छतरपुर | जिले की कृषि उपज मंडी में इन दिनों खाद का गंभीर संकट देखने को मिल रहा है। रबी फसलों के लिए खाद की बढ़ती मांग के बीच किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल पा रही है, जिससे उनकी परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। मंडी परिसर में खाद वितरण के लिए कुल सात काउंटर बनाए गए हैं, जिनमें से दो काउंटर महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद हालात सामान्य नहीं हो पा रहे हैं।

किसानों का कहना है कि उन्हें सुबह 4 से 5 बजे के बीच ही मंडी पहुंचकर लाइन में लगना पड़ता है। घंटों इंतजार के बाद भी कई किसानों को खाद नहीं मिलती और उन्हें निराश होकर घर लौटना पड़ता है। वहीं प्रशासन का दावा है कि व्यवस्था पूरी तरह सुचारू है और लगातार निगरानी की जा रही है।
कालाबाजारी के आरोप, खुले बाजार में महंगे दामों पर खाद उपलब्ध
किसानों ने मंडी में खाद की कालाबाजारी के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सरकारी काउंटरों पर खाद सीमित मात्रा में दी जा रही है, जबकि खुले बाजार में वही खाद आसानी से उपलब्ध है, लेकिन दाम कई गुना अधिक हैं। किसानों का आरोप है कि मजबूरी में उन्हें महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है।

खाद की कमी का असर अब खेतों में भी दिखने लगा है। कई किसानों की फसलें पीली पड़ने लगी हैं, जिससे उत्पादन घटने की आशंका बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर खाद नहीं मिली तो उनकी मेहनत और लागत दोनों बर्बाद हो सकती हैं।
महिलाएं और छात्र भी कतारों में, पढ़ाई और कामकाज प्रभावित
खाद संकट का असर केवल पुरुष किसानों तक सीमित नहीं है। कड़ाके की ठंड में महिलाएं और छात्र भी खुले आसमान के नीचे घंटों लाइन में खड़े नजर आ रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि घर के पुरुष सदस्य खेतों में सिंचाई और अन्य कृषि कार्यों में व्यस्त हैं, इसलिए उन्हें ही खाद लेने मंडी आना पड़ रहा है।

वहीं छात्र बताते हैं कि बोर्ड परीक्षाओं का समय नजदीक है, इसके बावजूद उन्हें पढ़ाई छोड़कर खाद के लिए लाइन में लगना पड़ रहा है। इससे उनकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
अधिकारियों का दावा- व्यवस्था दुरुस्त, कहीं कोई समस्या नहीं
मामले में अनुविभागीय अधिकारी (कृषि) अनिल मिश्रा का कहना है कि किसानों की सुविधा के लिए महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग काउंटर बनाए गए हैं। कालाबाजारी रोकने के उद्देश्य से निजी खाद विक्रेताओं के काउंटर भी मंडी परिसर में लगाए गए हैं। इन काउंटरों पर राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों की मौजूदगी में खाद का वितरण किया जा रहा है। उनका दावा है कि पूरे सिस्टम पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और कहीं किसी तरह की परेशानी नहीं है।

कृषि मंत्री के प्रभार वाले जिले में खाद की किल्लत पर सवाल
गौरतलब है कि छतरपुर जिले के प्रभारी मंत्री स्वयं प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना हैं। उन्होंने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिले में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध होने का दावा किया था। इसके अलावा, छतरपुर कलेक्टर भी जिले में खाद की कोई कमी न होने और सभी किसानों को खाद मिलने की बात कह चुके हैं।
हालांकि, मंडी की जमीनी हकीकत इन दावों से उलट नजर आ रही है। लंबी कतारें, खाली हाथ लौटते किसान और पीली पड़ती फसलें प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। किसान अब मांग कर रहे हैं कि खाद की आपूर्ति बढ़ाई जाए और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि उन्हें समय पर खाद मिल सके और उनकी फसलें बचाई जा सकें।