छतरपुर में आरक्षक की मुस्तैदी से बचा छात्र का साल, 5 मिनट में 4 किमी दूर पहुंचाया परीक्षा केंद्र !

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छतरपुर। 10वीं बोर्ड परीक्षा के पहले ही दिन एक मानवीय पहल ने न सिर्फ एक छात्र का साल बचा लिया, बल्कि पुलिस की संवेदनशील छवि भी सामने रख दी। मामला छतरपुर शहर का है, जहां एक आरक्षक की तत्परता से छात्र समय पर अपने सही परीक्षा केंद्र पहुंच सका।

घटना शासकीय महारानी लक्ष्मी बाई कन्या उमावि, केंद्र क्रमांक 221003 की है। मंगलवार सुबह एक छात्र परीक्षा देने यहां पहुंचा, लेकिन प्रवेश पत्र की जांच के दौरान पता चला कि उसका वास्तविक परीक्षा केंद्र यहां से करीब 4 किलोमीटर दूर है। परीक्षा शुरू होने में मात्र 5 मिनट शेष थे। साधन न होने और समय कम होने के कारण छात्र घबराकर परेशान हो गया।

आरक्षक ने दिखाई तत्परता

उसी समय ड्यूटी पर तैनात सिटी कोतवाली के आरक्षक राजेश सिंह बागरी (क्रमांक 582) ने छात्र की स्थिति देखी। उन्होंने बिना देर किए अपनी ड्यूटी साथी महिला आरक्षक को जिम्मेदारी सौंपी और छात्र को अपनी बाइक पर बैठाकर सही परीक्षा केंद्र की ओर रवाना हो गए।

सुबह के समय ट्रैफिक अपेक्षाकृत कम था। आरक्षक ने तेजी और सतर्कता से बाइक चलाते हुए लगभग 5 मिनट में 4 किलोमीटर की दूरी तय की और छात्र को उसके सही केंद्र पर पहुंचा दिया। समय पर पहुंचने से छात्र को परीक्षा में प्रवेश मिल गया।

“मैंने सिर्फ अपना फर्ज निभाया”

आरक्षक राजेश सिंह बागरी ने कहा कि छात्र की आंखों में घबराहट साफ दिखाई दे रही थी। उन्हें लगा कि एक छोटी सी मदद से उसका पूरा साल बच सकता है। उन्होंने कहा, “मैंने सिर्फ अपना फर्ज निभाया है।”

सहायक केंद्राध्यक्ष सरिता चौरसिया ने बताया कि परीक्षा ड्यूटी के कारण स्कूल स्टाफ बाहर नहीं जा सकता था। ऐसे में आरक्षक की मानवीय पहल काबिल-ए-तारीफ है।

स्मार्ट पुलिसिंग की मिसाल

घटना के बाद परीक्षा केंद्र पर मौजूद अभिभावकों, समाजसेवियों और पत्रकारों ने आरक्षक की तत्परता की सराहना की। कई लोगों ने इसे ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ का उदाहरण बताते हुए विभागीय स्तर पर सम्मानित किए जाने की मांग भी की है।

इस छोटी सी पहल ने यह साबित कर दिया कि संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ निभाया गया कर्तव्य किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।

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