छतरपुर, मध्य प्रदेश – जिले के आदिम जाति कल्याण विभाग कार्यालय में मंगलवार को छात्रावास कर्मचारियों ने वेतन भुगतान में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने विभाग के एकाउंटेंट रामबाबू शुक्ला पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें कमीशन मांगने और वेतन रोकने की धमकी प्रमुख हैं।

84 दिन की हाजिरी, केवल 5 हजार का भुगतान
महोबा रोड स्थित छात्रावास में कार्यरत अर्चना राजपूत ने बताया कि उन्हें 84 दिनों की नियमित सेवा के बावजूद केवल ₹5,000 का भुगतान किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि बीते 6 महीनों से उनका वेतन पूरी तरह बकाया है। अर्चना सहित अन्य कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें कलेक्टर द्वारा निर्धारित ₹404 प्रतिदिन की दर से वेतन दिया जाए, जो लगभग ₹12,120 मासिक बनता है।
“कमीशन देने वालों को पूरा भुगतान, बाकी हो रहे परेशान”
लवकुशनगर छात्रावास के सुरेश कुमार नागर ने बताया कि पिछले एक साल से उन्हें और कई अन्य कर्मचारियों को भुगतान में लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिले में कुल 204 छात्रावास कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से 76 कर्मचारियों ने यह आरोप लगाया कि जो कर्मचारी कथित रूप से कमीशन देते हैं, उन्हें समय पर पूरा वेतन मिल जाता है। वहीं, जो कर्मचारी भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े हैं, उन्हें मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।

रामबाबू शुक्ला और प्रियंका राजपूत पर आरोप
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने एकाउंटेंट रामबाबू शुक्ला के साथ-साथ विभाग की ही एक अन्य अधिकारी प्रियंका राजपूत पर भी कर्मचारियों को परेशान करने का आरोप लगाया है। इनका कहना है कि अधिकारियों द्वारा बदले की भावना से वेतन रोका जाता है और बार-बार धमकियाँ दी जाती हैं।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा धरना
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक जिला कलेक्टर उनके प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर उनकी मांगों को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं करते, तब तक उनका धरना जारी रहेगा। वेतन की नियमितता, पारदर्शिता और भ्रष्टाचारमुक्त व्यवस्था की मांग को लेकर यह आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
इस पूरे प्रकरण पर अभी तक जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। कर्मचारियों ने कहा है कि यदि जल्द कोई समाधान नहीं निकाला गया तो वे जनसुनवाई, सीएम हेल्पलाइन और उच्च अधिकारियों के समक्ष भी अपनी बात उठाएंगे।