हत्या के मामलों में काट रहे थे उम्रकैद, शासन की विशेष माफी नीति के तहत मिली रिहाई
सागर।
गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश शासन के जेल विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत सागर स्थित केंद्रीय जेल से हत्या के मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 9 पुरुष बंदियों को रिहा किया गया। यह रिहाई शासन की विशेष माफी नीति के अंतर्गत की गई, जिसमें अच्छे आचरण और पात्रता के आधार पर बंदियों को सजा में छूट प्रदान की जाती है।
केंद्रीय जेल अधीक्षक मानेन्द्र सिंह परिहार ने बताया कि शासन के आदेशानुसार पात्र पाए गए बंदियों को रिहा किया गया है। सभी बंदी लंबे समय से जेल में निरुद्ध थे और उनके व्यवहार, अनुशासन एवं सुधारात्मक गतिविधियों में सहभागिता को देखते हुए उन्हें रिहाई का लाभ दिया गया।
इन मामलों को नहीं मिली माफी
जेल विभाग की नीति के अनुसार बलात्कार, पॉक्सो एक्ट एवं अन्य गंभीर यौन अपराधों में दंडित बंदियों को किसी भी प्रकार की माफी का लाभ नहीं दिया गया है। केवल हत्या जैसे मामलों में आजीवन कारावास से दंडित, पात्र और अच्छे आचरण वाले बंदियों को ही इस योजना में शामिल किया गया।
रिहा हुए बंदियों को सिखाई गईं रोजगारपरक स्किल

जेल प्रशासन द्वारा बंदियों के पुनर्वास को प्राथमिकता देते हुए उन्हें सजा के दौरान विभिन्न रोजगारपरक प्रशिक्षण दिए गए। इनमें
- टेलरिंग
- कारपेंटरी
- लौहकारी
- भवन निर्माण मिस्त्री
- प्रिंटिंग प्रेस
- हथकरघा व बुनाई उद्योग
जैसे कार्य शामिल हैं, ताकि रिहाई के बाद वे स्वावलंबी बन सकें और सम्मानजनक जीवन यापन कर सकें।
अब साल में 5 अवसरों पर होगी रिहाई
मध्यप्रदेश शासन द्वारा आजीवन कारावास से दंडित बंदियों की रिहाई नीति में संशोधन किया गया है। अब बंदियों को वर्ष में 5 अवसरों पर रिहा किया जाएगा। पहले यह रिहाई गणतंत्र दिवस, अम्बेडकर जयंती, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती पर होती थी, लेकिन अब इसमें राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस (15 नवंबर) को भी शामिल कर लिया गया है।
ये बंदी हुए रिहा
गणतंत्र दिवस के मौके पर जिन 9 बंदियों को रिहा किया गया, उनके नाम इस प्रकार हैं—
- रोने उर्फ रोहन पिता हरिराम आदिवासी
- श्यामलाल पिता झम्मू आदिवासी
- ध्रुव सिंह पिता परमलाल लोधी
- लक्ष्मण पिता बन्दू रजक
- रज्जन उर्फ राजकुमार पिता मन्नूलाल रैकवार
- मस्ताना उर्फ गोविन्द पिता मुन्ना रैकवार
- कालका पिता बैजनाथ कुशवाहा
- पल्टू उर्फ परसराम पिता चूरामन पटैल
- राजेन्द्र पिता भारत सिंह लोधी
गीता, गंगाजल और कंबल भेंट कर घर भेजा
रिहाई के दौरान रामसरोज समूह के समाजसेवी शैलेश केसरवानी और अखिलेश मोनी केसरवानी केंद्रीय जेल पहुंचे। उन्होंने रिहा हुए बंदियों को गीता, गंगाजल और कंबल भेंट किए। साथ ही वाहनों की व्यवस्था कर सभी बंदियों को उनके घर भेजा गया।
जरूरत अनुसार दिलाया जाएगा लोन
समाजसेवी शैलेश केसरवानी ने कहा कि अच्छे आचरण और पश्चाताप की भावना के चलते इन बंदियों को रिहा किया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि आवश्यक हुआ तो रामसरोज समूह द्वारा इन बंदियों को रोजगार शुरू करने के लिए लोन की व्यवस्था भी कराई जाएगी, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
वहीं अखिलेश मोनी केसरवानी ने कहा कि कोई भी व्यक्ति जानबूझकर अपराध की राह नहीं चुनता। परिस्थितियों और मजबूरियों में गलतियां हो जाती हैं, लेकिन समाज का कर्तव्य है कि सुधार की राह पर लौट रहे व्यक्ति को स्वीकार किया जाए।
दोबारा अपराध न करने की अपील
जेल अधीक्षक मानेन्द्र सिंह परिहार ने रिहा हुए सभी बंदियों से अपील की कि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़कर मेहनत और ईमानदारी से जीवन यापन करें तथा दोबारा किसी भी प्रकार के अपराध में संलिप्त न हों।
इस अवसर पर जेलर मनोज मिश्रा, डिप्टी जेलर गीता पंकज कुशवाहा, डिप्टी जेलर गीता राठौर, जेलर हरिकिशन, राम राजपूत, अब्बी साहू, अतुल बालकिशोर, जय दुबे, देव शुक्ला सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
