स्कूलों में छोटे बच्चे सबसे अधिक प्रभावित, बिना जांच दवा लेने से बढ़ रहा खतरा
सागर। बरसात का मौसम शुरू होते ही सर्दी-जुकाम और बुखार जैसी मौसमी बीमारियों ने लोगों को जकड़ना शुरू कर दिया है। खासतौर पर प्राइमरी और प्री-प्राइमरी स्कूलों के बच्चे इस संक्रमण की चपेट में ज्यादा आ रहे हैं।
स्कूल खुलने से बढ़ा संक्रमण का खतरा
बीएमओ डॉ. संजीव अग्रवाल का कहना है कि लंबे समय बाद स्कूल खुलने के कारण बच्चे बड़ी संख्या में एक-दूसरे के संपर्क में आ रहे हैं।
- छोटे बच्चे साफ-सफाई का ध्यान कम रख पाते हैं।
- एक ही बेंच पर बैठने, साथ खेलने और खाना साझा करने से संक्रमण तेजी से फैल रहा है।
- ग्रामीण क्षेत्रों के कई स्कूलों में साफ पानी और स्वच्छ शौचालय की व्यवस्था न होने से भी समस्या बढ़ रही है।

मौसम की मार
चिकित्सकों का मानना है कि इस समय मानसून का उतार-चढ़ाव बीमारियों का बड़ा कारण है।
- दिन में उमस और गर्मी, शाम को ठंडक और लगातार बारिश से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो रही है।
- वायरल बुखार के अलावा डायरिया, पीलिया और टाइफाइड जैसे मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं।
- दूषित पानी और अस्वच्छ खानपान बीमारियों को और बढ़ा रहा है।
झोलाछाप डॉक्टरों के पास पहुंच रहे ग्रामीण
गांवों में लोग बिना जांच करवाए झोलाछाप डॉक्टरों के पास जा रहे हैं।
- गलत दवा लेने से संक्रमण और गंभीर रूप ले सकता है।
- कई जगह निजी क्लीनिकों में मरीजों पर महंगी जांच और दवाओं का दबाव बनाया जा रहा है।
- गरीब और अशिक्षित परिवार इस कारण और अधिक शोषित हो रहे हैं।

त्योहारों में असंतुलित खानपान भी कारण
तभी तो डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि आने वाले त्योहारी सीजन में भीड़भाड़ और असंतुलित खानपान से संक्रमण और तेज़ी से फैल सकता है।
- मेलों और आयोजनों में बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
- खुले में बिकने वाला खाद्य पदार्थ और गंदा पानी बीमारियों को जन्म दे रहा है।
समाधान क्या है?
- बच्चों को साफ-सफाई के प्रति जागरूक करना होगा।
- ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर और प्राथमिक उपचार की सुविधा बढ़ाना जरूरी है।
- बिना जांच दवा लेने से बचें और सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर की सलाह लें।
- त्योहारों में संतुलित खानपान और सुरक्षित पेयजल पर ध्यान दें।