गुजरात में लगातार स्कूली हिंसा: महिसागर और अहमदाबाद की घटनाओं ने खड़े किए सवाल ;

Spread the love

गुजरात में स्कूली छात्रों के बीच लगातार हिंसक घटनाएं सामने आ रही हैं। अहमदाबाद के सेवेंथ डे स्कूल में 10वीं के छात्र की चाकू मारकर हत्या के बाद अब महिसागर जिले के बालासिनोर कस्बे के सरकारी स्कूल में 8वीं कक्षा का छात्र अपने ही सहपाठी पर चाकू से हमला कर बैठा। ये घटनाएं न केवल शिक्षा जगत बल्कि समाज के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं।


बालासिनोर की घटना: खेलकूद के झगड़े से बढ़ी रंजिश

गुरुवार शाम छुट्टी के बाद जब छात्र स्कूल से बाहर निकल रहे थे, तभी 8वीं क्लास के एक छात्र ने अपने सहपाठी पर चाकू से हमला कर दिया।

  • पीड़ित छात्र के कंधे, कमर और पेट में चोटें आईं।
  • उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, फिलहाल उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
  • पूछताछ में सामने आया कि एक दिन पहले खेलकूद के दौरान विवाद हुआ था।
  • आरोपी छात्र ने उसी रंजिश में चाकू लाकर वारदात को अंजाम दिया।
  • कई बच्चों ने बताया कि आरोपी छात्र पहले से ही बैग में चाकू रखकर आया था।

पुलिस ने आरोपी छात्र पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(1), 118(1)(2), और 352 के तहत मामला दर्ज किया है।


अहमदाबाद में चाकू से हत्या: लापरवाही पर भड़की भीड़

इससे पहले 19 अगस्त को अहमदाबाद में सेवेंथ डे स्कूल के 10वीं क्लास के छात्र नयन सिंधी की उसके ही सहपाठी ने हत्या कर दी थी।

  • दोनों के बीच कुछ दिन पहले मामूली कहासुनी हुई थी।
  • आरोपी छात्र ने छुट्टी के बाद स्कूल के बाहर बॉक्स कटर से हमला कर दिया।
  • ज्यादा खून बहने से नयन की मौत हो गई।
  • लोगों का आरोप है कि समय पर अस्पताल न ले जाने और इलाज में देरी से उसकी जान गई।

वारदात के बाद गुस्साई करीब 2 हजार लोगों की भीड़ ने स्कूल का घेराव कर तोड़फोड़ की और स्टाफ की पिटाई कर दी।


आरोपी छात्र की चैट वायरल

अहमदाबाद कांड के बाद आरोपी छात्र की एक दोस्त से हुई चैट भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई।

  • चैट में दोस्त ने कहा – “चाकू नहीं मारना चाहिए था, अब अंडरग्राउंड हो जा।”
  • इस पर आरोपी ने जवाब दिया – “जो हो गया, सो हो गया।”
    यह बातचीत साफ दिखाती है कि बच्चों में हिंसा को लेकर संवेदनहीनता और गंभीरता की कमी बढ़ रही है।

शिक्षा जगत के लिए गहरी चिंता

दोनों घटनाओं ने शिक्षा जगत और समाज को झकझोर कर रख दिया है।

  • एक तरफ बच्चों के हाथ में किताबें होनी चाहिए, वहीं अब चाकू और हथियार नजर आ रहे हैं।
  • छोटी-छोटी कहासुनी और खेलकूद के झगड़े भी अब खून-खराबे में बदल रहे हैं।
  • मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि सोशल मीडिया, मोबाइल गेम्स और पारिवारिक दबाव बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहे हैं।
  • स्कूलों में काउंसलिंग और अनुशासनात्मक कदम की बेहद जरूरत है।

प्रशासन और समाज के लिए सवाल

  1. बच्चे इतनी आसानी से हथियार स्कूल कैसे ले जा रहे हैं?
  2. स्कूल प्रबंधन छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित क्यों नहीं कर पा रहा?
  3. क्या बच्चों में बढ़ती आक्रामकता समाज के बदलते माहौल की झलक है?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *