छतरपुर | मंगलवार को छतरपुर जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट के जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित जनसुनवाई में 70 वर्षीय स्वामी प्रसाद चौबे ने अधिकारियों पर 15 सालों से अपनी समस्या का समाधान न करने का आरोप लगाया। वृद्ध ने बताया कि उन्हें लगातार ‘तारीख पर तारीख’ दी जाती रही, लेकिन उनकी समस्या का कोई निराकरण नहीं हुआ।
स्वामी प्रसाद चौबे, जो छतरपुर तहसील के कादरी गांव के निवासी हैं, ने कहा कि वे वर्ष 2010 से अपनी समस्या के समाधान के लिए परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा उन्हें एक विभाग से दूसरे विभाग भेजा जाता रहा। उन्होंने तहसील, एसडीएम कार्यालय, सिंचाई विभाग, पुलिस विभाग और एसडीओ कार्यालय सहित कई जगहों पर जाने के बावजूद अपनी सुनवाई नहीं होने की बात कही।

खसरा की नकल नहीं मिलने से परेशानी
वृद्ध ने विशेष रूप से खसरा नंबर 409 की 1993 से 1999 तक की नकल मांगी, जो अब तक उन्हें नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि जब भी वह आवेदन के संबंध में जानकारी लेने जाते हैं, तो उन्हें ‘कल आना’, ‘परसों आना’, ‘एक हफ्ते बाद आना’ या ‘अगले महीने आना’ जैसे जवाब मिलते हैं। स्वामी प्रसाद ने कहा कि अधिकारियों को उनके आवेदन खोजने में महीनों और साल लग जाते हैं, और अंत में कहा जाता है कि दस्तावेज नहीं मिले, जबकि उनके पास सभी आवश्यक कागजात मौजूद हैं। उन्होंने जनसुनवाई को केवल औपचारिकता बताते हुए कहा कि वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं होता।
जनसुनवाई में अधिकारियों की मौजूदगी
जनसुनवाई में डिप्टी कलेक्टर विशा माधवानी, तहसीलदार और अन्य जिला अधिकारी उपस्थित रहे। जिले के सभी अनुभागों के एसडीएम और तहसीलदार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। डिप्टी कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आमजन की शिकायतों का प्राथमिकता से और गंभीरता से समाधान किया जाए।
130 शिकायतें दर्ज
जनसुनवाई में कुल 130 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें शिक्षा, राजस्व, पुलिस, नगरीय निकाय, ग्रामीण विकास, बिजली, स्वास्थ्य, खाद्य, आदिम जाति, श्रम, सामाजिक न्याय और महिला एवं बाल विकास से जुड़ी समस्याएं शामिल रहीं। डिप्टी कलेक्टर ने सभी संबंधित विभागों को आवेदन सौंपते हुए जल्द से जल्द निराकरण करने के निर्देश दिए।
इस जनसुनवाई ने यह स्पष्ट किया कि जिले में आमजन की समस्याओं को सुनने और समाधान करने के लिए अधिकारी मौजूद हैं, लेकिन लंबित मामलों और प्रक्रिया में देरी के कारण कई शिकायतें वर्षों तक अनसुलझी रह जाती हैं।