छतरपुर (मध्य प्रदेश)।
जिले के नौगांव स्थित सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज के हॉस्टल में रविवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे ने सभी को झकझोर दिया। वाटर कूलर में करंट आने से 18 वर्षीय छात्र राज तिवारी की मौत हो गई। वह पानी पीने के लिए कूलर के पास गया था, लेकिन जैसे ही उसने पानी लेने की कोशिश की, उसे करंट लगा और वह अचेत होकर गिर पड़ा। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
यह घटना न केवल एक परिवार के सपनों को तोड़ गई, बल्कि कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर गई है।
रीवा से नौगांव तक का सफर अधूरा
मृतक राज तिवारी रीवा जिले के चिल्ला खुर्द गांव का रहने वाला था। वह Government Polytechnic College Nowgong में मैकेनिकल प्रथम वर्ष का छात्र था और नवीन हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा था। परिवार ने उसे बेहतर भविष्य के लिए घर से दूर भेजा था, लेकिन उन्हें यह अंदेशा भी नहीं था कि एक साधारण-सी लापरवाही उनके बेटे की जान ले लेगी।
साथी छात्रों के अनुसार, रविवार दोपहर पढ़ाई के बाद राज पानी पीने के लिए हॉस्टल परिसर में लगे वाटर कूलर तक गया था। जैसे ही उसने नल छूकर पानी लेने की कोशिश की, तेज करंट ने उसे अपनी चपेट में ले लिया।

अचेत होकर गिरा, अस्पताल में तोड़ा दम
करंट लगते ही राज वहीं गिर पड़ा। आसपास मौजूद छात्रों ने जब उसे जमीन पर गिरा देखा तो घबराकर तुरंत उसे उठाया और नौगांव अस्पताल ले गए। लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही कॉलेज प्राचार्य रामेश कुमार गोस्वामी ने मृतक के परिजनों को फोन पर जानकारी दी। खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।
पहले भी की गई थी शिकायत
हॉस्टल में रहने वाले छात्रों ने कॉलेज प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वाटर कूलर में करंट आने की शिकायत पहले ही की जा चुकी थी। इसके बावजूद समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया और न ही समय रहते मरम्मत कराई गई।
छात्रों के अनुसार, यदि शिकायत पर तत्काल कार्रवाई होती तो यह हादसा टल सकता था। इस घटना के बाद छात्रों में आक्रोश और भय दोनों का माहौल है।
प्यून ने भी मानी बात
हॉस्टल के प्यून माधव प्रसाद ने भी स्वीकार किया कि शनिवार शाम से ही वाटर कूलर में करंट आने की समस्या थी। उनके अनुसार, इस बारे में जानकारी दी गई थी, लेकिन सुधार नहीं कराया गया।
यदि यह दावा सही साबित होता है तो यह मामला केवल हादसा नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही का उदाहरण माना जाएगा।

पुलिस ने शुरू की जांच
घटना के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर मामला विद्युत व्यवस्था में खामी और रखरखाव में लापरवाही का प्रतीत हो रहा है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वाटर कूलर की तकनीकी जांच कराई जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि करंट किस कारण से आ रहा था।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि क्या नियमित रूप से उपकरणों की सर्विसिंग की जा रही थी या नहीं। यदि लापरवाही सिद्ध होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
शोक में डूबा परिसर
घटना के बाद से कॉलेज और हॉस्टल परिसर में शोक का माहौल है। साथी छात्र स्तब्ध हैं कि एक सामान्य दिन अचानक इस तरह त्रासदी में बदल गया। कई छात्रों ने कहा कि वे अब हॉस्टल की सुविधाओं को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
परिजन भी कॉलेज प्रबंधन से जवाब मांग रहे हैं कि आखिर उनकी शिकायतों के बावजूद समस्या को नजरअंदाज क्यों किया गया।

बड़ा सवाल—जिम्मेदारी किसकी?
यह हादसा एक बार फिर शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े करता है। छात्रावासों में लगे विद्युत उपकरणों की नियमित जांच और रखरखाव अत्यंत आवश्यक है। थोड़ी-सी अनदेखी भी जानलेवा साबित हो सकती है।
राज तिवारी की असमय मौत ने न केवल उसके परिवार को गहरा आघात पहुंचाया है, बल्कि पूरे जिले को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हमारे शैक्षणिक संस्थान छात्रों की सुरक्षा को पर्याप्त प्राथमिकता दे रहे हैं?
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या निष्कर्ष निकलते हैं और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है। लेकिन एक होनहार छात्र की जिंदगी लौटकर नहीं आएगी—और यही इस हादसे की सबसे बड़ी त्रासदी है।