सागर। विकासखंड रहली के ग्राम चनौआ बुजुर्ग में किसानों को वैज्ञानिक खेती और फसलों को कीट-रोगों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन (आईपीएम) पर मानव संसाधन विकास कार्यक्रम रबी 2026 का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, मुरैना द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें क्षेत्र के किसानों को आधुनिक और सुरक्षित कृषि तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन के विभिन्न घटकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसमें सस्य नियंत्रण, यांत्रिक विधियां, वानस्पतिक कीटनाशक, जैविक कीटनाशक और रासायनिक कीटनाशकों के संतुलित व आवश्यकता आधारित उपयोग की विधियों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि आईपीएम अपनाने से फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ लागत में कमी आती है और पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव भी कम होते हैं।

केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र मुरैना के वैज्ञानिक डॉ. कटियार और डॉ. अभिषेक ने किसानों को कीटों की पहचान, उनके जीवन चक्र और समय पर नियंत्रण की तकनीकों के बारे में बताया। वहीं केवीके देवरी के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. आशीष त्रिपाठी ने कहा कि रसायनों का अंधाधुंध उपयोग न कर वैज्ञानिक सलाह के अनुसार प्रयोग करना चाहिए, जिससे फसल सुरक्षित रहने के साथ मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है।
कार्यक्रम में क्षेत्रीय कृषि विस्तार अधिकारी आनंद मुलेवा, चेतन बड़ोले और राहुल सिंह लोधी ने भी किसानों को विभागीय योजनाओं और तकनीकी सहयोग की जानकारी दी। इस अवसर पर जनपद सदस्य करण सिंह, ग्राम सरपंच छोटू कुर्मी सहित उन्नतशील एवं प्रगतिशील 50 से अधिक कृषक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में किसानों ने विशेषज्ञों से सवाल-जवाब कर अपनी समस्याएं साझा कीं और आईपीएम तकनीक को अपनाने का संकल्प लिया। आयोजकों ने आशा व्यक्त की कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से किसानों की आय में वृद्धि होगी और टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिलेगा।