने कार्य में सुधार करने के नए विचार प्राप्त हुए।
विशेषज्ञों द्वारा यह भी बताया गया कि प्रारंभिक बाल्यावस्था में बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास अत्यंत तेजी से होता है, इसलिए इस समय दी जाने वाली शिक्षा और गतिविधियाँ उनके भविष्य की नींव तैयार करती हैं। ऐसे में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि वे सही दिशा में बच्चों को मार्गदर्शन दें, तो बच्चों का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।

कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने भी इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सेमिनार न केवल कार्यकर्ताओं के कौशल को बढ़ाते हैं, बल्कि आंगनवाड़ी केंद्रों की गुणवत्ता में भी सुधार लाते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे अपने कार्य को जिम्मेदारी और समर्पण के साथ करें, ताकि बच्चों को बेहतर भविष्य मिल सके।
सेमिनार में नगर पालिका अध्यक्ष, तहसीलदार गढ़ाकोटा, परियोजना अधिकारी श्रीमती शीतल पटेरिया, सेक्टर सुपरवाइजर राजेश्वरी चौबे, स्नेहलता जैन, बबीता भदौरिया, प्रियंका सेन सहित Azim Premji Foundation के प्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने यह संकल्प लिया कि वे सेमिनार में प्राप्त ज्ञान और अनुभवों को अपने-अपने आंगनवाड़ी केंद्रों में लागू करेंगे। इस प्रकार के आयोजन भविष्य में भी नियमित रूप से किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार होता रहे।
कुल मिलाकर, गढ़ाकोटा परियोजना का यह ‘शाला पूर्व शिक्षा सेमिनार’ एक सफल पहल साबित हुआ, जिसने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की। यह आयोजन न केवल शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की ओर एक कदम है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सामूहिक प्रयासों से बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखी जा सकती है।