छतरपुर में महिला के साथ गैंगरेप का मामला: 5 दिन बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, पीड़िता न्याय की गुहार लगाते थक गई !

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छतरपुर (मध्य प्रदेश)। एक महिला ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर गैंगरेप और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाई। शिकायत करते-करते उसकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे संभाला। महिला का आरोप है कि गांव के सरपंच और सचिव ने उसके दूसरे पति के कहने पर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया, लेकिन 5 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की


पीड़िता का आरोप: “प्रेमजाल में फंसाकर शादी की, फिर गैंगरेप करवाया”

  1. पहली शादी से तलाक: पीड़िता दमोह जिले की निवासी है। उसकी पहली शादी 14 फरवरी 2014 को भतपुरा गांव के भारत राजपूत से हुई थी, जिससे उसके तीन बच्चे हैं।
  2. दूसरी शादी का षड्यंत्र: लक्ष्मी प्रसाद राजपूत (पंचायत में मेट पद पर कार्यरत) ने उसे प्रेमजाल में फंसाकर पहले पति से तलाक दिलवाया और 16 मई 2025 को कोर्ट मैरिज कर ली।
  3. गैंगरेप की घटना: पिछले रविवार रात लक्ष्मी उसे गांव ले गया, जहां सरपंच मुलायम लौधी और सचिव बल्लू शर्मा ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया। विरोध करने पर उसे मारपीट भी की गई।

प्रशासन और पुलिस की लापरवाही: 5 दिन बाद भी नहीं हुई FIR

  • पीड़िता ने बिजावर थाना, महिला थाना, एसपी कार्यालय और कलेक्ट्रेट में शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई
  • एडिशनल एसपी विदिता डांगर ने कहा, “हमें अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है। जांच के बाद कार्रवाई होगी।”
  • बिजावर थाना प्रभारी कमलजीत सिंह ने पीड़िता के पिछले रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि वह पहले भी एक व्यक्ति के खिलाफ धारा 376 (बलात्कार) का केस दर्ज करवा चुकी है

सवाल: क्या पीड़िता का पिछला रिकॉर्ड न्याय में बाधक होगा?

  • पुलिस का रवैया संदेह पैदा करता है कि कहीं सरपंच और सचिव के दबाव में केस दबाने की कोशिश तो नहीं हो रही।
  • महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि “पीड़िता का पिछला केस उसकी वर्तमान शिकायत को कमजोर नहीं करता। पुलिस को तुरंत FIR दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार करना चाहिए।”

क्या छतरपुर प्रशासन पीड़िता को न्याय दिला पाएगा?

  • मामला यौन हिंसा, सत्ता का दुरुपयोग और प्रशासनिक उदासीनता का गंभीर उदाहरण है।
  • महिला आयोग और राज्य मानवाधिकार आयोग को हस्तक्षेप करना चाहिए।
  • सवाल यह भी है कि क्या सरपंच और सचिव जैसे पदाधिकारियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई होगी, या फिर पीड़िता को लंबा इंतजार करना पड़ेगा?

ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !

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