गाजा में ‘वैक्यूम बम’ के इस्तेमाल का आरोप,72 हजार से ज्यादा मौतों का दावा !

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गाजा। इजराइल पर गाजा में ‘वैक्यूम बम’ या ‘थर्मोबैरिक’ हथियारों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट ‘द रेस्ट ऑफ द स्टोरी’ में दावा किया गया है कि इन बमों का असर बेहद विनाशकारी होता है। ये पहले हवा में ईंधन जैसा एयरोसोल बादल फैलाते हैं और फिर उसमें विस्फोट कर आग का विशाल गोला बना देते हैं। इससे आसपास की हवा तेजी से खिंचती है और एक तरह का वैक्यूम प्रभाव पैदा होता है।

रिपोर्ट के अनुसार ऐसे धमाकों में तापमान 3,500 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इन बमों में एल्यूमिनियम और मैग्नीशियम जैसे तत्व होते हैं, जो तेज ताप और दबाव पैदा करते हैं। मिलिट्री एक्सपर्ट्स और चश्मदीदों ने दावा किया है कि गाजा में ‘वैक्यूम’, ‘थर्मल’ या ‘थर्मोबैरिक’ बमों जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया गया।

शव तक नहीं मिले, हजारों लापता

रिपोर्ट में कहा गया है कि हमलों में मारे गए कई लोगों के शव तक नहीं मिल सके। गाजा की सिविल डिफेंस टीम ने 2,842 ऐसे फिलिस्तीनियों का रिकॉर्ड दर्ज किया है, जिनके बारे में कहा गया कि दफनाने के लिए उनका कोई हिस्सा तक नहीं बचा। वहीं 3,500 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संघर्ष में अब तक 72,000 से ज्यादा लोगों की मौत का दावा किया जा रहा है।

सीजफायर के बावजूद जारी हिंसा

गाजा में औपचारिक सीजफायर लागू होने और समझौते के 100 दिन पूरे होने के बाद भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। 10 अक्टूबर 2025 से अब तक 500 से ज्यादा फिलिस्तीनियों के मारे जाने की खबरें सामने आई हैं।

एक मां, यासमीन महानी, ने बताया कि 10 अगस्त 2024 को गाजा सिटी के अल-तबिन स्कूल पर हमले के बाद वह अपने बेटे को तलाशती रहीं। उन्हें अपने पति तो मिल गए, लेकिन बेटे का कोई निशान नहीं मिला। उन्होंने कहा कि दफनाने के लिए बेटे का कोई हिस्सा तक नहीं मिला।

तीन तरह के बमों के इस्तेमाल का आरोप

रिपोर्ट में तीन तरह के हथियारों के इस्तेमाल का दावा किया गया है:

  • एमके-84 ‘हैमर’: करीब 900 किलो का बम, जो भारी दबाव और ताप पैदा करता है।
  • बीएलयू-109 बंकर बस्टर: मजबूत ढांचे में घुसकर अंदर विस्फोट करता है।
  • जीबीयू-39 ग्लाइड बम: सटीक निशाना लगाने वाला बम, जिसके टुकड़े अल-तबिन स्कूल हमले के बाद मिलने का दावा किया गया।

इन हथियारों को एयरोसोल या वैक्यूम बम भी कहा जाता है। रिपोर्ट के अनुसार इनका असर इतना तीव्र होता है कि इमारत बाहर से कम क्षतिग्रस्त दिखती है, लेकिन अंदर व्यापक तबाही हो सकती है।

मानवाधिकार संगठनों की चिंता

मानवाधिकार संगठनों ने घनी आबादी वाले इलाकों में ऐसे हथियारों के कथित इस्तेमाल को लेकर इजराइल पर युद्ध अपराधों के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इस तरह के बमों का शहरी क्षेत्रों में उपयोग अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इजराइली हमलों से गाजा की लगभग 90% इमारतें क्षतिग्रस्त या खंडहर हो चुकी हैं।


ट्रम्प-नेतन्याहू मुलाकात

इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की व्हाइट हाउस में दो घंटे तक बंद कमरे में बैठक हुई।

ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि उन्होंने नेतन्याहू से ईरान के साथ परमाणु समझौते पर बातचीत जारी रखने की बात कही है। उन्होंने कहा कि बैठक सकारात्मक रही, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ।

ट्रम्प ने यह भी उल्लेख किया कि अगर ईरान के साथ समझौता नहीं हुआ तो आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा। उन्होंने ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ का जिक्र करते हुए कहा कि पिछली बार समझौता न होने पर सैन्य कार्रवाई की गई थी।

नेतन्याहू का अमेरिका पर आरोप

इससे पहले 27 जनवरी को नेतन्याहू ने आरोप लगाया था कि गाजा युद्ध के दौरान हथियारों और गोला-बारूद की आपूर्ति रोकने से इजराइल के सैनिकों को नुकसान हुआ। हालांकि उन्होंने मृत सैनिकों की संख्या नहीं बताई। उन्होंने संकेत दिया कि हथियारों की आपूर्ति में बदलाव अमेरिकी नेतृत्व परिवर्तन के बाद हुआ।

गाजा में जारी संघर्ष, युद्ध अपराधों के आरोप और वैश्विक कूटनीतिक गतिविधियों के बीच क्षेत्र में हालात अब भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

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