गौर उत्सव का भव्य समापन: खुरई में 2000 लोगों ने डॉ. हरीसिंह गौर को भारत रत्न दिलाने का संकल्प लिया !

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खुरई में रविवार को आयोजित गौर उत्सव का भव्य समापन हुआ, जो डॉ. हरीसिंह गौर के योगदान और उनके आदर्शों को समर्पित था। इस आयोजन में क्षेत्रीय नागरिकों, शिक्षाविदों, न्यायाधीशों और विद्यार्थियों ने भाग लिया और डॉ. गौर के आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। समारोह में प्रमुख रूप से सांसद डॉ. लता वानखेडे, डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. नीलिमा गुप्ता और मंदसौर के जिला न्यायाधीश गंगाचरण दुबे उपस्थित थे। समारोह की अध्यक्षता चेतना शिक्षा एवं सामाजिक समिति की अध्यक्ष, पूर्व प्राचार्य कमला नायक ने की। इस अवसर पर क्षेत्रीय नेताओं और प्रतिष्ठित हस्तियों ने डॉ. गौर के जीवन और उनके योगदान पर प्रकाश डाला।

सांसद डॉ. लता वानखेडे का संबोधन
सागर सांसद डॉ. लता वानखेडे ने अपने संबोधन में डॉ. हरीसिंह गौर के जीवन की महत्वपूर्ण पहलुओं पर बात की। उन्होंने कहा, “डॉ. गौर का सपना था कि हर ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा का प्रकाश फैले। आज उनके द्वारा देखे गए सपनों को साकार करने का कार्य खुरई में किया जा रहा है।” सांसद ने यह भी कहा कि डॉ. गौर के प्रति खुरई क्षेत्र में सम्मान की एक गौरवमयी परंपरा है।

राजीव लोचनाचार्य महाविद्यालय के संस्थापक प्रमोद नायक का आभार
राजीव लोचनाचार्य महाविद्यालय के संस्थापक प्रमोद नायक ने समारोह में भाग लेने वालों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “डॉ. हरीसिंह गौर को भारत रत्न मिलना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। यह हम सभी का कर्तव्य है कि हम उनके योगदान को मान्यता दिलवाएं।” उन्होंने कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी लोगों से डॉ. गौर को भारत रत्न दिलाने के लिए एकजुट होने की अपील की।

जिला न्यायाधीश गंगाचरण दुबे का विद्यार्थियों को प्रेरित करना
मंदसौर के जिला न्यायाधीश गंगाचरण दुबे ने विद्यार्थियों से संघर्ष, मेहनत और अनुशासन को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “जो लोग अपने जीवन में पूरी मेहनत और समर्पण से काम करते हैं, वही समाज में महान बनते हैं।” उन्होंने विद्यार्थियों से अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण की भावना को अपनाने की बात की।

कुलपति डॉ. नीलिमा गुप्ता का संबोधन
डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. नीलिमा गुप्ता ने डॉ. गौर के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डॉ. गौर एक महान शिक्षाविद, समाज सुधारक और विधि विशेषज्ञ थे। उनके संघर्षपूर्ण जीवन ने समाज में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से डॉ. गौर की कृतियों का अध्ययन करने और उनके आदर्शों पर चलने की अपील की। इसके साथ ही, डॉ. गुप्ता ने डॉ. गौर को भारत रत्न से सम्मानित किए जाने के लिए चल रहे हस्ताक्षर अभियान में भाग लेने की प्रेरणा दी।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम की शोभा
गौर उत्सव के समापन पर विद्यार्थियों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं, जिसमें संगीत, नृत्य और नाटक शामिल थे। इन प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को जीवंत और रंगीन बना दिया। विद्यार्थियों ने अपनी कला और संस्कृति के प्रति समर्पण का प्रदर्शन किया और सभी को प्रभावित किया।

समारोह में 2000 से अधिक लोगों की उपस्थिति
समारोह के दौरान, खुरई और मालथौन क्षेत्र के विभिन्न शैक्षिक संस्थानों ने भी भाग लिया और विद्यार्थियों तथा स्थानीय नागरिकों ने डॉ. गौर के योगदान और उनके जीवन को सम्मानित किया। इस कार्यक्रम में 2000 से अधिक लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने डॉ. हरीसिंह गौर को भारत रत्न दिलाने का संकल्प लिया।

यह आयोजन क्षेत्र में शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देने का एक सफल प्रयास साबित हुआ। आयोजन ने यह संदेश दिया कि डॉ. गौर के सपनों को साकार करने के लिए सभी को एकजुट होना होगा और उनके आदर्शों का पालन करना होगा।

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